दिल्ली सेवा बिल को पास होने से रोकने के लिए कांग्रेस-AAP ने जो व्हिप जारी किया, वो होता क्या है?
संसद में वन-लाइन, टू-लाइन और थ्री-लाइन व्हिप क्या होते हैं?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) बिल, 2023 (या दिल्ली सर्विसेज बिल) राज्यसभा में भी पारित हो गया है. बिल के समर्थन में 131 वोट पड़े हैं, जबकि विरोध में 102 मत डाले गए. तकनीकी खराबी की वजह से पर्ची के जरिये वोट डाले गए थे. इस बिल को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच तकरार चल रही थी. ये विधेयक दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग से जुड़ा है.
बिल के राज्यसभा में पेश होने से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया था. सभी को 7 और 8 अगस्त को राज्यसभा में मौजूद रहने को कहा गया था. इसी तरह कांग्रेस ने भी अपने सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया. ये व्हिप क्या है और अलग-अलग व्हिप का क्या मतलब है?
व्हिप शब्द ब्रिटिश संसद की शब्दावली है. ब्रिटिश संसद में पार्टी लाइन का पालन करने के लिए व्हिप जारी किया जाता है. व्हिप किसी भी पार्टी के एक सांसद होते हैं, जिन पर सदन के भीतर दूसरे सांसदों की मौजूदगी की जिम्मेदारी होती है. हालांकि संसदीय भाषा में व्हिप को एक लिखित आदेश भी मान लिया गया है. जब कोई पार्टी सांसदों को किसी निर्देश का पालन करने बोलती है, तो उस "लिखित आदेश" को भी व्हिप ही माना जाता है.
भारत ने व्हिप को ब्रिटिश संसद से लिया है. हिंदी में इसे 'सचेतक' कहते हैं. भारत में सभी राजनीतिक दल संसद में किसी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस या बिल पेश के दौरान व्हिप जारी करते हैं. इसके लिए सभी पार्टियां संसद के भीतर अपने एक सदस्य को नियुक्त करती हैं. उसे चीफ व्हिप कहा जाता है. इसके अलावा कुछ एडिशनल व्हिप भी होते हैं.
अलग-अलग लाइन के व्हिप का मतलब?इस व्हिप के पद का जिक्र भारत के संविधान में नहीं है. न ही संसदीय नियमों में इसकी कोई चर्चा है. राजनीतिक दल संसद और राज्य विधानसभा परिषद दोनों में इसका इस्तेमाल करते हैं. व्हिप की गंभीरता आदेश में अंडरलाइन की गई लाइन की संख्या पर निर्भर करती है.
वन लाइन व्हिप- इसके जरिये पार्टी के सदस्यों को वोटिंग के बारे में जानकारी दी जाती है. इस आदेश में सदस्यों को पार्टी लाइन को न मानते हुए अनुपस्थिति होने की छूट होती है.
टू लाइन व्हिप- इस आदेश के जरिये पार्टी सदस्यों को वोटिंग के दौरान सदन में मौजूद रहने को कहा जाता है. हालांकि वोटिंग को लेकर कोई खास निर्देश नहीं दिया जाता है.
थ्री लाइन व्हिप- ये पार्टी के सदस्यों के लिए सख्त आदेश होता है. महत्वपूर्ण बिलों के पेश होने, अविश्वास प्रस्ताव जैसी स्थिति में अमूमन तीन लाइन का व्हिप जारी किया जाता है.
जैसे नीचे के इस आदेश को देखिये. इसमें आदेश के नीचे तीन बार अंडरलाइन किया गया है. ये थ्री लाइन व्हिप है.

व्हिप का आदेश नहीं मानने पर हर देश में अलग-अलग व्यवस्था है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में व्हिप का उल्लंघन करने पर सांसद पार्टी की सदस्यता खो सकता है, लेकिन सदन में निर्दलीय सदस्य के रूप में बना रह सकता है.
वहीं भारत में तीन लाइन व्हिप का उल्लंघन करना सांसदों के लिए जोखिम भरा है. दल-बदल कानून के तहत, पार्टी लाइन से अलग वोट करने पर सांसद की सदन से सदस्यता जा सकती है. संविधान की 10वीं अनुसूची के दूसरे पैराग्राफ में कहा गया है कि सदन का कोई भी सदस्य, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो, यदि पार्टी बदलता है या पार्टी के निर्देश के विपरीत वोट करता है या फिर पार्टी की इजाजत के बिना सदन की कार्यवाही से गैरहाजिर रहता है और वोट नहीं करता है, तो ऐसे व्यक्ति की सदन से सदस्यता खत्म कर दी जाएगी.
ये कानून दल बदल को रोकने के लिए लाया गया था. हालांकि इसी कानून में कहा गया है कि अगर विधायक या संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्य ऐसा करें, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है.
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