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यूपी पुलिस में मचा हंगामा, तो योगी ने की ये बड़ी कार्रवाई

सेक्स चैट से शुरू हुआ था मामला, "घूसखोरी" और पोस्टिंग पर अटकी बात

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9 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2020, 02:46 PM IST)
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कहा जा रहा है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में खुद रुचि दिखाई है, और उनके आदेशों के बाद तेज़ और सख्त कार्रवाई करने की योजना है.
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यूपी पुलिस की चर्चा रोज़ होती है. आज आई है तबादले और सस्पेंशन की नयी लिस्ट. तबादले में यूपी पुलिस के 14 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं. इसके अलावा नोएडा यानी गौतम बुद्धनगर के एसएसपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड किया गया है. यूपी में पुलिस अधिकारियों के इस बड़े और व्यापक तबादले के बारे में कहा जा रहा है कि ये इनमें से कई लोग उस लिस्ट में शामिल थे, जो नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपर मुख्य सचिव गृह, माने यूपी प्रशासन को सौंपी थी. 2020 की शुरुआत होते-होते एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कथित तौर पर नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण सेक्स चैट कर रहे थे. इसके बाद वैभव कृष्ण ने शिकायत की, और लिखा कि आरएसएस के कार्यकर्ता यूपी पुलिस के कुछ आला अधिकारियों के साथ मिलकर ट्रांसफर और पोस्टिंग का रैकेट चला रहे हैं.
क्या हुआ कब हुआ?
1 जनवरी 2020. Whatsapp पर एक व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और वीडियो चैट लीक हुआ. इस लीक में कथित तौर पर नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण एक लड़की को अपनी तस्वीरें भेज रहे थे. इस लीक की बातें अश्लील थीं. लीक वाले वीडियो में वीडियो बनाने वाला शख्स नज़र नहीं आता है. वीडियो सामने आते ही वैभव कृष्ण ने कहा कि वीडियो एडिटेड है. ये उनकी छवि को धूमिल करने के लिए किया गया प्रयास है.
नोएडा के तत्कालीन SSP वैभव कृष्ण, जिनके पत्र और चैट के बाद सारा बवाल उठा.

नॉएडा के सेक्टर 20 थाने में IT Act के सेक्शन 67 माने अश्लील सामग्री बनाने और वितरण संबंधी धारा में FIR दर्ज की गयी. इसी दिन शाम को वैभव कृष्ण ने प्रेस कांफ्रेंस की. उन्होंने कहा कि जो भी इस वीडियो को छवि धूमिल करने की नीयत से बांटेगा, उसके खिलाफ भी केस किया जाएगा. उन्होंने कहा,
"ये मेरी अपील है कि किसी तरह की आपराधिक गतिविधि को बढ़ावा न दिया जाए. गोपनीयता सभी का अधिकार है. और कोई भी मेरा morphed वीडियो कैसे प्रोड्यूस कर सकता है?"
पत्रकारों ने FIR के बारे में पूछा तो वैभव कृष्ण ने कहा कि ये उनके काम से जुड़े लोगों की साजिश है. कहा कि वीडियो में जो फोटो दिख रही है, वो मेरी है, जिसकी सहायता से वीडियो को एडिट किया गया है. अगली तारीख यानी 2 जनवरी. नॉएडा एसएसपी ने बहुत बड़ा बम गिराया. कहा कि यूपी पुलिस के कुछ अधिकारी आरएसएस के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर ट्रांसफर और पोस्टिंग का खेल कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सभी इसके लिए बहुत मोटी घूस ले रहे हैं.
वैभव कृष्ण ने प्रशासन को भेजी गोपनीय रिपोर्ट को लीक कर दिया. इसमें पांच आईपीएस अधिकारियों का नाम आया. 9 हेड कांस्टेबल और इंस्पेक्टर तक के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं. रिपोर्ट में चन्दन राय और अतुल शुक्ला का नाम लिया गया. कहा कि अतुल शुक्ला के बड़े भाई सुनील शुक्ला यूपी के सूचना विभाग में कार्यरत हैं. खुद अतुल शुक्ला Cruxa Publicity Ltd नाम से फर्म चलाते हैं, जिसका काम यूपी सरकार के कामकाज का प्रसार करना है. एसएसपी के लेटर के मुताबिक अतुल शुक्ला का संबंध संघ से है. उनके अलावा चन्दन राय का भी नाम है, जिनकी एक आईपीएस अधिकारी से बातचीत का ऑडियो सामने आया था.
कौन-से आईपीएस अधिकारियों का नाम लिया एसएसपी ने?
पहला नाम अजयपाल शर्मा, पुलिस अधीक्षक रामपुर. रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अगस्त 2019 को पत्रकारिता की आड़ में संगठित गिरोह चलाने के आरोप में 5 कथित पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, जिनमें से चार को गिरफ्तार किया गया था. जांच में पाया गया कि आईपीएस अजयपाल शर्मा इन अभियुक्तों के संपर्क में थे. चंदन राय व अजयपाल शर्मा के बीच बातचीत की दो ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिलीं, जिसमें उनकी पोस्टिंग मेरठ कराने की एवज में 80 लाख रुपये लिए जाने की बात सामने आई है. 50 प्रतिशत एडवांस और बाकी रकम एक माह के अंदर देने की बात रिपोर्ट में लिखी गई.
अजयपाल शर्मा

दूसरा नाम सुधीर सिंह, एसएसपी गाजियाबाद. रिपोर्ट में इनके सन्दर्भ में SMS का ज़िक्र आया. इसमें चन्दन राय द्वारा इंस्पेक्टर संजय वर्मा को सिहानी गेट गाजियाबाद थाने का चार्ज दिलाने के लिए सुधीर सिंह से कहने की बात थी. सिहानी गेट थाने का चार्ज देने से मना करने पर चंदन द्वारा विजय नगर थाने का चार्ज देने के लिए कहा गया. रिपोर्ट के मुताबिक सुधीर सिंह ने बात इधर-उधर न होने का हवाला देकर शाम को मिलने के लिए बुलाया था.
सुधीर सिंह

तीसरा नाम गणेश साहा, पुलिस अधीक्षक बांदा. इनके बारे में भी वैभव कृष्ण ने SMS का ज़िक्र किया. कहा कि गणेश साहा और चंदन राय की गाड़ियां निकलवाने के बदले पैसे के लेनदेन की बात हुई. साथ ही अकाउंट डीटेल और पैसे भेजने की भी बात हुई.
Ganesh Prasad Saha गणेश साहा

चौथा नाम राजीव नारायण मिश्र, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक कुशीनगर और अभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, STF, लखनऊ. इनके बारे में कहा गया कि इन्होने आपराधिक प्रवृत्ति के आरक्षी अनिल तिवारी को जनपद कुशीनगर में एक और महीने के लिए संबद्ध कराने की बात की. साथ ही राजीव नारायण मिश्र ने कई और पुलिस चौकियों और कुछ आरक्षियों के तबादले रुकवाने के संबंध में Whatsapp पर बातचीत की, ऐसा वैभव कृष्ण ने रिपोर्ट के हवाले से कहा.
Rajiv Narayan Mishra राजीव नारायण मिश्रा

और पांचवा नाम हिमांशु कुमार, पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर. इनके बारे में अतुल शुक्ला और चन्दन राय के बीच बातचीत हुई. कहा गया कि इनकी ट्रांसफर का रेट तय हो रहा था. बिजनौर के लिए 30 लाख, बरेली के लिए 40 लाख व आगरा के लिए 50 लाख रुपये का रेट तय हो रहा था.
हिमांशु कुमार

इन पांच अधिकारियों से जब मीडिया से बातचीत की तो अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने जवाब से जांच अधिकारियों को अवगत करा दिया है. लेकिन जैसे ही वैभव कृष्ण ने ये लिस्ट सार्वजनिक की, उनके सेक्स चैट का मामला, जो दबता नज़र आ रहा था, फिर से उठ गया. मामले की जांच मेरठ के एडीजी और आईजी को सौंपी गई थी. वीडियो की फोरेंसिक जांच हुई. समाचार एजेंसी UNI की मानें तो जांच में वीडियो सही पाया गया, एडिटेड नहीं.
और वैभव कृष्ण डीजीपी यूपी के निशाने पर आ गए. चूंकि वैभव कृष्ण ने गोपनीय जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की थी, तो डीजीपी ओपी सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग से जुड़े किसी भी विषय के दस्तावेज लीक करना गैरकानूनी है. इसमें सर्विस नियमों का उल्लंघन किया गया. तभी से माना जा रहा था कि वैभव कृष्ण पर जल्द कार्रवाई हो सकती है. अब अधिकारी आचरण नियमावली माने कॉनडक्ट रूल्स का उल्लंघन करने के आरोप में वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है. उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं. लखनऊ के एडीजी एसएन साबत इस केस में जांच करके जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपेगें.
बाकी ट्रांसफर्स में कौन IPS कहां गया?
अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट

अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट

हिमांशु कुमार, पहले पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर थे. अब पीएसी की 28वीं वाहिनी के कमांडेंट बनाकर इटावा भेजे गए. उनकी जगह शिवहरि मीणा को उन्नाव के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से यहां लाया गया है.
अजयपाल शर्मा, पुलिस अधीक्षक रामपुर थे. उन्हें भेज दिया गया उन्नाव के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल. उनकी जगह इटावा के एसएसपी संतोष कुमार मिश्रा को लाया गया है.
राजीव नारायण मिश्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, STF, लखनऊ. उन्हें पीएसी की 24वीं वाहिनी का कमांडेंट बनाकर मुरादाबाद भेज दिया गया.
गणेश साहा. बांदा के पुलिस अधीक्षक थे. मानवाधिकार के पुलिस अधीक्षक बनाकर लखनऊ भेज दिए गए. उनकी जगह हाथरस के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ शंकर मीणा को लाया गया है.
सुधीर सिंह, एसएसपी गाजियाबाद. अब उन्हें भेज दिया गया गया पीएसी की 15वीं वाहिनी आगरा भेज दिया गया. उनकी जगह लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी आए हैं.
आगे जांच करेगी SIT
Up Sit अब SIT करेगी जांच

15 दिन में ट्रांसफर पोस्टिंग के रैकेट की जांच होनी है. जिन अधिकारियों की जांच होनी है, उनमें इन पांच आईपीएस अधिकारीयों का नाम है. उनके अलावा मुख्य सचिव के मीडिया कार्यालय के निदेशक दिवाकर खरे, पीसीएस गुलशन कुमार और पीसीएस रजनीश का भी नाम शामिल है. और जांच के लिए प्रमुख सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने SIT का गठन किया है. अवस्थी के साथ ही अमिताभ यश, पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ़ और विकास गोठलवाल, यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक बतौर सदस्य शामिल हैं.
कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मामले में कार्रवाई करने में रुचि दिखाई है. माना जा रहा है कि बहुत तेज़ और सख्त कार्रवाई होगी. माने अब इस जिन को बोतल में वापस जाने में कुछ वक्त तो लग ही जाएगा.


लल्लनटॉप वीडियो : यूपी पुलिस ने ट्विटर पर सवाल उठा रहे पत्रकारों को ब्लॉक कर दिया!

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