कौन है इरफान सुल्तानी? जिन्हें चौराहे पर फांसी देगा ईरान, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
ईरान सरकार ने बुधवार (14 जनवरी) को 26 साल के इरफान सुल्तानी को फांसी देने का फैसला किया है, जिसे बीते हफ्ते ही हिरासत में लिया गया था.

ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं (Iran Protest News). अब तक कम से कम 2 हजार लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. इस बीच, ईरान सरकार ने बुधवार (14 जनवरी) को 26 साल के इरफान सुल्तानी (Erfan Soltani) को फांसी देने का फैसला किया है, जिन्हें बीते हफ्ते ही हिरासत में लिया गया था. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान, प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है तो वे ‘बहुत कड़ी कार्रवाई’ करेंगे.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए इरफान सुल्तानी (26) के परिवार को कई दिनों तक पता नहीं था कि वे कहां हैं. कुछ दिनों बाद, अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार की तरफ से एक मैसेज आया.
यह न तो आरोपों के बारे में था, न ही अदालत की तारीख के बारे में. बल्कि यह मैसेज यह बताने के लिए भेजा गया था कि सुल्तानी को मौत की सजा सुनाई गई है. परिवार को बताया गया कि वे उनसे एक बार मिल सकते हैं. वो भी सिर्फ 10 मिनट के लिए. अलविदा कहने के लिए.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 जनवरी को गिरफ्तार किए गए सुल्तानी को बुधवार (14 जनवरी) को फांसी दी जानी है. सुल्तानी पर ‘मोहारेब’ यानी ‘ईश्वर के दुश्मन’ होने का आरोप लगा है. ईरान के कानून के आर्टिकल 190 के तहत ‘मोहारेब’ की सज़ा बहुत सख्त है. इसमें मौत की सज़ा, फांसी, दाहिना हाथ और बायां पैर काटना या फिर हमेशा के लिए आंतरिक निर्वासन (देश के अंदर ही किसी दूर इलाके में भेज देना) शामिल है.
मानवाधिकार समूह लंबे समय से ईरानी अधिकारियों पर इस कानून को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं. इरफान सुल्तानी हाल ही में शुरू हुए इन विरोध प्रदर्शनों से जुड़े पहले ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा. उनका परिवार दुखी और डरा हुआ है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने किसी से बात करने की कोशिश की तो उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
कौन हैं इरफान सुल्तानी?ईरानवायर की रिपोर्ट के मुताबिक, इरफान कपड़ा इंडस्ट्री में काम करते थे और हाल ही में उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरू की थी. उनके दोस्त और परिवार के सदस्य बताते हैं कि सुल्तानी को फैशन में गहरी रुचि है. एक मानवाधिकार संगठन ने कहा कि उनका एकमात्र अपराध 'आजादी के लिए नारा लगाना' है.
सुल्तानी के इंस्टाग्राम अकाउंट से पता चलता है कि वे बॉडीबिल्डिंग और खेलकूद के शौकीन हैं और अब तक एक शांत और साधारण जिंदगी जीते आए हैं. सूत्रों ने ईरानवायर को बताया कि सुल्तानी को उनकी गिरफ्तारी से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों से धमकी भरे मैसेज मिल रहे थे. सूत्र ने बताया,
उसने अपने परिवार को बताया कि उस पर नज़र रखी जा रही है, लेकिन उसने पीछे हटने से इनकार कर दिया.

ईरानी-अमेरिकी पत्रकार-लेखिका मसीह अलीनेजाद ने कहा कि सुल्तानी की फांसी से पता चलता है कि ‘इस्लामिक गणराज्य असहमति को कैसे कुचलता है’. X पर उन्होंने लिखा,
इंटरनेट बंद करो. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों को मार डालो. समाज को डराकर चुप कराने के लिए तेजी से फांसी की सजाएं शुरू करो…ईरान के लोगों को मदद की जरूरत है. शासन उन्हें हर संभव तरीके से मार रहा है. 21वीं सदी में, मानवता के खिलाफ अपराध अभी हो रहे हैं.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे अधिक लोगों को फांसी देने वाले देशों में से एक है.
ये भी पढ़ें: 'मौत की सजा... ', ईरान ने प्रदर्शनकारियों को ईश्वर का दुश्मन बताया, डराने वाला फरमान निकाला
ट्रंप ने दी चेतावनीअमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया है. ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा,
ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो. अपनी संस्थाओं पर कब्ज़ा करो!!! मदद आ रही है.
वहीं, CBS को दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा,
हम नहीं चाहते कि ईरान में जो हो रहा है, वह हमारे यहां भी हो… जब वे हजारों लोगों को मारना शुरू कर दें. और अब आप मुझे फांसी की बात बता रहे हैं. देखते हैं इसका क्या नतीजा निकलता है. यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा.
इसके अलावा ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी है.
खामेनेई शासन की क्रूर कार्रवाई में कम से कम 2,000 लोगों के मारे जाने और लगभग 20,000 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है. इंटरनेट पांच दिनों से ज्यादा समय से बंद हैं और ईरान के भीतर से सामूहिक हत्याओं की खबरें आ रही हैं.
वीडियो: ईरान में ख़ामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, सरकार ने किसको सुनाई मौत की सज़ा?

.webp?width=60)

