एक ज़मीन का टुकड़ा है. गोवा से थोड़ा बड़ा. ये टुकड़ा जितना ख़ूबसूरत है, उससेकहीं ज़्यादा हिंसक भी. इसकी वजह से दो पड़ोसी देश बरसों से एक-दूसरे की जान केदुश्मन बने हुए हैं. मामला यहीं तक होता तो कोई बात थी. मगर गेम इससे कहीं अधिकबड़ा है. इसमें रूस भी है, तुर्किए भी है और कुछ पश्चिमी देश भी हैं. ये कहानीअज़रबैजान और आर्मीनिया के बीच फंसे नगोरनो-कराबाख़ की है. जहां पर एक बार फिर सेयुद्ध की तैयारी शुरू हो गई है. तीन बरस पहले हुए युद्ध में लगभग दस हज़ार लोग मारेगए थे. लेकिन मसला नहीं सुलझा.