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गुजरात चुनाव में AAP के सीएम कैंडिडेट इशुदान गढ़वी के बारे में सबकुछ जानिए सिर्फ एक क्लिक में

अच्छा खासा पत्रकारिता करियर छोड़ कर राजनीति में आए.

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4 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 4 नवंबर 2022, 11:21 PM IST)
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ईशुदान गढ़वी. (तस्वीर उनके ट्विटर अकाउंट से साभार है.)
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गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Election 2022) के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. नाम वही है जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा थी – ईशुदान गढ़वी. AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब से कुछ ही देर पहले ये घोषणा की है. 

आम आदमी पार्टी (Aam aadmi party) की ओर से मुख्यमंत्री पद की रेस में कई नाम थे. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक पाटीदार नेता गोपाल इटालिया, अल्पेश कथारिया, इंद्रनील राजगुरु, मनोज सुरथिया सीएम पद के बड़े दावेदारों में थे. लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा ईशुदान गढ़वी की हो रही थी. अटकलें लगाई जा रही थीं कि उनका सीएम उम्मीदवार बनना लगभग तय है.

कौन हैं ईशुदान गढ़वी?

ईशुदान गढ़वी का जन्म 10 जनवरी, 1982 को गुजरात (gujarat) के देवभूमि द्वारका जिले के पिपालिया गांव में हुआ. पारिवारिक बैकग्राउंड के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके पिता किसान हैं. गढ़वी ने अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएशन किया है.

राजनीति में आने से पहले ईशुदान गढ़वी पत्रकार थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन से की. वहां 2007 से 2011 तक रहे. बाद में ईटीवी गुजराती में आए. पोरबंदर में रहते हुए उन्होंने किसानों की समस्याओं पर कई न्यूज स्टोरी कीं. लेकिन टर्निंग पॉइंट तब आया जब 2015 में उन्होंने डांग और कापरड़ा में पेड़ों की अवैध कटाई के पीछे के घोटालों को उजागर किया. इस खबर के जरिए उन्होंने गुजरात सरकार को ऐक्शन लेने पर मजबूर कर दिया था. इसके बाद गढ़वी की पहचान 'निडर पत्रकार' की बन गई थी. 2015 में ही ईशुदान वीटीवी गुजराती में चले गए. अगले कई सालों तक वो वहां 'महामंथन' नाम का न्यूज शो होस्ट करते रहे.

15 साल पत्रकारिता करने के बाद ईशुदान गढ़वी का इस पेशे से मन ऊब गया. अब उन्हें राजनीति करनी थी. पार्टी चुनी अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी. वो पत्रकारिता में एक अच्छा-खासा सफल करियर छोड़कर राजनीति में आए. जून 2021 में AAP में शामिल होते वक्त ईशुदान ने कहा था,

"मैं लोगों की सेवा के लिए मीडिया में आया था और लोगों ने मुझे पसंद किया. लेकिन मुझे लगा कि मीडिया में रहकर मैं कुछ लोगों की सेवा कर सकता हूं. इसलिए मैंने ये इंडस्ट्री छोड़ दी और राजनीति में आ गया ताकि ज्यादा लोगों के लिए काम कर सकूं."

गुजरात में AAP के चुनाव प्रभारी गुलाब सिंह यादव ने दावा किया था कि गढ़वी के आने के बाद राज्य के लाखों लोगों ने पार्टी जॉइन करने की इच्छा जताई थी. इसके तुरंत बाद ही अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया था कि AAP गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ेगी.

इसी साल जून महीने में AAP ने गुजरात इकाई को भंग कर इसमें ढांचागत बदलाव करते हुए नए लोगों को शामिल किया था. तब ईशुदान को AAP का राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव बनाया गया था. बाद में पार्टी ने “जन संवेदना यात्रा” शुरू की जिसका जूनागढ़ में नेतृत्व गढ़वी ने ही किया था. उसी दौरान उनके काफिले पर हमला हुआ था. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक AAP ने इसके पीछे बीजेपी के लोगों का हाथ बताया था.

कोरोना संकट से मोरबी हादसे तक

चुनावी अभियान के दौरान ईशुदान गढ़वी ने गुजरात की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार की काफी तीखी आलोचना की थी. उन्होंने कोरोना संकट से निपटने में हुई कमज़ोरियों के हवाले से गुजरात के स्वास्थ्यगत ढांचे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी दो दशकों से भी ज्यादा समय सत्ता में है, लेकिन कोरोना संकट के दौरान गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन तक नहीं मिली, जरूरी दवाइयों, हॉस्पिटल बेड की कमी रही. गढ़वी ने आरोप लगाया कि महामारी में गुजरात सरकार की नीतियों की वजह से लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया जिसके चलते "लाखों" लोगों की मौत हुई.

सितंबर 2021 में सूरत स्थित चर्चित रामदेव पीर मंदिर को तोड़ दिया गया था. गढ़वी ने इस मुद्दे को उठाया और गुजरात सरकार से मांग की कि वो लोगों से माफी मांगे. वहीं दिसंबर 2021 में कथित तौर पर पेपर लीक होने के मामले में ईशुदान गढ़वी ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ गांधीनगर स्थित बीजेपी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था. उसके बाद पुलिस ने गढ़वी सहित पार्टी के कई लोगों को गिरफ्तार किया था. 

किसानों के मुद्दे पर भी गढ़वी लगातार गुजरात सरकार से जवाब तलब करते रहे. एमएसपी, यूरिया की कालाबाजारी और कृषि कानूनों को लेकर उन्होंने कई बार राज्य और केंद्र सरकार पर हमला बोला. कृषि कानून वापस लिए जाने के केंद्र के फैसले पर गढ़वी ने कहा था कि सत्तारूढ़ दल ने चुनाव के डर से ऐसा किया था. इन दिनों वो मोरबी में केबल ब्रिज गिरने की घटना को लेकर भी बीजेपी पर हमलावर हैं.

AAP के फेवरेट क्यों?

मई 2022 में आम आदमी पार्टी ने गुजरात में परिवर्तन यात्रा शुरू की. पूर्व विधायक इंद्रनील राजगुरु के साथ ईशुदान गढ़वी ने द्वारका से इस यात्रा का शुरुआती दौर में नेतृत्व किया था. उन्होंने कहा था कि इस यात्रा के जरिये वो महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लाखों लोगों से विचार-विमर्श कर उनकी राय लेंगे.

इस चुनावी सक्रियता के अलावा ईशुदान गढ़वी की साफ छवि मुख्यमंत्री पद की रेस में उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है. वो राजनीतिक रूप से ज्यादा अनुभवी नहीं हैं, लेकिन लोकप्रिय माने जाते हैं और किसी भी तरह के विवाद में उनका नाम सामने नहीं आया है. इसलिए एक और राज्य में मजबूत सियासी बुनियाद डालने की कोशिश में लगी AAP के लिए ईशुदान गढ़वी एक आइडियल कैंडिडेट हैं.

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