कोरा पर एक सवाल पूछा गया. जिंदगी में आपके साथ, कभी भी किसी ने सबसे अच्छा क्याकिया? जवाब दिया राज कोठारी ने. वो एनआईटी जमशेदपुर में पढ़ते हैं. 16 मार्च 2016 कीबात बताई. वो USA के डैलस फोर्टवर्थ एयरपोर्ट पर थे. अपनी टीम के साथ एक इंटरनेशनलएरो- डिजाइनिंग कंपटीशन में हिस्सा लेकर लौट रहे थे. उनके पास दो बड़े बक्से थे,जिनमें उनका सामान था.source- Raj Kothariकतर एयरवेज ने उनके लगेज को तय डायमेंशन से ज्यादा का माना. और "exceeding baggagedimensional allowance" का टैग लगा, 130 डॉलर का फाइन हर बक्से पर ठोंक दिया. लेकिनराज और उनकी टीम के पास पैसे कम थे. लगभग 70 डॉलर थे. देने 260 थे. एयरपोर्ट चेक-इनपर ये सुपरवाइजर से मान-मनौव्वल कर ही रहे थे कि एक आदमी ने इनसे पूछा क्याप्रॉब्लम है? वो आदमी इनके पीछे खड़ा था और बड़ी देर से इनकी बातों पर ध्यान दे रहाथा.राज ने बताया हमारा लगेज ओवर साइज है. हमें 260 डॉलर एक्स्ट्रा देने हैं, जो हमारेपास हैं नहीं.उस अजनबी ने कहा कि कोई मसला नहीं. तुम लोग लगेज चेक-इन करो. मैं तुम्हारे बक्सोंके लिए पैसे दूंगा.राज और उसके टीम के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि उस आदमी को वो बिलकुल नहीं जानतेथे. दूर देश में जिसे वो पहचानते भी नहीं हैं, भला क्यों उनके लिए इतने ज्यादा पैसेयूं ही भरेगा. खैर इन बालकों के पास कोई चारा नहीं था. इनने मदद स्वीकार कर ली.लेकिन ये तय किया कि उनका अकाउंट नंबर ले लेंगे और लौटते ही उनके पैसे चुका देंगे.लेकिन इससे भी उनने मना कर दिया.राज ने उन्हें थैंक्स कहा. और कहा बाय द वे, आप इंडिया में कहां से हैं?जवाब आया. कराची, पाकिस्तान से.राज़ और उनकी टीम हक्की-बक्की रह गई. उन्हें समझ नहीं आ रहा था. इस बात पर रिएक्टकैसे करें. उनने उनके साथ यादगार के तौर पर सेल्फी ली. अमाद नाम था उनका.अमाद, राइट मेंये राज का किस्सा था. राज ने बताया. कैसे एक अजनबी पाकिस्तानी ने उनकी मदद की. दूरदेश में और अपने पैसे भी लेने से मना कर दिया. कोरा पर कुछ रोज़ पहले उनने ये जवाबदिया. ये जवाब लोगों ने पढ़ा खूब शेयर किया. हम तक पहुंचा. भली बातें लोगों तक कम हीपहुंचती हैं. हम आप तक पहुंचा रहे हैं.