मेरे को न एक चीज बड़ी अच्छी लगती है. इस दुनिया में जो है. जो चीज प्राकृतिक नहींहै. हर उस चीज से कैंसर हो जाता है. और जो भी चीज नेचुरल है उससे कैंसर ठीक होनेलगता है. फिर कैंसर पुराना लगने लगे तो उस चीज से एड्स ठीक होने लगता है. आपको कभीऐसा हो कि कोई रैंडम सी चीज मिले. उसको हिट कराना हो तो किसी बड़ी चीज से जोड़ दीजिए.घास-पत्ती या आयुर्वेदिक चीज मिले. उसको बगराना हो तो कहिए इससे कैंसर और एड्स जैसीअसाध्य बीमारी ठीक होती है. या कह दीजिए इससे यौन दुर्बलता जाती रहती है, शुक्राणुबढ़ते हैं. साथ में एक चीज और जोड़ दीजिए कि ये संजीवनी है. इस बार हमको दिखी नोनी.एक वेबसाइट ने खबर लगाई है कि इस फल को खाने से कोई बीमारी नहीं हो सकती. चाहे वोएड्स हो जा फिर कैंसर. फल कौन सा? नोनी. हमारे यहां पत्थर पर पड़ा रहता है. हम चिरईका बीज कहते हैं. इस वेबसाइट पर लिखा है. इस फल से अस्थमा, गठिया, मधुमेह, दिल कीबीमारी. नपुंसकता, औरतों की बीमारी और बांझपन दूर हो जाता है. साथ में ये भी लिखाथा कि इसको खाने से गुटखा-तंबाकू छूट जाएंगे और तो और इससे कैंसर भी नहीं होगा.इतने पर भी न रुककर इनने लिखा कि इस फल से रोग प्रतिरोधक क्षमता ऐसी बढ़ेगी कि एड्सभी न होगा. अब हमको एक चीज समझ नहीं आती. इससे एड्स नहीं होगा. ये तो इनने कह दिया.अब माने कैसे. ये टेस्ट कौन करेगा? ऐसा स्वयंसेवक कहां मिलेगा? जो पहले नोनी खाए औरफिर ऐसा कुछ करे कि उसे एड्स हो कि न हो. समझ रहे हैं न? इतना तो सरकारी रेडियो सुनहमको भी पता है कि असुरक्षित यौन संबंध से. खून के आदान-प्रदान से और मां से बच्चेको. अब अगर साइंटिफिकली प्रूव करना हो तो कैसे प्रूव करेंगे कि नोनी खाने से एड्सरोगी से या खून से दूसरे बंदे को एड्स नहीं हुआ. और सुनो मान लो अगर कोई तैयार होभी गया और ऐसा सच न निकला तो?