केरल में अडानी ग्रुप के खिलाफ प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं लोग?
इन प्रदर्शनों के चलते तीन हजार लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं.

विझिनजम. केरल (Kerala) में समुद्री तट पर बसा एक छोटा सा गांव. तिरुवनंतपुरम से करीब 20 किलोमीटर दूर इस इलाके में लंबे समय से अडानी समूह (Adani Group) का विरोध हो रहा है. वजह है, पिछले सात साल से यहां बन रहा इंटरनेशनल सी पोर्ट. 27 नवंबर को विझिनजम पोर्ट का विरोध तेज हो गया. प्रदर्शनकारियों ने 5 लोगों की रिहाई की मांग करते हुए स्थानीय पुलिस स्टेशन में तोड़-फोड़ की. एक दिन पहले पांच प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था.
समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि हिंसा में 36 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. पोर्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हजार से ज्यादा लोगों ने थाने को घेर लिया था. इस दौरान पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. थाने में तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले के लिए 3 हजार लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं. इससे पहले लैटिन कैथोलिक चर्च के कम से कम 15 पादरियों के खिलाफ भी पुलिस ने केस दर्ज किया था.
क्या है विझिनजन सी पोर्ट प्रोजेक्ट?विझिनजम इंटरनेशनल सी पोर्ट के निर्माण की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने इसकी आधारशिला रखी है. इस सी पोर्ट प्रोजेक्ट की लागत 7,525 करोड़ है. पोर्ट का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत किया जा रहा है. पोर्ट पर 30 बर्थ (ऐसी जगह जहां जहाज में सामान भरे जाते हैं या उतारे जाते हैं) होंगे. अडानी समूह के मुताबिक, आधुनिक सी पोर्ट बड़े जहाजों को हैंडल कर सकता है और यह बड़े अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट के नजदीक है.
शुरुआती समझौते के मुताबिक, 360 एकड़ में बन रहे इस पोर्ट की शुरुआत 2019 में होनी थी. दावा है कि पोर्ट की क्षमता भारत के 80 फीसदी माल (Cargo) को ढोने की है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप ने देरी के पीछे कई कारण बताए हैं. इनमें 2017 में आए ओखी चक्रवात से लेकर कोविड-19 महामारी तक शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी ने ग्रेनाइट पत्थरों की कमी को भी देरी की वजहों में शामिल किया गया है. इन पत्थरों से समुद्री लहरों को रोकने के लिए 3.1 किलोमीटर लंबी दीवार (ब्रेकवाटर) बनाई जानी है. अब तक सिर्फ एक किलोमीटर की दीवार बनी है.
प्रोजेक्ट का विरोध क्यों?राज्य सरकार को उम्मीद है कि अब ये प्रोजेक्ट 2023 तक पूरा हो जाएगा. हालांकि, इस प्रोजेक्ट को शुरुआत से ही विरोध झेलना पड़ा है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं, मछली पकड़ने वाले और स्थानीय लोग लगातार इसका विरोध करते रहे हैं. उनका आरोप है कि प्रोजेक्ट के कारण बड़े स्तर पर तटीय कटाव होंगे या हो रहे हैं. साल 2016 में, दो पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) में पोर्ट के खिलाफ याचिका डाली थी. लेकिन NGT ने पर्यावरणीय मंजूरी रद्द करने से इनकार कर दिया था.
बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया. कोर्ट ने भी काम जारी रखने की मंजूरी दे दी. मछली पकड़ने वाले स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रोजेक्ट के कारण उनके समुद्री रास्ते बंद हो गए हैं. उनका डर है कि पोर्ट बनने के बाद वो समुद्र से और दूर हो जाएंगे और उनके लिए मछली पकड़ना मुश्किल हो जाएगा. इसके अलावा प्रोजेक्ट के कारण विस्थापित हुए लोग भी मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विरोध कर रहे हैं.
लैंड कॉन्फ्लिक्ट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2020 में नेशनल फिशवर्कर्स फोरम के महासचिव टी पीटर ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तटीय कटाव के कारण 172 परिवार पहले ही बेघर हो चुके हैं. हालांकि, अडानी समूह और केरल सरकार तटीय कटाव होने की बात को नकार चुके हैं. पर्यावरण कार्यकर्ता थॉमस लॉरेंस ने दावा किया था कि सिर्फ 2019 में 143 परिवार के करीब 603 लोगों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया गया.
प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं?- तटीय कटाव के कारण जिन्हें अपना घर खोना पड़ा है उनका तत्काल पुनर्वास किया जाए
- तटीय कटाव को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं
- मछली पकड़ने वालों को खराब मौसम वाले दिन न्यूनतम वित्तीय मदद दी जाए
- पोर्ट का निर्माण रोकें, स्थानीय लोगों और एक्सपर्ट को शामिल कर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की स्टडी कराएं
- किरोसीन पर सब्सिडी उपलब्ध कराएं
- जिन मछली पकड़ने वालों ने जान गंवाई है उनके परिवारों को मुआवजा मिले
हालांकि, 2019 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी, चेन्नई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2015 में पोर्ट का निर्माण शुरू होने के बाद वल्लियाथुरा, शंगुमुघाम और पुंथुरा जैसी जगहों पर कटाव में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
केरल सरकार क्या कह रही है?राज्य सरकार किरोसीन पर सब्सिडी देने और पोर्ट के निर्माण कार्य को रोकने के अलावा सारी मांगें मान चुकी है. फिलहाल, लैटिन कैथोलिक चर्च के नेतृत्व में 100 दिनों से ज्यादा समय से स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. चर्च इसलिए नेतृत्व कर रहा है, क्योंकि इलाके के 80 फीसदी मछली पकड़ने वाले इससे संबंध रखते हैं. केरल सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे प्रदर्शन को खत्म करें. सरकार ने इस प्रोजेक्ट को औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया था. 23 अगस्त को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में कहा था कि कुछ इलाकों में प्रदर्शन सुनियोजित तरीके से हो रहे हैं. उन्होंने कहा था कि सरकार पहले ही बातचीत के लिए तैयार थी और मछली पकड़ने वाले सभी चिंताओं को दूर करना चाहती है.
वहीं अडानी समूह का कहना है कि पर्यावरण नियमों के तहत ही पोर्ट का निर्माण कार्य हो रहा है. निर्माण कार्य रोके जाने के खिलाफ अडानी समूह ने हाई कोर्ट का रुख किया था. 22 नवंबर को हाई कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को आदेश दिया था कि वे निर्माण कार्य ना रोकें. कोर्ट ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद अडानी ग्रुप ने 26 नवंबर से काम दोबारा शुरू किया था. हालांकि, इसके बावजूद सैकड़ों लोग सी पोर्ट के गेट के सामने प्रदर्शन के लिए जुट गए. अडानी समूह ने बताया कि 26 नवंबर को दो दर्जन से ज्यादा ट्रक सामान लेकर पोर्ट पहुंचे थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों के विरोध के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा. अडानी समूह ने पत्थरबाजी होने का भी आरोप लगाया.
विझिनजम इंटरनेशनल सी पोर्ट के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है. हालांकि, इसके साथ मछुआरों और स्थानीय लोगों का विरोध भी जारी है.
आरवम: केरल, कोयंबटूर के बाद मैंगलोर ब्लास्ट, दक्षिण भारत में क्यों बढ़ रहा आतंक?

.webp?width=60)

