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ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का वीडियो, वजूखाने में दिखी आकृति की साफ तस्वीर सामने आई

याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के वीडियो और फोटो की मांग की थी. हालांकि उन्होंने हलफनामे में लिखा था कि वो फोटो और वीडियो का दुरुपयोग नहीं करेंगी.

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30 मई 2022 (अपडेटेड: 2 जून 2022, 11:28 PM IST)
Gyanvapi Masjid
वजूखाने की जगह वाली आकृति (फोटो- आज तक)
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वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जारी विवाद एक नया मोड़ ले सकता है. दरअसल ज्ञानवापी मस्जिद में किए गए सर्वे का वीडियो सोमवार 30 मई को मीडिया में सामने आया. वीडियो मस्जिद के भीतर उसी वजूखाने वाली जगह का है, जहां हिंदू पक्ष ने 'शिवलिंग' मिलने का दावा किया था. इस वीडियो में भी वजूखाने के केंद्र में काले रंग के पत्थर की एक आकृति नजर आ रही है. लेकिन इस बार के फुटेज ज्यादा क्लियर और नजदीक के हैं. बता दें कि इसी आकृति के ‘शिवलिंग’ होने का दावा किया गया है. इसी पत्थर के ऊपर त्रिभुज आकार की 5 सीमेंटेड आकृतियां गोल शेप में भी बनी हुई हैं.

फव्वारा और शिवलिंग पर फिर बहस शुरू

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में वकीलों की मौजूदगी में वाराणसी नगर निगम के कुछ कर्मी उस आकृति के पास से पानी निकालते नजर आ रहे हैं. उसी दौरान कुछ लोग बातचीत में कह रहे हैं कि आकृति की ऊंचाई 58 सेमी की है. वहां मौजूद वकील कहते हैं कि उस आकृति का वीडियो अच्छे से बनाएं. एक वकील बोलते नजर आ रहे हैं कि अब पब्लिक देखेगी कि ये फव्वारा है या शिवलिंग है. मस्जिद के भीतर का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें दीवारों पर ‘त्रिशूल’ जैसी आकृति होने का दावा किया जा रहा है.

सर्वे का वीडियो सामने आने के बाद हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने दावा किया कि वो शिवलिंग ही है. आजतक से जुड़े समर्थ श्रीवास्तव से उन्होंने कहा, 

"जिसने हिंदू के रूप में कभी भी पूजा की होगी वो साफ कह सकता है कि वो शिवलिंग है. इसमें कोई शंका नहीं होनी चाहिए. शिवलिंग के साथ ज्यादती की गई है. दिख रहा है कि किस तरह का घाव पहुंचाया गया है. ये बड़ा चिंतनीय विषय है. हिंदुओं की भावनाओं के साथ कुठाराघात किया गया है."

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अब 4 जुलाई को अगली सुनवाई होगी. सोमवार, 30 मई को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष के दावों पर आपत्ति दर्ज कराई. याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद के सर्वे के वीडियो और फोटो की मांग की थी. हालांकि उन्होंने हलफनामे में लिखा था कि वो फोटो और वीडियो का दुरुपयोग नहीं करेंगी. वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने आजतक से कहा था कि सर्वे का वीडियो पब्लिक रिकॉर्ड है जो सबके सामने आना चाहिए.

मामले में याचिकाकर्ता महिलाओं ने कहा कि उन्हें सर्वे के दौरान मस्जिद के भीतर नहीं जाने दिया गया था. वीडियो सामने आने के बाद उनमें से एक महिला ने बताया, 

"साफ-साफ नजर आ रहा है कि वो शिवलिंग है. हम लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. ये कहीं से भी फव्वारा नहीं लग रहा है."

'फव्वारा ही है'

वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील रईस अहमद ने कहा कि सर्वे के दौरान उन्होंने देखा था कि वो फव्वारा है. उन्होंने आजतक से कहा, 

"उन्होंने फव्वारा को चलाने का मौका ही नहीं दिया. आखिरी बार वो कब चला था, वो हम मस्जिद कमिटी से ही पूछकर बता सकते हैं. जिन लोगों को हर जगह बाबा (शिवलिंग) दिखता है, उनके लिए हम क्या कर सकते हैं. जिसकी जिनमें आस्था होती, उन्हें वही चीज दिखाई देती है. मंदिर के सामने किसी का घर हो तो वो मंदिर तो नहीं हो जाएगा."

ये वीडियो तब सामने आया है, जब ज्ञानवापी का मामला कोर्ट में विचाराधीन है. कोर्ट ने अभी तक मामले की सुनवाई भी पूरी नहीं की है. ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट 19 मई को कोर्ट में पेश की गई थी. जिसमें रिपोर्ट के साथ-साथ 1000 से ज्यादा तस्वीरें और कई घंटे की वीडियो फुटेज भी थीं.

वीडियो: ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को दी 1700 स्क्वायर फीट जमीन

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