पैराडॉक्स यानी विरोधाभास. एक पैराडॉक्स है - शिप ऑफ़ थीसियस. इसमें इस बात परविमर्श होता है कि किसी चीज़ के हर उर्जे-पुर्जे को बदल कर उसकी जगह नया माल लगादिया जाए तो क्या वो कुल चीज़ वही रही या नयी कहलायेगी? थीसियस जिस जहाज में क्रीटसे वापस एथेंस आया था, उसे लोगों ने सैकड़ों सालों तक बचा के रखा. उसके फट्टे गलनेलगे तो नए फट्टे लगवा दिए. चप्पू सारे बदल दिए. पाल बदल दिया. रस्से नये लगा दिए.अब बहस ये होने लगी कि सब कुछ बदल देने के बाद वो जहाज थीसियस का जहाज रहा या नयाहो गया? इसी बहस पर लोग दो पार्ट्स में बंट गए. और ये बन गया पैराडॉक्स. भाजपा मेंशामिल हुए इतने सारे कांग्रेसी चेहरों को सोच शिप ऑफ़ थीसियस की याद आई. यूपीविधानसभा चुनाव होने को हैं. अब नेताओं का ये हाल है कि अटरिया पर कबूतर भी लोट जाएतो करेजा फटने लगता है. लगता है क्या उछिन्न हो जाएगा. कांग्रेस में तो होने भी लगाहै. कांग्रेस की लग चुकी है. और कांग्रेस को लग चुका है. झटका. नेता रीता बहुगुणाजोशी ने दिल्ली में फुल भौकाल में बीजेपी का पाला गुड़न्त लिया है. बिना अमित शाह केऐसा होता नहीं. कन्नूर में कार्यकर्ता भी बीजेपी में आए तो लड्डू खाने पहुंच जातेहैं. तो यहां भी अमित शाह ने अपनी मौजूदगी में रीता बहुगुणा को पार्टी ज्वाइन कराई.रीता बहुगुणा जोशी जबर कांग्रेसी मानी जाती हैं. ऐसे में कांग्रेस की चोक लगी हैअलग. जोशी को यूपी में हुए हाल-फिलहाल के घरपलट में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दीगई. कहते हैं इसलिए ही गुस्साई हैं. राहुल गांधी की किसान यात्रा में भी कहीं नजरआईं. शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री के लिए आगे किया गया है, उससे भी खिसिआई हैं. वोयूपी में कांग्रेस की पुरानी टाइप्स नेता मानी जाती हैं. ऐसे में शीला जी के आने सेउनका नाराज होना बनता है. वो विजय बहुगुणा की बहन हैं. हरीश रावत की सरकार कालंकाकांड उनने ही माने विजय ने किया था, तो वो वजह भी बताई जा रही है. लेकिन असलबात तो ये कि असली संकट यादव परिवार में खडा हुआ है, मान लो. जोशी का सपा से पुरानाकनेक्शन है. याद रहे कि शुरू-शुरू में समाजवादी पार्टी ने उनको इलाहाबाद मेयरउम्मीदवार नॉमिनेट किया था. वहां से वो पॉलिटिक्स में आईं. लेकिन चुनाव जीतने केबाद उनने समाजवादी पार्टी को ऐसे छोड़ा जैसे समाजवादी पार्टी ने समाजवाद को छोड़ दियाहै. वहां से वो कांग्रेस में चली गईं.आजकल यादव परिवार के साथ संकट तो ऐसे जुड़ गया है जैसे उत्तर के साथ प्रदेश लेकिनअबकी बार वजह बनी हैं, रीता. मुलायम सिंह यादव की दूसरी बीवी हैं साधना गुप्ता.उनका बेटा है प्रतीक यादव. प्रतीक की पत्नी हैं अपर्णा. जिन्हें सपा लखनऊ कैंट सेउम्मीदवार बनाने वाली है. रीता यहीं से सिटिंग विधायक हैं कांग्रेस से. रीता 2014में लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं. लेकिन हुआ क्या कि हार गईं. फिलहाल वे लखनऊ कैंटसे विधायक हैं. बीजेपी में आईं तो वहां उनकी पकड़ मजबूत हो जाएगी. प्रतीक की पत्नीचुनाव हार जाएंगी. यही साधना के संकट की वजह है.यादव परिवार की अपनी पॉलिटिक्स जो है सो छोटी बहू अपर्णा यादव अलग ही ट्रांस मेंरहती हैं. एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में पहुंच कर गईं, हल्लामच गया था. एक बार उनने कहा था. लोगों का भरोसा मोदी पर बहुत ज्यादा बढ़ा है.जबमोदी जी ने झाड़ू उठाई, तो पूरे देश में अभियान छिड़ गया. उस पर भी लोग बोले यादवपरिवार की होकर मोदी जी का सपोर्ट कर रही हैं. गलत तो कुछ था नहीं पर पॉलिटिक्स मेंऐसे विरोधियों की तारीफ नहीं की जाती सो यू न. तो अब ये है कि जोशी के बीजेपी मेंआने से उनकी सीट पर संकट होगा. और मुलायम जी की दूसरी वाइफ को ये पसंद नहीं आएगा.