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अमांडा गोरमैन: बाइडेन के शपथ ग्रहण में कविता पढ़ने वाली लड़की, जो खुद राष्ट्रपति बनना चाहती है

Amanda Gorman का जन्म लॉस एंजेलेस में हुआ. 2013 में मलाला युसुफजई के एक भाषण ने उन्हें काफी प्रभावित किया.

हम इस घायल दुनिया को चमत्कारिक बनाएंगे
हम उठेंगे पश्चिम की सुनहरे पंख वाली पहाड़ियों से
हम उठेंगे उत्तर पूर्व से, जहां चलते हैं हवा के तेज झोंके
जहां हमारे पूर्वजों ने तैयार की थी क्रांति की रूपरेखा
हम उठेंगे मध्य पश्चिम राज्यों की झीलों से घिरे हुए शहरों से
हम उठेंगे सूर्य के ताप में तपते हुए दक्षिण से
हम करेंगे पुनर्निमाण, बिठाएंगे तालमेल और फिर से हो जाएंगे ठीक

ये पंक्तियां अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन के शपथ ग्रहण समारोह में पढ़ी गईं. 22 साल की कवियत्री अमांडा गोरमैन ने ये कविता पढ़ी. कविता खत्म होते ही अमांडा का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. वे महान अमेरिकी कवियों रॉबर्ट फ्रॉस्ट और माया एंजेलो की श्रेणी में आ खड़ी हुईं. रॉबर्ट फ्रॉस्ट ने जेएफ केनेडी के शपथ ग्रहण समारोह में कविता पाठ किया था, वहीं माया एंजेलो ने बिल क्लिंटन के समय.

इसके साथ ही वो राष्ट्रपति शपथ ग्रहण समारोह में कविता पाठ करने वाली सबसे युवा कवयित्री बन गईं. इस समारोह में जेनिफर लोपेज और लेडी गागा जैसी हस्तियों ने भी परफॉर्म किया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अमांडा गोरमैन की हुई. बराक ओबामा से लेकर हिलेरी क्लिंटन और अमेरिकी मीडिया के बड़े नामों ने अमांडा की तारीफ में पुल बांध दिए. इस आर्टिकल में हम ना केवल अमांडा की कविता पर नजर डालेंगे, बल्कि उनके जीवन पर भी.

बेहतर अमेरिका के सपने को पिरोती कविता

जो बाइडेन ने अमेरिकी चुनाव एक एजेंडे के तहत लड़ा. यह एजेंडा था- बुरी तरह से बंट चुके अमेरिका को एक करना, कोविड 19 से तबाह हो गई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और आम लोगों के सपनों को पंख देना. शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भी इसी एजेंडे को थीम बनाया गया. अमांडा गोरमैन की कविता भी इसी थीम के इर्द गिर्द घूमती रही.

उनकी कविता में एक तरफ ट्रंप द्वारा लाई गई बर्बादी का जिक्र था और दूसरी तरफ दर्द से कराह रहे देश के घावों पर मिलजुलकर मलहम लगाने की अपील भी. इस कविता का शीर्षक है- द हिल वी क्लाइंब.

अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले भाषण में श्वेत वर्चस्ववाद पर निशाना साधते हुए जो बाइडेन ने कहा, “हमें यह असभ्य युद्ध खत्म करना है.” वहीं गोरमैन ने अपनी कविता की पंक्ति पढ़ी, “हम अपनी बाहें फैलाते हैं, ताकि एक दूसरे को थाम सकें हम.”

जहां बाइडेन ने अमेरिकी आदर्शों को ‘प्रेम, महानता और भलाई की भावना’ जैसे शब्दों से परिभाषित किया. वहीं गोरमैन ने दर्द में ही साहस और दृढ़ निश्चय को खोज लिया. उन्होंने अपनी कविता की पंक्ति पढ़ी, “हम शोक मनाते हैं, फिर भी हम आगे बढ़ते हैं.”

उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद Kamala Harris और Joe Biden ने एक दूसरे को बधाई दी.

एक ऐसे समय में जब बहुत से देशों की तरह ही अमेरिका भी बुरी तरह से बंटा हुआ है, अमांडा अपनी कविता की शुरुआत में सवाल में पूछती हैं-

‘इस अंतहीन अंधेरे में हम कहां खोज सकते हैं आशा की किरण?’

कविता के अंत में खुद ही इसका जवाब भी देती हैं-

इस बर्बादी से मुक्त होने पर आएगी नई सुबह
यहां हमेशा मौजूद हैं आशा की किरणें
अगर देखने का साहस हो तो
अगर खुद हो पाने का साहस हो तो

अमांडा गोरमैन की कविता में अमेरिका के महान नेताओं लिंकन, मार्टिन लूथर किंग जूनियर के दृष्टिकोण का भी जिक्र था. कविता में खुद को शामिल करते हुए वे कहती हैं-

“एक ऐसा देश और समय, जहां गुलामों की वंशज एक पतली काली लड़की, जिसे केवल उसकी मां ने पाला पोसा, राष्ट्रपति बनने का ख्वाब देख सकती है. और आज वह एक राष्ट्रपति के लिए कविता पाठ कर रही है.”

पूरी कविता में गोरमैन अपनी इसी बात पर कायम रहती हैं. और जब वो कविता खत्म करती हैं तो लगता है कि उन्होंने उस शानदार लोकतंत्र का खाका खींचा है, जिसे केवल अमेरिका को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को पाना है. अपना संदेश देने के लिए उन्होंने विपिरीत चित्रों का प्रयोग किया है. मसलन, जिस छंद में उन्होंने लोकतंत्र का जिक्र किया, उसी में ट्रंप द्वारा उकसाई गई उस श्वेत वर्चस्ववादी भीड़ का भी जिक्र है, जिसने 6 जनवरी को कैपिटॉल हिल पर हमला किया था-

वह भीड़ जो इस देश को साझा करने की जगह बर्बाद कर देना चाहती है
यह हमारे देश को बर्बाद कर देगी यदि इसका मतलब लोकतंत्र को रोकना है
उनके मंसूबे लगभग हो गए थे कामयाब
जबकि लोकतंत्र को थोड़ी देर के लिए थामा जा सकता है
इसे हमेशा के लिए हराया नहीं जा सकता

अपनी कविता में गोरमैन पहले से बेहतर प्रयास करने और बेहतर समाज बनाने का आह्वान भी करती हैं. वे कहती हैं- आओ, हम एक ऐसा देश छोड़ जाएं, जैसा हमें मिला था उससे बेहतर.

कौन हैं Amanda Gorman?

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि गोरमैन एक युवा अमेरिकी कवयित्री हैं. उनका जन्म लॉस एंजेलस में हुआ. यहीं पर उनकी शुरुआती पढ़ाई हुई. हार्वर्ड से उन्होंने समाजशास्त्र की पढ़ाई की. 2017 में वे अमेरिका की सबसे पहली युवा कवि लॉरेट बनीं. अमांडा की मां एक टीचर हैं, और उन्होंने ही अमांडा की परवरिश की. उनके अलावा उनके परिवार में दो भाई-बहन और हैं.

व्हाइट हाउस में अपने कविता पाठ के दौरान Amanda Gorman.

अमांडा के जीवन का पहला टर्निंग प्वाइंट 2013 में आया. इस साल उन्होंने मलाला यूसुफजई का एक भाषण सुना. इससे प्रभावित होकर 16 साल की उम्र में वे संयुक्त राष्ट्र संघ की युवा डेलिगेट बन गईं.

अपने इस टर्निंग प्वाइंट के बारे में वे न्यूज एजेंसी एपी को बताती हैं-

“इसने मुझे वो परफॉर्मर बनाया जो मैं आज हूं और वो कहानीकार जो मैं होना चाहती हूं.”

2015 में अमांडा गोरमैन का पहला कविता संग्रह प्रकाशित हुआ. इसका नाम है- ‘द वन फॉर हूम फूड इज नॉट इनफ’… समाज में फैले अन्याय और गैरबराबरी ने उनके काम को बड़े स्तर पर प्रभावित किया. उनकी कविता ‘इन दिस प्लेस’ नस्लवाद और अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के शोषण को बयां करने वाली एक बेहतरीन रचना मानी जाती है. वे हिलेरी क्लिंटन, मलाला यूसुफज़ई और लिन मैनुएल मिरांडा जैसी बड़ी हस्तियों के लिए कविता पाठ कर चुकी हैं.

इस साल सितंबर में उनका एक और कविता संग्रह प्रकाशित होने जा रहा है. इसका शीर्षक भी- ‘द हिल वी क्लाइंब’ होगा. अमांडा गोरमैन खुद भी राष्ट्रपति बनना चाहती हैं. वो 2036 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ना चाहती हैं. अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन से उन्होंने कहा- मैडम प्रेसिडेंट कहा जाना मुझे बहुत अच्छा लगेगा.

 

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