पहलवान वापस लौट रहे, मेडल गंगा में नहीं बहाए, किसी ने उनसे ले लिए
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवान गंगा किनारे रोते दिखे.
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रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने अपने मेडल गंगा में नहीं बहाए. पहलवानों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में मिले मेडल को गंगा में बहाने का ऐलान किया था. सभी पहलवान जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद 30 मई की शाम हरिद्वार पहुंचे थे. मेडल बहाने से पहले 'हर की पौड़ी' में पहलवान रोते नजर आए. लेकिन किसान नेता नरेश टिकैत भी शाम को हरिद्वार पहुंचे और उन्होंने पहलवानों को मनाया. इसके बाद पहलवानों ने मेडल बहाने का फैसला वापस ले लिया.
भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के मनाने के बाद पहलवान हरिद्वार से वापस भी लौट रहे हैं. नरेश टिकैत ने पहलवानों के मेडल को अपने पास रख लिया और उनसे पांच दिन का समय मांगा है.
इससे पहले किसान नेता राकेश टिकैत ने पहलवानों से अपील की थी कि वे कोई गलत कदम ना उठाएं. राकेश टिकैत ने ट्वीट किया था,
ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स के मेडल“यह मेडल देश और तिरंगे की शान है हमारा सभी पहलवानों से अनुरोध है कि ऐसा कदम मत उठाओ. आपने अपने खेल से देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है. हमारा राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि मामले को संज्ञान में लेकर पहलवानों से जल्द बातचीत करें.”
ये वही मेडल हैं, जिस पर पूरे देश ने गर्व किया था. जिसे सामूहिक उपलब्धि माना जाता है. पहलवानों ने WFI अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उनके खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
प्रदर्शन कर रही पहलवानों में, साक्षी मलिक रियो ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडल विजेता हैं. इसके अलावा साक्षी कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल ला चुकी हैं. वहीं, विनेश फोगाट वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल ला चुकी हैं. इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में वो तीन बार गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. संगीता फोगाट, बजरंग पूनिया सहित कई और मेडल जीतने वाले पहलवान इस प्रदर्शन में शामिल हैं.
इससे पहले हरिद्वार गंगा सभा के अध्यक्ष ने मेडल विसर्जित करने का विरोध किया था. गंगा सभा हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा था कि यहां लोग पूजा पाठ करने आते हैं, ये कोई जंतर-मंतर नहीं है ना कोई राजनीति का अखाड़ा है.
पहलवानों ने दिन में एक बयान जारी कर कहा था कि हमारे गले में सजे इन मेडलों का कोई मतलब नहीं रह गया है. बयान में कहा गया था,
"हम इन मेडलों को गंगा में बहाने जा रहे हैं, क्योंकि वो गंगा मां हैं. जितना पवित्र हम गंगा को मानते हैं, उतनी ही पवित्रता से हमने मेहनत करके इन मेडलों को हासिल किया था. ये मेडल सारे देश के लिए ही पवित्र हैं और पवित्र मेडल को रखने की सही जगह पवित्र मां गंगा ही हो सकती हैं. हमें मुखौटा बनाया, हमारा फायदा उठाया. और फिर हमारा उत्पीड़न करने वाले के साथ हमारा तंत्र खड़ा गया, ऐसा तंत्र अपवित्र है."
28 मई को पहलवानों ने जंतर-मंतर से नए संसद भवन तक मार्च निकलने का ऐलान किया था. लेकिन, इसी दिन नई संसद का उद्घाटन होना था. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने मार्च की इजाजत नहीं दी. इसके बावजूद जब पहलवानों ने नए संसद भवन से तीन किलोमीटर दूर स्थित जंतर-मंतर से मार्च शुरू किया, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. जमकर धक्का-मुक्की हुई. इस दौरान पहलवानों को हिरासत में भी लिया गया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को पूरी तरह खाली करा दिया.
धरना देने वाले पहलवानों का आरोप है कि नेशनल कैंप्स में नियुक्त कुछ कोच सालों से महिला खिलाड़ियों का यौन उत्पीड़न कर रहे हैं. उनमें WFI अध्यक्ष बृजभूषण सिंह भी शामिल हैं. इससे पहले जनवरी में भी पहलवानों ने प्रदर्शन किया था. लेकिन सरकार के आश्वासन और कमिटी बनाने के बाद उन्होंने प्रदर्शन वापस ले लिया था.
वीडियो: पहलवानों की गिरफ़्तारी से नाराज़ महिला पहलवानों ने दिल्ली पुलिस को खूब सुना डाला

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