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अमृतपाल सिंह की पूरी कुंडली, जो थाने पहुंचा तो हथियारबंद भीड़ ने थाना घेर लिया

अमृतपाल के समर्थकों ने पंजाब के अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया.

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23 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 23 फ़रवरी 2023, 07:32 PM IST)
amritpal singh pawan khera
सांकेतिक फोटो (साभार: आजतक)
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आज बात दो गिरफ्तारियों की. एक गिरफ्तारी हुई दिल्ली में. जिसमें एक पार्टी के नेता को हवाई जहाज से उतार कर गिरफ्तार कर लिया गया. और इस पर दिन भर खूब हंगामा हुआ. दिन भर खूब हंगामा अमृतसर में भी हुआ जहां एक देशद्रोह, हिंसा की साजिश के आरोपी को बचाने के लिए हथियारबंद भीड़ ने थाने पर धावा बोल दिया. आरोपी पुलिस को धमकी देता है कि FIR वापस लो नहीं तो जो होगा उसकी जिम्मेदारी मैं नहीं ले सकता और पुलिस उसे जाने देती है.

कहते हैं कि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता. इस हुजूम में भी किसी की शक्ल साफ नज़र नहीं आ रही. लेकिन हाथों में लहरती तलवारें और उन्माद स्पष्ट दिखाई दे रहा है. ये जमावड़ा किसके समर्थन में अराजकता फैला रहा है? उस शख्स के लिए जो रह-रहकर खालिस्तान की मांग करता है, जो  पंजाब के उग्रवादी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले को प्रेरणा मानता है और उसके दिखाए रास्ते पर चलने की कसमें खाता है, जो नौजवान सिखों से कहता है कि उन्हें अपनी आजादी के लिए लड़ना होगा. उसका नाम है अमृतपाल सिंह.

आज 22 फरवरी को इसी अमृतपाल के समर्थकों ने पंजाब के अमृतसर के अजनाला पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया. दुस्साहस की हदें तोड़ते हुए अमृतपाल के अनुयायियों ने पुलिस की लगाई बैरिकेडिंग तोड़ी और कई पुलिसकर्मियों को भी लहूलूहान कर दिया. वजह जानने के लिए इस मामले की टाइमलाइन समझ लेते हैं.

आज तक के अमित शर्मा के मुताबिक वीरेंदर सिंह नाम के एक शख्स ने अमृतपाल और उसके कुछ साथियों के खिलाफ 16 फरवरी को मारपीट करने का मामला दर्ज कराया था. इसी मामले में छापेमारी कर 18 फरवरी को पुलिस ने गुरदासपुर से अमृतपाल के एक साथी तूफान सिंह उर्फ लवप्रीत को गिरफ्तार कर लिया. इस गिरफ्तारी से बौखलाए अमृतपाल ने प्रशासन को खुलेआम धमकी देनी शुरू की. उसने पुलिस के खिलाफ झूठा मामला दर्ज करने के आरोप लगाए और पुलिस को अल्टीमेटम दिया कि अगर उसके साथी को ना छोड़ा गया तो वो अपने अनुयायियों के साथ थाने का घेराव करेगा. इस धमकी के साथ उसने आज यानी 22 फरवरी की तारीख़ भी नत्थी की थी. कहा तो ये भी जा रहा है  उसने गृहमंत्री अमित शाह को भी धमकाया था. ये वो जानकारियां हैं जो हर जगह बताई सुनी जा रही है. 

एक बात यहां गौर करने वाली है वो ये कि FIR में अमृतपाल सिंह का भी नाम है बावजूद इसके पुलिस उसे गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाई. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक अमृतसर के पुलिस कमिश्नर ने बताया,

‘प्रदर्शनकारियों से बात हो गई है और अब ये लोग शांतिपूर्वक यहां से चले जाएंगे.उन्होंने ने हमें पर्याप्त सबूत दिए हैं कि अभियुक्त लवप्रीत तूफ़ान बेगुनाह हैं. एसआईटी ने इसका संज्ञान लिया है. अब ये लोग शांति से यहां से चले जाएंगे और क़ानून अपना काम करेगा.’

पुलिस कमिश्नर का ये बयान एक सवाल छोड़ गया वो ये कि अमृतपाल थाने में बैठकर खुद और अपने साथियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR को रद्द करने की मांग करता रहा लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया. इसकी क्या वजह है? अमृतपाल का क्या इतना खौफ़ है कि उसके साथी पुलिसवालों को मारते पीटते हैं. थाने में हमला करते हैं और पुलिस कुछ कर नहीं पाती. 

पंजाब में अमृतपाल का नाम  पिछले कुछ वक्त में धूमकेतू की तरह उभरा है. करीब 29 साल के अमृतपाल ने पिछले साल एक संगठन की बागडोर संभाली. इस संगठन का नाम है  ‘वारिस पंजाब दे’. और इसकी कहानी जाकर जुड़ती है दीप सिद्धू से. अभिनेता और एक्टिविस्ट संदीप सिंह उर्फ़ दीप सिद्धू जो 26 जनवरी 2021 को लालक़िले पर खालसा पंथ का झंडा फहराने को लेकर ख़बरों में आया था. दर्शकों को याद होगा कि 15 फ़रवरी 2022 को एक सड़क हादसे में दीप सिद्धू की मौत हो गई थी. अपनी मौत से छह महीने पहले यानी सितंबर 2021 में सिद्धू ने ‘वारिस पंजाब दे’ की नींव रखी थी. ये वो समय था जब पंजाब में विधानसभा चुनाव चल रहे थे.

दिल्ली में हुए किसान मार्च के दौरान लालकिले पर सिख पंथ का झंडा फहराने के लिए सिद्धू की बहुत आलोचना हुई थी और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था. दिल्ली के बाहर डेरा डाले किसान संगठनों ने इस घटना के बाद से ही सिद्धू से दूरी बनानी शुरू कर दी. शायद यही कारण था कि दीप सिद्धू को एक नया संगठन बनाने की ज़रूरत पड़ी. इस सबसे पहले दीप सिद्घू भारतीय जनता पार्टी के सांसद और फ़िल्मी एक्टर सनी देओल के सहयोगी भी रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीरें पहले ही वायरल हो चुकी थीं.

वारिस पंजाब दे’ की नींव रखते हुए दीप सिद्धू ने ऐलान किया था कि ये संगठन पंजाब के युवाओं को एकजुट करेगा. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक दीप सिद्धू ने तब इस संगठन को एक प्रेशर ग्रुप बताया था और कहा था कि ये पंजाब के अधिकार और पंजाब की संस्कृति का बचाव करेगा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दे उठाएगा, साथ ही दिल्ली की तानाशाही के खिलाफ़ आवाज़ भी उठाएगा. दीप सिद्धू को लाल क़िले प्रसंग से मिली शोहरत की वजह से 'वारिस पंजाब दे' भी सुर्खियों में आ गया. पंजाब के एक पत्रकार नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं,

''पंजाब हमेशा से एक रिक्त स्थान मौजूद रहा है. राजनीतिक रूप से इस रिक्त स्थान को अकाली दल और कांग्रेस ने भरने की कोशिश की, अब आम आदमी पार्टी वही काम कर रही है. दीप सिद्धू, सिद्धू मूसेवाला या ये अमृतपाल सिंह जैसा कोई भी बंदा आकर तल्ख़ी से बोल देता है, तो उसका एक बेस बनने लगता है. लोग जुड़ने लगते हैं.''

बहरहाल, दीप सिद्धू की मौत के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख का पद खाली था. लेकिन वारिस पंजाब दे ख़बरों में बना हुआ था. पिछले साल 29 सितंबर के दिन 'वारिस पंजाब दे' के नए जत्थेदार अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी कर दी गई. पंजाबी में दस्तार सिर पर बंधने वाले साफे को कहा जाता है. यह मुखिया नियुक्त किए जाने की सांकेतिक रस्म है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि अमृत पाल सिंह की दस्तारबंदी भिंडरांवाले के गांव रोडे में की गई थी.

सिख धर्म का सुप्रीम कोर्ट कहे जाने वाले अकाल तख़्त के जत्थेदार और भिंडरावाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की थी. मंच से उन्होंने कहा था कि

“आप सब संगत के मन में कोई भुलावा ना रहे, इसलिए यह बात साफ़ करना जरुरी है. यह दस्तारबंदी 'वारिस पंजाब दे' जत्थेबंदी के के नए जत्थेदार भाई अमृतपाल सिंह की दस्तारबंदी है.”

जसबीर सिंह रोडे को यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों आन पड़ी. क्योंकि पूरे कार्यक्रम को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया था कि अमृतपाल सिंह को नए भिंडरावाले के तौर पर पेश किया जा सके. इस कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह के भाषण से ठीक पहले 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगाए गए. हालाँकि इसी कार्यक्रम में अमृतपाल सिंह ने साफ़ किया कि उनका इरादा खुद को भिंडरावाले के वारिस के तौर पर पेश करने का नहीं है. उन्होंने कहा,

"मैं भिंडरावाले के पैरों की धुल के बराबर भी नहीं हूँ, मैं उनके दिखाए रास्ते पर चलने की कोशिश करूँगा."

दस्तारबंदी के बाद से ही अमृतपाल खुलेआम खालिस्तान की मांग करता रहा है. वो खुलेआम भड़काऊ भाषण भी देता है. इंडियन एक्सप्रेस से लम्बे समय तक जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह कहते हैं कि

‘पंजाब की जो चोट है, उसका कोई इलाज नहीं निकला. और उस चोट से ही अमृतपाल सिंह जैसे लोग निकलते हैं. सिखों का एक संगठन है, जो अब 1981 की तरह ग़ुस्से में तो नहीं है, लेकिन उसके मन में रोष ज़रूर है. वो लोग ऐसे लोगों से जुड़ जाते हैं. पंजाब में इस समय की स्थिति बहुत चिंताजनक है.’

फिलहाल इस मामले पर पुलिस ने कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की बात कही है. ये कार्रवाई कब, कैसे और कहां पहुंचेगी हम आपको बताते रहेंगे.

दूसरी बड़ी खबर दिल्ली से आई है जहां दिनभर खूब हाईप्रोफाइल ड्रामा चला. 24 से 26 फरवरी तक छत्तीसगढ़ के रायपुर में कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन होना है. उसी में शामिल होने के लिए आज सुबह पवन खेड़ा भी रायपुर जाने वाले थे. लेकिन जा नहीं पाए. दिल्ली एयरपोर्ट पर ही उन्हें रोक लिया गया. पहले खबर आई कि उनका सामान चेक करने के लिए फ्लाइट रोकी गई है. फिर पता चला कि उन्हें फ्लाइट से उतार लिया गया है.

एयरपोर्ट पर पवन खेड़ा को रोका गया तो कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया.  एयरपोर्ट पर मौजूद रणदीप सुरजेवाला, सुप्रिया श्रीनेत, केसी वेणुगोपाल समेत तमाम कांग्रेस नेता पूरे प्रकरण को मोदी सरकार की तानाशाही बताते हुए धरने पर बैठ गए. कांग्रेस नेताओं ने इसे कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन को बाधित करने का प्रयास बताया.  

सुरजेवाला की पुलिस के साथ झड़प भी हुई. इन सबके बीच खबर आई कि दिल्ली पुलिस ने खेड़ा को गिरफ्तार कर लिया है. कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा फ्लाइट में बैठ चुके थे लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें फ्लाइट से उतार दिया और हिरासत में ले लिया. इस पर दिल्ली पुलिस की ओर से भी जवाब आया. दिल्ली पुलिस ने कहा कि पवन खेड़ा को असम पुलिस की सिफारिश पर हिरासत में लिया गया है. क्यों?

दरअसल, 17 फरवरी को मुंबई में कांग्रेस ने अडानी-हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी थी. जिसमें पवन खेड़ा ने अडानी-हिंडनबर्ग विवाद पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) की मांग दोहराते हुए कहा था.

महाराष्ट्र-गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में नाम के साथ पिता का नाम भी जोड़ दिया जाता है. जैसे नरेंद्र दामोदर दास मोदी. नरेंद्र, प्रधानमंत्री का नाम है और दामोदार दास उनके पिता का. आपने सुना पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री का नाम लेते वक्त उनके नाम के बीच लगने वाले उनके पिता का नाम गलत बोला. फिर साथ बैठे लोगों से पूछा, 

‘गौतम दास है या दामोदर दास है?’और फिर आखिर में तंज कसते हुए कहा, -'नाम भले दामोदार दास है, काम गौतम दास है. '

पवन खेड़ा का इशारा गौतम अडानी की ओर था. इसके बाद पवन खेड़ा ने ट्वीट भी किया था कि वो असल में प्रधानमंत्री के नाम को लेकर भ्रमित हो गए थे कि दामोदर दास है या गौतम दास. पवन खेड़ा के इस बयान पर बीजेपी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई. बीजेपी ने कहा कि ये प्रधानमंत्री के पिता का  अपमान है

पवन खेड़ा के बयान पर यूपी के लखनऊ, बनारस और असम के दीमा हसाओ जिले में सांप्रदायिक वैमनस्यता और आपराधिक साजिश की धाराओं में FIR दर्ज हुई. असम में दर्ज मुकदमे पर कार्रवाई करते हुए असम पुलिस ने दिल्ली में पवन खेड़ा को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तारी के बाद असम पुलिस ट्रांजिट रिमांड के लिए पवन खेड़ा को स्थानीय कोर्ट में पेश करने के लिए ले जा रही थी. इसी बीच कांग्रेस नेता मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने और कई राज्यों में दर्ज मुकदमों को रद्द करने की मांग की. अनुच्छेद 32, भारत के प्रत्येक नागरिक को संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिये सीधे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने का अधिकार देता है.

मामले पर सुनवाई शुरू हुई. कोर्ट ने पवन खेड़ा को चेतावनी देते हुए 28 फरवरी तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम आपको सुरक्षा दे रहे हैं लेकिन बात कहने का एक लेवल होना चाहिए.  इस पर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये जबान फिसलने का मामला था. इस पर खेड़ा ने माफी भी मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने से इनकार कर दिया. लेकिन तीनों मामलों को एक साथ क्लब कर सुनवाई करने का आदेश दिया. इसके बाद पवन खेड़ा को दिल्ली की द्वारका कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें रिहा कर दिया गया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे बीजेपी के लिए तगड़ा झटका बताया है.

वीडियो: पवन खेड़ा को प्लेन से उतारा, कांग्रेस ने एयरपोर्ट पर काटा हंगामा, बोली- PM मोदी की तानाशाही.

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