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बिलकिस बानो केस के दोषी फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जमानत मांगने लगे, इस बार अदालत ने कहा...

दो दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 2002 के संविधान पीठ के आदेश के विरुद्ध था. तर्क ये कि सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों ने विरोधाभासी फ़ैसले दिए. इसीलिए बड़ी बेंच को मामला सौंपा जाए.

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19 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 08:22 PM IST)
bilkis bano convicts
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बिलकिस के सभी दोषी जेल में हैं.
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राधेश्याम भगवानदास और राजूभाई बाबूलाल को 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिलकिस बानो का बलात्कार करने के लिए और उनके परिवार की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था. इन दोनों ने रिहाई याचिका दायर की थी. शुक्रवार, 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी.

कब-क्या हुआ?

गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो का गैंगरेप किया गया था. उनके परिवार के सात लोगों के साथ उनकी तीन साल की बच्ची की भी पटक-पटककर हत्या कर दी गई थी. साल 2008 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

बीच में माफ़ी याचिकाएं दायर की गईं. मगर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में 2017 में सभी दोषियों की सज़ा बरक़रार रखी. सभी को पहले मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया. इसके बाद नासिक जेल में. फिर सभी को गोधरा की उप-जेल में भेज दिया गया था.

ये भी पढ़ें - बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची गुजरात सरकार, अब क्या मांग कर दी? 

15 अगस्त, 2022 को गुजरात सरकार ने अपनी ‘क्षमा नीति’ के तहत उन्हें रिहा कर दिया. इस फ़ैसले का बहुत विरोध हुआ.

8 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार का आदेश पलट दिया. सभी दोषियों को दी गई छूट को रद्द कर दिया. कहा कि पीड़िता की तक़लीफ़ समझना ज़रूरी है, अपराध का अहसास होने के लिए सज़ा दी जाती है और गुजरात सरकार ने समय से पहले ही उन्हें रिहा कर दिया था. इसीलिए 21 जनवरी तक दोषियों को सरेंडर करने का आदेश दिया गया.

इसके बाद मार्च महीने में भगवानदास और सोनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 2002 के संविधान पीठ के आदेश के विरुद्ध था. तर्क ये कि उनकी सज़ा को ग़लत तरीके से रद्द किया गया और उन्हें रिहा करने का अधिकार किसके पास है और कौन सी राज्य नीति लागू होती है, इस पर सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों ने विरोधाभासी फ़ैसले दिए. इस दलील के साथ दोषियों ने मांग की अंतिम फ़ैसले के लिए इस केस को बड़ी पीठ को सौंपा जाए. 

19 जुलाई को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने उनकी इस याचिका को ख़ारिज कर दिया. कहा,

“ये दलील क्या है? ये दलील कैसे स्वीकार्य है? पूरी तरह से ग़लत है. अनुच्छेद-32 की याचिका कैसे दायर की जा सकती है? इस केस में दो फ़ैसले हैं. दूसरे में (जनवरी, 2024 वाले फ़ैसले) पहली बेंच के फ़ैसले (मई, 2022 वाले) में विचार किया गया था… हम किसी दूसरी बेंच के आदेश पर अपील नहीं कर सकते.”

जनवरी, 2024 वाले फ़ैसले के बाद बिलकिस का बयान आया था. उन्होंने कहा था कि वो डेढ़ साल बाद मुस्कुरा पाई हैं. 

वीडियो: बिलकिस बानो के दोषियों ने जेल जाने से बचने के लिए कैसे-कैसे बहाने बनाकर मोहलत मांगी

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