'हम किराये की बंदूकें नहीं हैं', ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'कुर्द प्लान' फुस्स न हो जाए
US Iran War: अमेरिका की ये पुरानी चाल रही है कि किसी देश में सीधे जंग में न घुसकर विद्रोही गुटों को हथियार दिए जाएं. सीरिया और ईराक में अमेरिका ये कर चुका है और अब लगता है कि ईरान को भी इन्हीं की तरह गृह युद्ध और लंबी लड़ाई में धकेलने का प्लान है.

अमेरिका ने सोचा था ईरान पर हमला करेंगे, अयातुल्लाह अली खामेनेई को मार गिराएंगे और वेनेजुएला की तरह रिजीम चेंज हो जाएगा. और हमारा ज्यादा नुकसान भी नहीं होगा. लेकिन ईरान ने अमेरिका के साथ-साथ इजरायल के खिलाफ जिस तरीके से पलटवार किया है, साफ कर दिया है कि उसे ‘वेनेजुएला’ समझना इन दो महाशक्तियों की गलतफहमी थी. ईरान के हमलों ने अमेरिका से लेकर इजरायल और तमाम अरब देशों की नींद उड़ा रखी है.
ऐसे में अमेरिका पुरानी चाल चलने के इरादे में हो सकता है. आशंका है कि वो ईरान में भी वही करने जा रहा है, जो अतीत में फंसे बाकी देशों के साथ करता आया है. प्रॉक्सी वॉर. यानी सीधे जंग में न घुसकर विद्रोही गुटों को हथियार देना. सीरिया और ईराक में अमेरिका ये कर चुका है. चर्चा है अब ईरान को भी गृह युद्ध और लंबी लड़ाई में धकेलने का प्लान है.
CIA ने बनाया प्लानअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA कुर्दिश फोर्सेज को ईरान से लड़ने के लिए हथियार देने का प्लान बना रही है. हजारों की संख्या में हथियारबंद ये कुर्दिश लड़ाके सालों से ईरान के इस्लामी शासन के खिलाफ विद्रोह करते आ रहे हैं. इनकी मुख्य मांगें कुर्दों के लिए ज्यादा अधिकार और स्वायत्तता है. कुछ समूहों की मांग अलग कुर्दिस्तान बनाने की भी है. ये कुर्दिश फोर्सेज इराक-ईरान बॉर्डर के पास, खासकर इराक के कुर्दिस्तान इलाके में ऑपरेट करती आई हैं.
इसी को लेकर ईरानी शासन और कुर्द लड़ाकों के बीच सालों से संघर्ष चलता आ रहा है. ईरानी सेना ने कई बार इन लड़ाकों के खिलाफ हमले किए हैं. कहा जा रहा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद ये कुर्दिश फोर्सेज फिर से एक्टिव हुई हैं. ईरान के खिलाफ कई स्टेटमेंट जारी करते हुए इन ग्रुप्स ने ईरानी सेना से पीछे हटने की भी चेतावनी दी है.
वहीं, जंग के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुर्दिश समूहों के ठिकानों पर हमले किए हैं. अब अमेरिका कुर्द लड़ाकों को ईरानी सेना के खिलाफ लड़ने के लिए हथियार सप्लाई करने का इरादा बना रहा है. हालांकि कुर्दिश गुट अमेरिका के लपेटे में आएंगे या नहीं, ये देखने वाली है.
विद्रोह भड़काने का मकसददरअसल, CNN की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के कई विरोधी समूह और कुर्दिश नेताओं के टच में है. उनसे बातचीत कर रहा है. CNN के मुताबिक प्लान से जुड़े लोगों ने उसे बताया है कि CIA कुर्दिश सेनाओं को हथियार देने के प्लान पर काम कर रही है. इसका मकसद है ईरान में एक जन विद्रोह भड़काना. ईरानी सेना को देश के अंदर ही जंग में उलझाना, जिससे वो और कमजोर हो जाए.
कुर्दिस्तान की क्षेत्रीय सेना के एक सीनियर अधिकारी का तो ये भी दावा है कि युद्ध से कई महीने पहले ही CIA ने इस प्लान पर काम शुरू कर दिया था और ईरानी कुर्दिश ग्रुप्स को सपोर्ट देना भी शुरू कर दिया था. अधिकारी ने CNN के साथ बातचीत में दावा किया कि मंगलवार, 3 मार्च को खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ ईरानी कुर्दिस्तान, शॉर्ट में कहें तो KDPI के प्रेसिडेंट मुस्तफा हिजरी से बात की थी. KDPI उन ग्रुप्स में से एक है, जिन्हें IRGC ने टारगेट किया था.
जानकारों ने चेतायाकुर्दिश अधिकारी का ये भी कहना है कि आने वाले दिनों में उनकी फोर्सेज पश्चिमी ईरान में एक ग्राउंड ऑपरेशन में हिस्सा ले सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी का कहना है, “मौजूदा जंग के हालात देखकर हमें लगता है कि हमारे पास एक बड़ा मौका है.”
कुर्दिश अधिकारी के मुताबिक उनके लड़ाकों को अमेरिका के साथ इजरायल से भी मदद मिलने की उम्मीद है. इधर, CNN ने ट्रंप प्रशासन के प्लान से वाकिफ एक सूत्र के हवाले से बताया कि अमेरिका चाहता है कि कुर्द आर्म्ड फोर्सेज ईरानी सिक्योरिटी फोर्सेज से भिड़ें और उन्हें घेर लें. ताकि बड़े शहरों में लोग फिर से इस्लामी शासन के खिलाफ विद्रोह के लिए खड़े हों और ईरानी सेना उनका दमन न करे.
यह भी पढ़ें- ईरान के 'शाहेद' ड्रोन का कोई तोड़ नहीं निकला, परेशान अमेरिका यूक्रेन के पास जा पहुंचा
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका का मानना है कि इस इलाके में अराजकता फैलाने से ईरानी सरकार के मिलिट्री रिसोर्स कम हो सकते हैं. दूसरा प्लान ये है कि कुर्द ईरान के उत्तरी हिस्से में कब्जा कर लें, जिससे इजरायल के लिए एक बफर जोन बन जाएगा.
हालांकि अमेरिका के इरादे सफल होंगे, इस पर सवालिया निशान है.
बताया जाता है कि अमेरिका ने बलूचों को ईरान की इस्लामी सरकार के खिलाफ हथियार देने का ऑफर दिया था, जिसे उन्होंने कथित तौर पर ठुकरा दिया. और रिपब्लिक ऑफ इराक की फर्स्ट लेडी शनाज इब्राहिम अहमद ने भी अमेरिका को ठेंगा दिखा दिया है. कुर्दों को ईरान के खिलाफ भड़काने के दावों के बीच शनाज इब्राहिम अहमद के कार्यालय की तरफ से एक लेटर जारी किया गया है.
'कुर्द किराये की बंदूकें नहीं हैं'
इसमें फर्स्ट लेडी के हवाले से लिखा है,
“साल 1991 में इराक के सुलेमानिया में कुर्दों से कहा गया कि वो सद्दाम हुसैन के शासन के खिलाफ उठ खड़े हों. बाद में जब हालात बदले तो हमें अकेला छोड़ दिया गया. शासन ने जब विद्रोह को कुचलने के लिए हेलिकॉप्टर, गनशिप और टैंक तैनात किए, तब हमें बचाने के लिए कोई नहीं आया. वो यादें हमारे दिमाग में एकदम ताजा हैं और गहराई से दर्ज हैं. आज हम उस चैप्टर को 'रापारिन' कहते हैं और इसने जो हमें सिखाया है, उसे हम कभी नहीं भूल सकते.”
लेटर में फर्स्ट लेडी ने आगे कहा,
“आज इराक के कुर्दों ने आखिरकार स्थिरता और गरिमा से जीने का स्वाद चख लिया है. ऐसे में कुर्दों के लिए यह काफी मुश्किल है, बल्कि असंभव है कि वो इस बात को स्वीकार कर पाएं कि वो दुनिया की महाशक्तियों के लिए मोहरों की तरह इस्तेमाल किए जाएं.”
शनाज अहमद ने आगे लिखा है कि तजुर्बे हैं और खोखले वादे भी हैं. अक्सर कुर्दों को तभी याद किया जाता है जब उनकी ताकत और बलिदान की जरूरत होती है. इसलिए हम लड़ाई में शामिल सभी पक्षों से अपील करते हैं कि कुर्दों को अकेला छोड़ दो. हम किराये की बंदूकें नहीं हैं.
वीडियो: दुनियादारी: हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबाकर अमेरिका ने भारत को उकसाया?

.webp?width=60)

