एक देश में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले सैन्य तख़्तापलट की अफ़वाह उड़ती है. फिरखंडन भी आता है. मगर इतिहास कुछ ऐसा है कि खंडन पर भरोसा नहीं होता. फिलहाल, एक रेसचल रही है कि पहले चुनाव होंगे या सेना खेल कर देगी? ये कहानी नाइजीरिया की है.यहां 25 फ़रवरी को राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और संसद के सदस्यों के चुनाव के लिएवोटिंग है. नाइजीरिया, अफ़्रीकी महाद्वीप का सबसे अधिक आबादी वाला देश है. उसकाइतिहास महाद्वीप के बाकी देशों की तरह ही औपनिवेशिक लूट, सैन्य तख़्तापलट, सिविलवॉर आदि से प्रभावित रहा है. यहां लोकतंत्र कुछ बरस पहले ही लौटा है. हालांकि, येलोकतंत्र लगातार घायल चल रहा है. हाल के समय में बोको हराम, बेरोजगारी, कोविड-19 औरशासन की असहिष्णुता ने नाइजीरिया को पीछे की तरफ़ धकेलना जारी रखा है. ऐसे में इसचुनाव में बहुत कुछ दांव पर लगा है. आज दुनियादारी में इसी पर बात करेंगे. देखिएवीडियो.