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सनातन धर्म पर उदयनिधि स्टालिन के बयान ने कांग्रेस को दुविधा में डाल दिया?

कुछ कांग्रेसी उदयनिधि के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ आलोचना. ऐसे में पार्टी का स्टैंड क्या माना जाए?

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Congress On Stalin remark
क्या बंट गई कांग्रेस? (फोटो- पीटीआई)
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साकेत आनंद
5 सितंबर 2023 (अपडेटेड: 5 सितंबर 2023, 10:27 PM IST)
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर बयान के बाद कांग्रेस के नेता अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उदयनिधि ने सनातन धर्म की डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से तुलना कर कहा था कि ये सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है, इसलिए इसे मिटा देना चाहिए. भारतीय जनता पार्टी ने उदयनिधि के बयान को लेकर पूरे विपक्षी गठबंधन 'INDIA' को ही घेर लिया और माफी की मांग कर दी. इसके बाद मीडिया का एक धड़ा इसे INDIA गठबंधन में विभाजन की तरह भी पेश कर रहा है. इंडिया गठबंधन की सबसे बड़े घटक कांग्रेस में भी इस विषय को लेकर मतांतर है. कुछ कांग्रेसी उदयनिधि के बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ आलोचना.  

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने उदयनिधि के बयान का समर्थन करते हुए इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,

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इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने उदयनिधि का समर्थन किया. स्टालिन के बयान पर मीडिया से बात करते हुए प्रियंक ने कहा कि जो भी धर्म बराबरी को बढ़ावा नहीं देता और आपको मानव के तौर पर सम्मान नहीं देता, वह धर्म नहीं है. प्रियंक खरगे के मुताबिक, जो भी धर्म बराबरी का अधिकार नहीं देता है और आपके साथ इंसान जैसा व्यवहार नहीं करता है वो बीमारी से कम नहीं है.

कांग्रेस के बाकी नेताओं ने क्या कहा?

इसी विषय पर 4 सितंबर के रोज़ कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया. उन्होंने जवाब दिया, 

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दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि वे उदयनिधि के बयान का समर्थन नहीं करते हैं. मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा कि ये उनका व्यक्तिगत नजरिया हो सकता है.

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कांग्रेस के राशिद अल्वी ने भी उदयनिधि के बयान को गलत बताया. अल्वी ने समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, 

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क्या बंट गई कांग्रेस?

सनातन धर्म के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग नजरिये जाहिर होने से क्या वे बंट गए हैं? इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई से बात की. किदवई के मुताबिक, इस बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है. वो कहते हैं कि इस देश में हमेशा से ऐसा रहा है कि एक ही पार्टी के भीतर अलग-अलग सांस्कृतिक पहचान के लोग रहे हैं. ये कोई नई बात नहीं है.

किदवई के मुताबिक, 

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रशीद किदवई एक और उदाहरण भीम राव आंबेडकर का भी देते हैं. वो कहते हैं कि आज बीजेपी सहित सभी पार्टियां आंबेडकर को मानती है और उनकी तस्वीरें इस्तेमाल करती है. लेकिन हिंदू धर्म को लेकर आंबेडकर ने क्या बोला है, वो सबको पता है. फिर इसे मुद्दा बनाना ही गलत है.

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दरअसल, डॉ आंबेडकर ने अक्टूबर 1956 में हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था और इस दौरान उन्होंने 22 प्रतिज्ञाएं ली थीं. इस दौरान आंबेडकर ने साफ कहा था कि वे राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, उसमें आस्था नहीं रखेंगे और न उनकी पूजा करेंगे. ये भी कहा था कि वे ब्राह्मणों के बनाए किसी भी रीति-रिवाज के तहत हो रहे समारोह को स्वीकार नहीं करेंगे.

वीडियो: तारीख़: हिंदू धर्म छोड़ आंबेडकर ने बौद्ध धर्म क्यों अपना लिया था?

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