आत्माराम दुबे हमको ट्यूशन पढ़ाते थे. कक्षा तीन में थे हम शायद. एमपी बोर्ड कीकिताबों में कुछ सवाल ऐसे होते थे, जो सिर्फ आपस में बतियाने के लिए होते हैं.लेकिन आत्माराम दुबे ने कह दिया कि उन सवालों के जवाब भी लिखने हैं. एक सवाल था,अगर आपको हाथी के लिए कपड़े सिलने हों तो क्या करेंगे? हमने बहुत आऊं-झाऊं सा जवाबलिखा और नीचे पूरी क्रियेटिविटी उड़ेलते हुए छोटे शब्दों में 'बकवासवाणी' लिख दिया.आत्माराम दुबे ने जाने कैसे पढ़ लिया और आगे का आप समझ सकते हैं.उस वक़्त हमें ये बकवास आईडिया लगा था, कोई हाथी के लिए कपड़े क्यों सिलेगा? हाथीजैसा है वैसा ही ठीक है. लेकिन नहीं. जब तापमान इतना नीचे गिर जाए कि फ्रीजिंगपॉइंट को छूने लगे तो जरूरी हो जाता है हम जानवरों का ही कुछ सोचें. Wildlife SOSElephant Conservation and Care Centre है मथुरा में. जानवरों की सुरक्षा औरतीमारदारी के काम ये लोग बहुत टाइम से कर रहे हैं. दुनिया के सबसे अभागे हाथी को भीबचाने का काम इन लोगों ने किया था.Source- Roger Allenयहां लोगों ने हाथियों के लिए कपड़े बुने हैं. रंग-बिरंगे से. हथिनियां उन्हेंपहन-पहन इठला रही हैं. ऐसी ही कई तस्वीरें आई हैं. रंग बिरंगे कपड़े हैं, जो उनकेपेट-पीठ और पैर ढंक सके. और इसमें बड़े-बड़े हाथी बहुत क्यूट लगते हैं. ऐसा लगता हैडिज्नी की कोई कलरफुल सी फिल्म आंख के सामने चालू हो गई.Source- Roger Allenइस सेंटर में रखे गए जानवर खास होते हैं. क्योंकि कहीं न कहीं से उन्हें बचाकर लायाजाता है. ऐसे में वो ज्यादा संवेदनशील होते हैं. और जाहिर सी बात है. उन्हेंबीमारियों का खतरा भी ज्यादा होता है. और लाड-प्यार की जरूरत भी ज्यादा.Source- Roger Allen--------------------------------------------------------------------------------दुनिया के सबसे अभागे हाथी के दिन फिर गए हैं