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कौन हैं नील कात्याल? जिनके सामने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप की हर दलील फेल हो गई

Neal Katyal ने कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ दलील देते हुए Donald Trump के 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करके लगाए गए टैरिफ को 'अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक टैरिफ' बताया.

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Neal Katyal, America Supreme Court, Donald Trump
नील कात्याल (बाएं) ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में डॉनल्ड ट्रंप (दाएं) के टैरिफ के खिलाफ दलील दी. (ITG)
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प्रगति पांडे
21 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 21 फ़रवरी 2026, 02:48 PM IST)
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अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत अन्य देशों पर लगाए गए टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कात्याल दलील दे रहे थे. कात्याल ने कोर्ट को बताया की ट्रंप सरकार जिस 1977 के अधिनियम के तहत देशों पर टैरिफ लगा रहे हैं, वो राष्ट्रपति को ऐसा करने की अनुमति नहीं देता है.

नील कात्याल ने कोर्ट में टैरिफ के खिलाफ दलील देते हुए ट्रंप के 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का इस्तेमाल करके लगाए गए टैरिफ को 'अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक टैरिफ' बताया. टैरिफ के केस पर 9 जजों की बेंच सुनवाई कर रही थी. जिसमें 6 जजों के बहुमत के आधार पर ट्रंप के टैरिफ को 'अवैध' बताया गया. जबकि, 3 जजों ने ट्रंप के टैरिफ को ‘सही’ ठहराया.

अब जानते हैं कि नील कात्याल कौन है? जिन्होंने ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ केस लड़ रहे थे. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, नील कात्याल का जन्म अमेरिका के शिकागो में एक भारतीय अप्रवासी दंपति के घर हुआ था. उनके माता-पिता पेशे से डॉक्टर और इंजीनियर थे.

कात्याल डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएट हैं. ग्रेजुएशन के बाद वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क का काम करने लगे. साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के पद पर नियुक्त किया.

कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रहते हुए कात्यान ने सुप्रीम कोर्ट और अपीलीय कोर्ट में सरकार का प्रतिनिधित्व किया. साथ ही सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने लगभग 50 से ज्यादा मामलों की पैरवी की, जो अमेरिका में अल्पसंख्यक वकीलों के बीच एक रिकॉर्ड है.

कात्याल वर्तमान समय में मिलबैंक एलएलपी और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में पॉल सॉन्डर्स प्रोफेसर के पार्टनर के तौर पर भी काम कर रहे हैं. वे संवैधानिक और मुश्किल अपीलीय केसों की पैरवी करने में महारत रखते हैं.

उनके प्रमुख केसों के बारे में बात करें तो, उन्होंने 1965 के मतदान अधिकार अधिनियम की संवैधानिकता का बचाव करने, ट्रंप के 2017 के ट्रैवल बैन को चुनौती देने और प्रमुख पर्यावरणीय और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में बहुमत के साथ जीत हासिल की है.

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कात्यान को 'एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार' मिला है, जो अमेरिका के न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. द अमेरिकन लॉयर की ओर से उन्हें साल 2017 और 2023 में बेस्ट लॉयर का भी खिताब मिल चुका है.

फोर्ब्स ने उन्हें साल 2024 और 2025 के लिए अमेरिका के 200 बड़े वकीलों की लिस्ट में भी शामिल किया है. कात्यान ने ट्रंप पर एक किताब भी लिखी है. इस किताब का नाम 'इम्पीच: द केस अगेंस्ट डॉनल्ड ट्रंप' है.

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