प्रकाश सिंह बादल के निधन पर घोषित राष्ट्रीय शोक में होता क्या है?
पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल के निधन पर केंद्र ने दो दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. जानिए किन परिस्थितियों में घोषित किया जाता है राष्ट्रीय शोक.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल का 25 अप्रैल की रात निधन हो गया. मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल में उन्होंने आखिरी सांस ली. 95 साल के प्रकाश सिंह बादल पिछले कई दिनों से हॉस्पिटल में भर्ती थे. उन्हें सांस लेने में समस्या थी. प्रकाश सिंह बादल का अंतिम संस्कार 27 अप्रैल की दोपहर में किया जाएगा. केंद्र ने उनके निधन पर दो दिन (26 और 27 अप्रैल) के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.
आइए, समझते हैं कि राष्ट्रीय शोक क्या होता है, किसके लिए होता है और इसकी घोषणा कब की जाती है.
क्या होता है राष्ट्रीय शोक?वैसे तो दुनिया के लगभग हर देश में अपनी-अपनी तरह से राष्ट्रीय शोक मनाया जाता है. इसे मनाने का कारण और प्रक्रिया भी कमोबेश एक सी ही होती है, लेकिन यहां हम खास तौर पर भारत की बात करेंगे. भारत में ‘राष्ट्रीय शोक’ पूरे राष्ट्र के दुःख को व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है. ये ‘राष्ट्रीय शोक’ किसी ‘व्यक्ति’ की मृत्यु या पुण्य तिथि पर होता है.
# फ्लैग कोड ऑफ़ इंडिया के अनुसार, राष्ट्रीय शोक के दौरान पूरे भारत में और विदेश स्थित भारतीय संस्थानों (जैसे एंबेसी आदि) में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं.
# कोई औपचारिक एवं सरकारी काम नहीं किया जाता है और इस अवधि के दौरान कोई आधिकारिक काम भी नहीं होता.
# समारोहों और आधिकारिक मनोरंजन पर भी प्रतिबंध रहता है.
# दिवंगत व्यक्ति की राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाती है.
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कारअगर नियम-कानून की बात करें, तो केवल वर्तमान और पूर्व प्रधानमंत्री, वर्तमान और पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान और पूर्व राज्यमंत्री ही इस तरह के अंतिम संस्कार के हकदार होते हैं. लेकिन समय के साथ नियम बदल गए हैं. लिखित रूप से नहीं, कार्यरूप से. अब यह राज्य सरकार के विवेकाधिकार पर है कि किसका पूरे राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा. मने, कोई निर्धारित दिशा-निर्देश नहीं हैं.
राष्ट्रीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने या तिरंगे द्वारा शव को ढकने के लिए सरकार राजनीति, साहित्य, कानून, विज्ञान और सिनेमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दिवंगत व्यक्ति द्वारा किए गए योगदान को ध्यान में रखती है. इसके लिए संबंधित राज्य का मुख्यमंत्री अपने वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों के परामर्श के बाद निर्णय लेता है.
फैसला लेने के बाद, इसे डिप्टी कमिश्नर, पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचित किया जाता है. जिससे कि राजकीय अंतिम संस्कार के लिए सभी व्यवस्थाएं हो सकें.
# राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा जाता है.
# दिवंगत हस्ती को पूर्ण सैन्य सम्मान दिया जाता है. इसमें मिलिट्री बैंड द्वारा ‘शोक संगीत’ बजाना और इसके बाद बंदूकों की सलामी देना आदि शामिल है.
# स्वतंत्र भारत में राजकीय सम्मान के साथ पहला ‘अंतिम संस्कार’ महात्मा गांधी का हुआ था.
# गैर राजनीतिज्ञों और गैर आर्मी पर्सनल्स में – मदर टेरेसा, सत्य साईं बाबा, श्रीदेवी आदि का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जा चुका है.

# ध्यान रखें कि सार्वजनिक अवकाश, राष्ट्रीय शोक और राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि तीनों अलग-अलग चीज़ें हैं. श्रीदेवी की मृत्यु के दौरान बाकी दो चीज़ें नहीं थीं, लेकिन उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था. राजकीय सम्मान के मामले में भी केवल उनका पार्थिव शरीर तिरंगे से लपेटा गया था.
# 1997 में जारी केंद्र सरकार की एक अधिसूचना के अनुसार, केवल वर्तमान प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की मृत्यु की स्थिति में सार्वजनिक अवकाश दिया जा सकता है. इसी के चलते केंद्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर आधे दिन का अवकाश घोषित किया था. लेकिन तब दिल्ली जैसे कई राज्यों ने पूरे दिन का अवकाश रखा था.
वीडियो: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को SIT ने जो समन भेजा, उसमें क्या लिखा है?

