The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Verginity test on accused woman or detainee is also unconstitutional says Delhi High Court

'वर्जिनिटी टेस्ट करना घिनौना, आरोपी महिला पर भी नहीं हो सकता'- दिल्ली हाई कोर्ट

CBI ने सिस्टर अभया मर्डर केस की दोषी सिस्टर सेफी का वर्जिनिटी टेस्ट करवाया था. इसी पर कोर्ट ने फैसला सुनाया.

Advertisement
pic
8 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 8 फ़रवरी 2023, 05:26 PM IST)
Verginity test Delhi high court
मर्डर केस की दोषी सिस्टर सेफी (फाइल फोटो)
Quick AI Highlights
Click here to view more

"वर्जिनिटी टेस्ट करना सेक्सिस्ट है, घिनौना है. मर्डर केस की आरोपी महिला के साथ भी ऐसा करना असंवैधानिक है. संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है." 

ये टिप्पणी दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की है. 7 फरवरी को हाई कोर्ट ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट (Virginity Test) एक महिला के शारीरिक और मानसिक आत्मसम्मान को चोट पहुंचाता है. इससे महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है. किसी लड़की ने कभी किसी के साथ सेक्स किया या नहीं, ये जांचने के लिए उसका वर्जनिटी टेस्ट करवाया जाता है.

दिल्ली हाई कोर्ट में ये सुनवाई 1992 के सिस्टर अभया मर्डर केस की दोषी सिस्टर सेफी की याचिका पर हो रही थी. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कुछ मौलिक अधिकारों को कभी रद्द नहीं किया जा सकता, चाहे वह व्यक्ति हिरासत में क्यों ना हो. उन्हीं अधिकारों में आत्मसम्मान का अधिकार भी है, जो संविधान के अनुच्छेद-21 के दायरे में आता है. जस्टिस शर्मा ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट एक अमानवीय तरीका है.

मर्डर केस की दोषी सिस्टर सेफी का सिस्टर अभया की हत्या के 16 साल बाद वर्जिनिटी टेस्ट करवाया गया था. इसी के खिलाफ उन्होंने याचिका डाली थी. पहले अभया मर्डर केस के बारे में बताते हैं.

अभया मर्डर केस की कहानी

केरल का कोट्टायम जिला. यहां के सेंट पायस X कॉन्वेंट में एक नन सिस्टर अभया पढ़ती थीं. 28 मार्च 1992 को उसी कॉन्वेंट के कुएं में सिस्टर अभया की लाश मिली थी. 1993 में केरल पुलिस ने इसे 'आत्महत्या' बताकर केस बंद कर दिया था. उसके बाद सिस्टर अभया के साथ की 67 ननों ने केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. करुणाकरण से अपील की कि इसे हत्या मानकर जांच कराई जाए. फिर मामले की जांच CBI को सौंपी गई.

CBI की पहली टीम ये पता नहीं लगा पाई कि मौत का कारण क्या था. फिर दूसरी टीम भी बनाई गई. उसने कहा कि ये सुसाइड नहीं, मर्डर था. लेकिन कत्ल करने वालों को पकड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे. कोर्ट ने रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया और जांच जारी रखने को कहा. साल 2005 में CBI ने फिर से क्लोजर रिपोर्ट फाइल की लेकिन वो भी खारिज कर दी गई. फिर साल 2008 में CBI की एक नई टीम ने उसी कॉन्वेंट के दो पादरियों और एक नन पर सिस्टर अभया की हत्या का आरोप लगाया.

CBI की जांच के मुताबिक, सिस्टर अभया 27 मार्च को जब किचन में गईं, तो उन्होंने दो पादरियों और एक नन- थॉमस कुट्टूर, जोस पुथुरुक्कयिल, और सिस्टर सेफी को ‘आपत्तिजनक स्थिति’ में पाया. सिस्टर अभया ये बात किसी को बता न दें, इसी डर में तीनों ने मिलकर उन पर हमला किया जिससे सिस्टर अभया बेहोश हो गई. बाद में सभी सिस्टर अभया को कुएं में डाल आए. 28 साल बाद, दिसंबर 2020 में CBI की विशेष अदालत ने फादर थॉमस कुट्टूर और नन सिस्टर सेफी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इससे पहले 2018 में फादर जोस पुथुरुक्कयिल को सबूतों के अभाव में मामले से बरी कर दिया गया था.

वर्जिनिटी टेस्ट का मामला

साल 2009 में सिस्टर सेफी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका डाली थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि CBI ने उनकी सहमति के बिना उनका वर्जिनिटी टेस्ट करवाया. सिस्टर सेफी का आरोप था कि CBI ने इस थ्योरी को गढ़ने के लिए टेस्ट करवाया कि उनका दो पादरियों के साथ संबंध था. याचिका में कहा गया कि इस कथित हत्या के मामले का उनकी वर्जिनिटी से कोई लेना-देना नहीं था. सिस्टर सेफी ने याचिका में मुआवजे के साथ-साथ CBI अधिकारियों को सजा देने की भी मांग की थी.

हालांकि CBI ने बचाव में कहा कि मामले की जांच के लिए टेस्ट करवाना जरूरी था. जांच एजेंसी के मुताबिक, साल 2008 में आरोपी के लिए ऐसे टेस्ट को करवाना असंवैधानिक नहीं था. यहां तक कि आज भी किसी कोर्ट ने ऐसा नहीं कहा है कि आरोपी का वर्जिनिटी टेस्ट नहीं करवाया जा सकता है. हालांकि यौन हिंसा के पीड़ितों के लिए ऐसे कई फैसले हैं.

ये भी पढ़ें- 'टू फिंगर टेस्ट' पर सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगाया, कहा- ये औरत को दोबारा रेप का सदमा देने जैसा

दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इसे असंवैधानिक बता दिया. कोर्ट ने कहा कि सिस्टर सेफी मौलिक अधिकार के हनन के खिलाफ मुआवजे की मांग कर सकती हैं. जस्टिस शर्मा ने आदेश में ये भी कहा कि इस फैसले को गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के जरिये सभी जांच एजेंसियों को भेजा जाना चाहिए.

वीडियो: म्याऊं: मेन्स्ट्रूअल कप इस्तेमाल करने से औरतों की 'वर्जिनिटी' चली जाती है?

Advertisement

Advertisement

()