ईरान की घेराबंदी करके अमेरिका आज उससे कर रहा बातचीत, मीटिंग में उठेंगे कौन से मुद्दे?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि वो इस बातचीत में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे. दोनों देशों के बीच कई मुद्दे इस मीटिंग में रखे जाएंगे.
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ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में दूसरे दौर की बातचीत होने जा रही है. यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में आयोजित हो रही है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अपने डेलीगेशन के साथ जिनेवा पहुंच चुके हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि वो इस बातचीत में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होंगे. दोनों देशों के बीच इस मीटिंग में परमाणु कार्यक्रम के अलावा मिसाइल और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है. हालांकि ईरान के विदेश विभाग में तैनात उपमंत्री हामिद घनबरी का कहना है कि ईरान के तेल और गैस के क्षेत्र, खनन में निवेश और विमान खरीद के मुद्दे भी इस वार्ता में शामिल हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि जिनेवा पहुंच चुके हैं, जहां 17 फरवरी को दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी. अमेरिका की तरफ से मिडिल-ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता में हिस्सा लेने पहुंचेंगे. सोमवार, 16 फरवरी को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर लिखा,
बातचीत से पहले तनाव चरम पर है, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिकी सेना एक लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी कर रही है.
वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हॉर्मुज स्ट्रेट में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है. ईरान ने यह धमकी भी दी है कि अगर अमेरिकी सेना उस पर हमला करती है तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करेगा. साथ ही यह भी कहा है कि वह हमले के जवाब में हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाएंगी.
ट्रंप ने सोमवार, 16 फरवरी को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मैं उन वार्ताओं में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहूंगा. और वे बहुत महत्वपूर्ण होंगी. मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणामों को भुगतना चाहते हैं.”
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जून में अमेरिकी हमलों से पहले, अमेरिका-ईरान परमाणु बातचीत बीच में ही रुक गई थी. वाशिंगटन लंबे समय से मांग कर रहा था कि तेहरान, संवर्धन (एनरिचमेंट) को पूरी तरह छोड़ दें. ट्रंप ने B-2 बॉम्बर का जिक्र करते हुए कहा,
माना जा रहा है कि इस बातचीत में कई दिक्कतें आ सकती हैं. अमेरिका ने इस बातचीत का दायरा परमाणु कार्यक्रम से बढ़ाकर ईरान के मिसाइल भंडार जैसे मुद्दों तक बढ़ाने की कोशिश की है. जबकि ईरान का कहना है कि वह प्रतिबंधों में ढील के बदले ही अपने परमाणु कार्यक्रम पर कंट्रोल करने की कोशिश करेगा. ईरान ने यह भी कहा कि वह यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा और मिसाइल क्षमताओं पर कोई चर्चा नहीं होगी.
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