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कंपनियां छंटनी क्यों कर रही हैं, पूरी कहानी जान लीजिए

नौकरियां जाने का सिलसिला भारत से लेकर दुनिया के तमाम देशों में चल रहा है.

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20 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 20 जनवरी 2023, 08:26 PM IST)
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सांकेतिक फोटो (साभार: आजतक)
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हमारी आपकी तरह ही भारत और दुनियाभर के करीब डेढ़ लाख लोग भी अपनी जॉब कर रहे थे. इनमें से हजारों उन कंपनियों के एंप्लॉई थे जिनमें नौकरी लगने का मतलब लाइफ सेट होना माना जाता है. सब कुछ स्मूथ चल रहा था. लेकिन पिछले कुछ महीनों में दुनियाभर की कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू किया और डेढ़ लाख से ज्यादा कर्मचारियों के हाथ से नौकरी निकल गई.

अखबारों का इकॉनमी वाला पेज हो या न्यूज़ वेबसाइट्स का बिजनेस वाला कोना इनमें पिछले कुछ महीनों से एक तरह की खबर लगातार दिखाई दे रही है. जिनकी हेडलाइन में 'छंटनी' या 'LAY OFF' शब्द कॉमन है. इनमें ख़बर लगभग एक सी होती है कि फलां कंपनी ने अपने इतने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया या निकालने वाली है. नौकरियां जाने का सिलसिला भारत से लेकर दुनिया के तमाम देशों में चल रहा है. आर्थिक मंदी की आशंका के बीच पिछले साल शुरू हुआ छंटनी का दौर अभी भी जारी है. हम आप ये जानते हैं कि जब कोई कर्मचारी अपनी कंपनी से रिज़ाइन करता है तो कंपनी और कर्मचारी के बीच एक आपसी समझ होती है. आपसी सहमती से कर्मचारी, कंपनी से अलग होता है. लेकिन जब किसी कर्मचारी को निकाला जाता है तो ये एकतरफा फैसला होता है. कंपनियां लगातार ये फैसला कर क्यों रही हैं? जो कंपनियां ताबड़तोड़ भर्ती करती हैं वो उसी रफ्तार से कर्मचारियों की छंटनी क्यों कर रही हैं? अगला नंबर किसका हो सकता है? क्या दुनिया की अर्थव्यवस्था मंदी के कगार पर पहुंच चुकी है? इन सब मुद्दों पर बात करेंगे.

इंटरनेट से ज़रा सा भी साबका रखने वाले गूगल का नाम तो जानते हीं होगे. कई महीनों से बातें चल रही थीं कि गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी चल रही है. आज यानी 20 जनवरी को गूगल की ओर से ये साफ कर दिया गया कि अल्फाबेट से 12 हजार कर्मचारियों को निकाला जाएगा. ये छंटनी ग्लोबल लेवल यानी विश्व स्तर पर की जाएगी. गूगल से 12 हजार लोगों की नौकरी जाने का मतलब समझ रहे हैं? ये आंकड़ा कंपनी के ग्लोबल वर्कफोर्स का 6 फीसदी से भी ज्यादा है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जनवरी को CEO सुंदर पिचई ने अपने कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा. जिसमें उन्होंने ये बताया कि वर्कफोर्स में ये कटौती दुनिया भर में और कंपनी के अलग-अलग ब्रांच में होगी. पिचई ने मेल में यह भी कहा कि इस फैसले की पूरी जिम्मेदारी वो खुद ले रहे हैं. पिचई ने मेल में ये भी बताया कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट (AI) पर फोकस करने वाली है. और ये कंपनी के लिए एक "महत्वपूर्ण मौका" है.

ये बात तो हुई गूगल की इससे पहले यानी 18 जनवरी को दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने अपनी कंपनी से 18 हजार लोगों को निकालने का प्रोसेस शुरू कर दिया. दर्शकों की जानकारी के लिए बता दें कि दुनियाभर से एमेजॉन के जिन 18 हजार कर्मचारियों को निकाला जाएगा उनमें से एक हजार कर्मचारी भारत के बताए जा रहे हैं.

18 जनवरी के ही दिन दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने एलान किया कि वो अपने 5 फीसदी यानी 10 हजार कंपनियों को नौकरी से निकालने वाला है. कंपनी के मुताबिक ये छंटनी मानव संसाधन और इंजीनियरिंग विभागों में होगी. माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला की इस लेऑफ की घोषणा एक लेटर के जरिए किया था. जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी को अपना काम बेहतर करने की ज़रूरत है. उन्होंने ये भी बताया था कि ये छटनी एक बार में नहीं की जाएगी. जब भी किसी को टर्मिनेट किया जाएगा, उसे दो महीने पहले नोटिस दिया जाएगा.

फेसबुक की पैरेंट कंपनी Meta ने भी पिछले साल नवंबर के महीने में कॉस्ट कटिंग के नाम पर छंटनी की ऐसी तलवार चलाई, कि 11 हजार कर्मचारी एक झटके में पूर्व कर्मचारी बन गए. 18 साल में ये पहली बार था जब कंपनी ने इतने बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था. इस छंटनी के पहले के आंकड़ों को देखें तो कंपनी में करीब 87 हजार कर्मचारी काम कर रहे थे, जिनमें से लगभग 13 फीसदी एंप्लाई की छंटनी कर दी गई.  

लेऑफ के इस क्रम में ट्विटर का नाम कैसे भूला जा सकता है. ट्विटर की कमान एलन मस्क के हाथों में आने के बाद से कंपनी में बड़े लेवल पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया. इसमें बड़े पैमाने पर छंटनी की तलवार चलाई गई. ट्विटर हेडक्वार्टर में मस्क की एंट्री होते ही एक झटके में कंपनी के करीब 50 फीसदी एंप्लाई निकाल दिए गए. इसके बाद कंपनी में काम करने वाले लोगों का आंकड़ा 7,500 से घटकर 3,500 रह गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अब फिर से एलन मस्क फिर से कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का प्लान बना रहे हैं.

ये कुछ बड़ी कंपनियों के नाम हैं जिनके बारे में हम आप सुनते आ रहे हैं. आज इस लिस्ट में भारत की एक कंपनी का भी नाम जुड़ गया... किसका... ऑऩलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का. कंपनी ने आज एलान किया कि वो अपने 380 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है. स्विगी ने इस छंटनी की वजह धीमी ग्रोथ को बताया है.

सॉफ्टवेयर, सोशल मीडिया और कई टेक कंपनियों में छंटनी के इस सिलसिले की शुरुआत पिछले साल से ही हो गई थी. मेटा, ट्विटर और एमेजॉन जैसी दिग्गज कंपनियों ने पिछले साल से ही छंटनी शुरू कर दी थी. कंपनियों में छंटनी का रिकॉर्ड रखने वाली वेबसाइट layoffs.fyi के मुताबिक, बीते साल 2022 में 1 हजार से अधिक कंपनियों ने 1,52,000 कर्मियों को नौकरी से निकाला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक कंपनियों में सबसे बड़ी छंटनी नवंबर में दर्ज की गई थी. लगभग 53,000 कर्मियों को नौकरी से निकाला गया था.

अब आते हैं दुनियाभर में हो रही इन छंटनियों के वजह पर . कई एक्सपर्ट का कहना है कि इसे कोरोना की वजह से लॉकडाउन के दौरान टेक कंपनियों में हुई जबरदस्त हायरिंग हुई लेकिन जब वापस सब ठीक हुआ तो IT और टेक सेक्टर में आया बूम बरकरार नहीं रहा.  Salesforce के CEO मार्क बेनिओफ ने भी 5 जनवरी को कंपनी के 8 हजार कर्मियों को निकालने के ऐलान पर कहा था. उन्होंने कहा था कि कोविड महामारी के दौरान लाखों अमेरिकी घर से काम कर रहे थे. इससे कंपनी की तकनीक की मांग बढ़ रही थी, लेकिन अब उस मांग में कमी आ रही है. छंटनी के पीछे ये तो तर्क दिए जा रहे हैं वो वाकई कितने सही ये जानने के लिए हमने फाइनेंस एक्सपर्ट से बात की. उन्होंने कहा, 

“छंटनी दुनिया में दो तरह की कंपनियों में चल रही हैं. पहली है टेक्नोलॉजी और दूसरी और दूसरी है स्टार्टअप्स. अगर मैं कंपनी का नाम बायजूस, फेसबुक, मेटा, ट्विटर, ट्विटर, अनएकेडमी. यह पूरी कंपनी या तो टेक्नोलॉजी है या स्टार्टअप है. इन दोनों कंपनियों का क्या हुआ? लॉकडाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम रहा. सभी घर से काम कर रहा थे. लेकिन जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ तो इन कंपनियों का बूम खत्म हो गया इसलिए इन सभी कंपनियों में  छंटनी शुरू हो गई.”

दुनिया में आर्थिक मंदी की आशंका भी नौकरियां जाने की बड़ी वजह के तौर पर सामने आ रही हैं. एक ओर तो कंपनियाँ लोगों को नौकरी से निकाल रही हैं दूसरी ओर नई भर्ती भी नहीं कर रही हैं. भारत में भी आईटी और एडटेक कंपनियां भी अब अपनी लागत में कटौती करने में जुट गई हैं. ग्लोबल मंदी की वजह से वैश्विक स्तर पर अमेजन, गूगल, ट्विटर, एप्पल जैसी कंपनियों ने पहले ही छंटनी का ऐलान किया है. इसका असर भारत के आईटी सेक्टर में भी देखने को मिल रहा है. आईटी कंपनियों की स्टॉक की गिरती कीमतों और विज्ञापन से होने वाली आय ने इस संकट को और बढ़ा दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या भारत के IT Sector में भी मंदी गहराने वाली है. दरअसल, अमेरिका और यूरोप में मंदी के चलते वहां कंपनियों ने अपना आईटी बजट घटाया है. इससे आईटी सर्विसेज कंपनियों के कर्मचारी के बोनस फ्रीज करने या न देने की खबरें आई हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल भारतीय IT कंपनियों ने नई नौकरियों के 10 फीसदी कम विज्ञापन निकाले हैं. क्या दुनिया की अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी की कगार पर पहुंच चुकी है भारत की कंपनियों और स्टार्टअप पर इसका क्या असर पड़ सकता है? उन्होंने कहा, 

“2023 आर्थिक दृष्टि से बहुत कठिन साल रहने वाला है. यूरोप में मंदी आ चुकी है इसको देखते हुए लग रहा है भारत में भी मंदी आएगी.”
 

सबसे बड़ा सवाल ये सामने आ रहा है कि दुनियाभर में हो रही छंटनी का असर क्या भारत की कंपनियों पर भी पड़ने वाला है. जिस तरह से  विदेशी कंपनियों में छंटनी का दौर चल रहा है क्या भारत की कंपनियां भी ऐसा कुछ करने वाली हैं? उन्होंने कहा, 

“आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक ने भारत को एक चमकता सितारा बताया है. भारत भी एक ग्लोबल विलेज का हिस्सा है. सभी अर्थशास्त्र एक दूसरे से जुडी है. इसलिए जो विश्व में होगा उसका भारत मैं भी असर पड़ेगा.”
 

जिन लोगों को कंपनी की ओर से पिंकस्लिप मिल जाती है... मतलब जिन्हें नौकरी से निकाले जाने वाला मेल आ जाता है उसकी टीस वही लोग समझ सकते हैं. इस हालत में क्या करना चाहिए? मतलब अगली नौकरी की तऱफ जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए. ये बात भी हमने एक्सपर्ट से समझने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि अगर आपकी नौकरी जाने वाली है या जा चुकी है तो मेरी सलाह है आपको पहले दूसरी नौकरी पकड़ लेनी चाहिए. आप बड़ी कंपनी के चक्कर में ना पड़े. दूसरी बात ऐसी हालात में आपको जल्दी जल्दी नौकरीयां बदल लेनी चाहिए. तीसरी बात अगर नौकरी जा चुकी है तो अपना स्टार्टअप खोलने की कोशिश करें. 

वीडियो: लाखों नौकरियां जा रहीं, पर ये करियर कुशनिंग क्या है जिससे नौकरी नहीं जाएगी

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