इस रिसर्चर ने ग्रहों की चाल देखकर कहा था, '6 फरवरी को तेज भूकंप आएगा', और आ गया
क्या वाकई भूकंप का अनुमान लगाया जा सकता है?
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तुर्की और सीरिया में 6 फरवरी को आए भीषण भूकंप (Turkey Earthquake) से 4 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग घायल हुए हैं. दोनों देशों में लगातार मलबों से लाशें निकाली जा रही हैं. इस दर्दनाक आपदा के बीच नीदरलैंड के एक रिसर्चर का ट्वीट वायरल हो रहा है. नाम है फ्रैंक हूजरबीट्स. उन्होंने तीन दिन पहले ही इस भूकंप का पूर्वानुमान लगाया था. साथ में भूकंप की तीव्रता का भी अंदाजा लगाया था. ये पूर्वानुमान इतना सटीक निकला कि अब कई लोग इसे भविष्यवाणी भी कह रहे हैं.
क्या था अनुमान?बीती 3 फरवरी को फ्रैंक ने ट्वीट किया था कि आने वाले दिनों में इस इलाके में 7.5 तीव्रता का भूकंप आ सकता है. अब इस ट्वीट से लोग ‘हैरान’ हैं. साथ ही कई लोग ये सवाल भी करने लगे कि क्या वाकई भूकंप का अनुमान लगाया जा सकता है, क्योंकि अब तक यही माना जाता है कि इस प्राकृतिक आपदा का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता.
फ्रैंक हूजरबीट्स ने ट्वीट में एक ग्राफिकल तस्वीर भी शेयर की थी. इसमें उसी इलाके को प्वाइंट किया गया है जहां भूकंप का सबसे ज्यादा असर हुआ है. फ्रैंक ने लिखा था,
फ्रैंक नीदरलैंड्स के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता हैं. इंस्टीट्यूट का नाम है सोलर सिस्टम जियोमेट्री सर्वे (SSGEOS). इसका मुख्य रूप से काम है खगोलीय पिंडों और भूकंप से जुड़ी गतिविधियों के बीच संबंधों का अध्ययन करना.
सिर्फ ट्वीट ही नहीं, फ्रैंक का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो इस भूकंप का अनुमान लगा रहे हैं. यह वीडियो सोलर सिस्टम जियोमेट्री सर्वे ने 2 फरवरी को यूट्यूब पर अपलोड किया था. इसमें फ्रैंक बता रहे हैं कि 4 से 6 फरवरी के बीच एक तेज भूकंप की आशंका है. ये अनुमान उन्होंने ग्रहों के अलाइनमेंट के आधार पर लगाया था.
अब लोग भूकंप के इस अनुमान पर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कई लोगों ने सीधा कहा कि भूकंप का अनुमान लगाने का कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं है. जब लोगों ने सवाल उठाया तो फ्रैंक ने ट्वीट कर जवाब दिया कि हां, वैज्ञानिक समुदाय के बीच भी ग्रहों और चांद के प्रभाव वाली बात को लेकर बहुत विरोधाभास है. लेकिन इसे खारिज करने के लिए कोई पर्याप्त रिसर्च भी नहीं हैं. उन्होंने ये भी कहा, "ये महज अनुमान है."
अब तक वैज्ञानिकों का मानना है कि भूकंप का सही-सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता है. वैज्ञानिक इसके लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है. क्योंकि भूकंपीय (सिस्मिक) तरंगों में गतिविधि का पता भूकंप आने से ठीक पहले ही चलता है. वैज्ञानिक लगातार उन तरीकों को ढूंढ़ने में लगे हैं, जिससे वो सिस्मिक तरंगों में हलचल का पूर्वानुमान लगा पाएं. फिलहाल ऐसी कोई तकनीक नहीं है.
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, ना तो USGS और ना ही किसी दूसरे वैज्ञानिक ने कभी बड़े भूकंप का पूर्वानुमान लगाया है. USGS के मुताबिक ऐसा हो भी सकता है यह कहना मुश्किल है. USGS का कहना है कि जो लोग पूर्वानुमान लगाते हैं उसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. भूकंप पूरी तरह से एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है.
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