रक्षा मंत्री के दावे की अमेरिकी सैनिक ने खोली पोल, कहा- 'ईरानी हमले में 6 सैनिकों की मौत पर झूठ बोला'
Iran Attacks Kuwait: ईरानी हमले में जिंदा बचे अमेरिकी सैनिकों ने रक्षा मंत्री Pete Hegseth के दावे को ‘झूठा’ बताया है. उन्होंने बताया कि उनकी यूनिट को ‘खतरनाक इलाके’ में भेजा गया, जहां ईरानी मिसाइलें और ड्रोन उन्हें आसानी से निशाना बना सकते थे.

1 मार्च को कुवैत के शुएबा बंदरगाह पर हुए ईरानी ड्रोन हमले में अमेरिका के छह सैनिक मारे गए थे. तब अमेरिकी युद्ध मंत्री (रक्षा मंत्री) पीट हेगसेथ ने दावा किया था कि जिस ऑपरेशन सेंटर पर हमला हुआ, वह मजबूत ‘किलेबंदी वाला’ था और एयर डिफेंस को चकमा देते हुए ईरानी ड्रोन अंदर घुस आया. अब इस हमले में जिंदा बचे सैनिकों ने रक्षा मंत्री के दावे को ‘झूठ’ बताया है. उनके मन में पहले ही सवाल था कि उनकी यूनिट को इतने ‘खतरनाक इलाके’ में क्यों भेजा गया, जहां ईरानी मिसाइलें और ड्रोन उन्हें आसानी से निशाना बना सकते थे.
अमेरिकी सेना की 103वीं सस्टेनमेंट कमांड के सैनिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह हमला एक हल्के सुरक्षा वाले ठिकाने पर किया गया था. हमले में घायल एक सैनिक ने CBS न्यूज को बताया,
"यह बताना कि एक ड्रोन किसी तरह बचकर निकल गया, पूरी तरह झूठ है. मैं चाहता हूं कि लोगों को पता चले कि यह यूनिट अपनी सुरक्षा के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी. यह कोई किलेबंदी वाली जगह नहीं थी."
एक सैनिक ने कहा कि इस यूनिट को एक खतरनाक इलाके के पास ले जाया गया. सेना की लॉजिस्टिक्स यूनिट को एक ऐसे बेस पर भेजा गया था जो ईरानी ड्रोनों और मिसाइलों की मारक रेंज के अंदर था. सैनिकों के मुताबिक, उनका बेस कोई ‘किलेबंद जगह’ नहीं थी, बल्कि लकड़ी और टीन से बने अस्थायी कार्यालय थे जो हवाई हमलों से निपटने में पूरी अक्षम और तैयार नहीं थे.
'जब ड्रोन ने हमला किया'रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च को मिसाइल अलर्ट मिलने के बाद सैनिकों ने सुरक्षित ठिकानों पर पनाह ले ली थी, लेकिन हमले से ठीक पहले 'ऑल-क्लियर' (खतरा टलने का) सिग्नल जारी कर दिया गया. सिग्नल के 30 मिनट बाद, ईरान के ड्रोन ने कंपाउंड पर हमला किया और बड़े पैमाने पर तबाही मचाई. एक सैनिक ने कहा,
"सब कुछ हिल गया. यह कुछ वैसा ही था जैसा आप फिल्मों में देखते हैं. आपके कान बज रहे हैं... हर जगह धूल और धुआं है."
एक अधिकारी ने पहले रॉयटर्स को बताया था कि यह साफ नहीं था कि एयर डिफेंस मौजूद था या नहीं, लेकिन ड्रोन के पास आने पर कोई अलार्म नहीं बजा. एक सैनिक ने भयानक मंजर को याद करते हुए बताया,
"कुछ सैनिकों के सिर पर जख्म था. कुछ के बहुत तेज खून निकल रहा था. बहुत से लोगों के कान के पर्दे फटे हुए थे और हर तरफ छर्रे बिखरे हुए थे. इससे लोगों के पेट, बांहों और पैरों से खून बह रहा था."
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घायल सैनिकों ने खुद फर्स्ट एड दिया और घायलों को हॉस्पिटल ले जाने के लिए सिविलियन गाड़ियों का इस्तेमाल किया. पेंटागन के एक प्रवक्ता ने सैनिकों के दावों पर कुछ भी कहने से मना कर दिया और कहा कि शुएबा पोर्ट पर हमले की जांच चल रही है.
वीडियो: कुवैत एयरपोर्ट पर ईरान का ड्रोन अटैक, फ्यूल टैंक में लगी आग

