ये कहानी एक पकवान की है. जिसे पकाने वाले भूखे छूट जाते थे. ग़ुलामों को उसे खानेकी इजाज़त नहीं थी. फिर एक दिन बग़ावत हो गई. बाग़ियों ने शासकों का बोरिया-बिस्तरबांध दिया. आज़ादी की बेड़ियां टूट चुुकीं थी. उन्होंने पहली बार मन से अपना बनायापकवान चखा. तब जाकर उन्हें उसका स्वाद पता चला. उस पकवान को नाम दिया गया, ‘द सूपऑफ़ फ़्रीडम’. यानी, आज़ादी का शोरबा. आज जानेंगे, इस शोरबे का इतिहास क्या है? येबनता कैसे है? और, आज के दिन हम इसकी चर्चा क्यों कर रहे हैं?