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वाराणसी में 42 लाख की लूट का 'मास्टरमाइंड' निकला दारोगा, गिरफ्तारी के बाद मुस्कुराता दिखा

Varanasi Police के एक दारोगा सूर्यप्रकाश पांडे और उनके साथियों पर आरोप है कि उन्होंने नकली क्राइम ब्रांच बन व्यापारी के साढ़े 42 लाख रुपये लूट लिए.

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SI involved in robbery of 42 lakhs (photo-aajtak)
दारोगा ने टीम बना व्यापारी से लूटे 42 लाख (फोटो-आजतक)
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निहारिका यादव
25 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 25 जुलाई 2024, 05:24 PM IST)
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उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर. यहां के रामनगर थाना क्षेत्र में एक सर्राफा व्यापारी के दो कर्मचारियों से 22 जून की रात को 42.5 लाख रुपये लूट लिए गए. दोनों कर्मचारी बस से कहीं जा रहे थे. तभी एक वर्दीधारी पुलिसवाले के साथ दो और लोग आए. उन दोनों कर्मचारियों को बीच रास्ते में उतारा. फिर कहीं सुनसान इलाके ले जाकर उनसे साढ़े 42 लाख रुपये छीन लिए और बाकी के पैसे वापस कर भाग गए. कर्मचारियों ने व्यापारी से शिकायत की तो उसने इस मामले की शिकायत पुलिस में की. जांच में पाया गया कि आरोपियों में केवल बदमाश शामिल नहीं थे. बल्कि एक स्थानीय दारोगा ही इस लूट का मास्टरमाइंड था.

आजतक के रोशन जायसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) सूर्यप्रकाश पांडे कैंट थाना के अंतर्गत नदेसर चौकी पर पोस्टेड था. दारोगा और उसके साथियों ने नकली क्राइम ब्रांच का अफसर बन व्यापारी के कर्मचारियों से 42.5 लाख रुपये लूटे थे. पुलिस ने दारोगा और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि, अभी भी तीन आरोपी फरार हैं. उनकी तलाश की जा रही है.

लूट के मामले में दारोगा सूर्यप्रकाश पांडे सहित पकड़े गए तीन लोगों को बुधवार 24 जुलाई को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. इस दौरान निलंबित दारोगा सूर्यप्रकाश पांडे का हंसते हुए वीडियो भी वायरल है. इसकी चर्चा बनारस कचहरी से लेकर पूरी वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस में हो रही है.

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मामले पर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने बताया,

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रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि 22 जून को वाराणसी के एक बड़े सर्राफा व्यापारी के दो वर्कर फर्म के 93 लाख रुपये लेकर बस से जा रहे थे. इसकी सूचना जैसे ही आरोपी चौकी इंचार्ज सूर्यप्रकाश पांडेय को हुई तो उसने लूट का प्लान बनाया. सूर्यप्रकाश ने दो अन्य लोगों को लूट के प्लान में शामिल किया. इसके लिए बस में पहले से ही अपने एक आदमी को अवैध पिस्टल के साथ बिठा दिया. बस जैसे ही हाईवे पर पहुंची, वैसे ही चौकी इंचार्ज और उसके साथियों ने अपने आपको क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर बस रुकवाई. फिर दोनों कर्मचारियों को पूछताछ के नाम पर बस से उतार लिया. फिर कुछ दूर जाकर हवाला का पैसा बताकर दोनों कर्मचारियों से 93 लाख में से 42.50 लाख छीन लिए और 50 लाख लौटा दिए.

स्थानीय पुलिस पर आरोप है कि शुरू में उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया. दबाव बढ़ने पर सीनियर अधिकारियों ने मामले की जांच एसओजी से करवाई. जिसमें घटना में शामिल एक शख्स पकड़ा गया. उससे पूछताछ के बाद दारोगा सूर्यप्रकाश पांडेय का नाम सामने आया. इसके बाद जब गहनता से जांच की गई तो पता चला कि घटना वाले दिन दारोगा वहीं था और खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर वारदात को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी.

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