1977 में क्या कोई सोच सकता था कि इमरजेंसी का दंश झेल चुका देश इंदिरा गांधी कोदोबारा मौका देगा? उस दौर में क्या किसी काॅलेज गोइंग स्टूडेंट के घरवाले औरनाते-रिश्तेदार इंदिरा गांधी को दोबारा प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने के लिएतैयार होंगे, जिनके बच्चों ने लाठियां खाने से लेकर सलाखों के पीछे जाने तक कीज्यादतियों को सहा था? देखिए वीडियो.