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पश्चिम बंगाल में RSS कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या का सच ये है

खून से लथपथ आदमी रोता, कराहता रहा, मगर लोग उसे फावड़े से पीटते रहे.

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21 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 21 सितंबर 2017, 10:43 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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'दौर'. अच्छे-बुरे अनुभवों का गुच्छा, जिसकी सबसे अच्छी बात ये है कि ये गुज़र जाता है. अभी हम अफवाहों के दौर में जी रहे हैं. सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर तीसरी चीज का कोई मां-बाप नहीं होता, कोई सोर्स नहीं होता. फिर भी जनता बकचोन्हरों की तरह इन्हें वायरल करती रहती है. न जाने ये दौर कब खत्म होगा. लेटेस्ट अफवाह एक बर्बर वीडियो के बारे में है, जिसे लोग ये कहकर शेयर कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में एक हिंदू को RSS कार्यकर्ता होने की वजह से मार डाला है, जबकि ऐसा नहीं है.

क्या है वीडियो में

करीब एक मिनट के इस वीडियो में खेत में दो लोग एक शख्स को डंडों से बड़ी बेरहमी से पीट रहे हैं. लहुलुहान हो चुके उस शख्स में कुछ जान बाकी है. वो इशारों में जान बख्शने के लिए कह रहा है. तभी भीड़ से आवाज़ आती है,


'मारिए न... मारिए न... ऑडर है... मारिए न... मारिए ऑडर है'

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10-12 सेकेंड का एक और वीडियो भी है, जिसमें उसी शख्स पर एक दूसरा आदमी वार कर रहा है. उल्टे फावड़े से. समझ नहीं आ रहा कि पीटा जा रहा शख्स ज़िंदा है या नहीं. ज़ोर का वार होने पर उसके शरीर (या लाश) में हरकत होती है. सब ओर खून बिखरा है. भीड़ में से कोई कह रहा है,


'तूर द... तूर द, साला के सीना तूर द...'

भोजपुरी में कही इस बात का मतलब है कि 'इसका सीना तोड़ दो'. फावड़ा चलाने वाला शख्स इस पर अमल करने लगता है.

और लोग पोस्ट में ये कह रहे हैं

इन जनाब के दोस्त ने इन्हें जो भी बताया, वो गलत है. सिर्फ इनके ही नहीं, ढेर सारे लोगों के दोस्तों ने उन्हें जो बताया, वो गलत है. इनके नमूने भी देख लीजिए.


वो फेसबुक पोस्ट, जिसे 14 हजार से ज्यादा लोगों ने शेयर किया
वो फेसबुक पोस्ट, जिसे 14 हजार से ज्यादा लोगों ने शेयर किया

जमकर शेयर किया गया है ये वीडियो. वीडियो में लोग भोजपुरी और हिंदी में बात करते सुनाई देते है, लेकिन जल्दी खत्म होने की वजह से ये पता नहीं चलता कि वीडियो कहां का है. बाकी सोशल मीडिया वाले तो हर चीज के एक्सपर्ट हैं. बता दिया कि पश्चिम बंगाल में RSS कार्यकर्ता की हत्या का वीडियो है, जिसे हिंदू होने की सजा मिली. ये वीडियो हम यहां आपको इसलिए नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि ये बेहद खौफनाक है. आप एक बार खुद को उस इंसान की जगह रखकर देखिए. आत्मा कांप जाएगी.

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इस वीडियो पर एक और अफवाह भी फैल चुकी है

कुछ महीने पहले लोगों ने यही वीडियो शेयर करते हुए इसे बिहार के मुज़फ्फरपुर में यादवों के हाथ एक भूमिहार की लिंचिंग का मामला बताया था. मरने वाले को मुज़फ्फरपुर के सरैया प्रखंड के बहिलवारा भुआल चौर गांव का रामानुज साही (कुछ जगह शाही भी लिखा है) बताया गया. कहा गया कि पुलिस उसे बचा नहीं पाई. क्लिप में सुनाई दे रहे 'ऊपर से ऑडर' के आधार पर बिहार सरकार पर भी सवाल उठे. देखिए.

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कुछ लोग जाति वाले एंगल को एक कदम आगे ले जाकर कहने लगे कि अब बिहार में भूमिहार होना गुनाह हो गया है. उनके साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ कोई खड़ा नहीं होता. पोस्ट्स के नीचे लोगों ने भी जमकर कयासबाज़ी भी की. एक यूज़र ने इस मामले से संबंधित पुलिस अफसर के धर्म को बहस में घसीट लिया. इनके मुताबिक पिट रहे शख्स को मारने का ऑडर देने वाला थाना प्रभारी मुस्लिम था. 'मुस्लिम' शब्द का उल्लेख हमारे यहां बिना वजह नहीं किया जाता.

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तो क्या है इसकी सच्चाई

अधूरी जानकारी हमारी राष्ट्रीय समस्या है, लेकिन ये अधूरापन खतरनाक है. इस बार की अफवाह तो कोरी है. पिछली अफवाह में मरने वाले का नाम और घटना की जगह सही बताई गई है. पुलिस के नाकामयाब होने की बात भी कुछ हद तक सही है. लेकिन ये छिपा दिया गया कि भीड़ रामानुज शाही की जान के पीछे पड़ी क्यों थी.

पूरी बात ये है कि 30 जुलाई 2017 को रामानुज शाही और उसके एक साथी रंजीत ने मुजफ्फरपुर में ही पड़ने वाले रघुनाथपुर गांव के सरपंच इंद्रदेव महतो के बेटे अनिल कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी. सुबह जब ये अपने घर लौटे, ग्रामीणों ने जैतपुर पुलिस को खबर कर दी. जब पुलिस इन्हें पकड़ने आई, तब इन्होंने एक गाड़ी में भागने की कोशिश की. भागते-भागते ये छितरी गांव में एक ऐसी जगह पहुंचे, जहां सड़क खत्म हो गई.

ये फिर गाड़ी छोड़कर खेतों के रास्ते भागे. इस बीच पुलिस के साथ गांव वाले भी इनका पीछा करने लगे. चारों तरफ से खुद को घिरा देखकर रंजीत ने सरेंडर कर दिया. गांववालों ने उसकी धुनाई करके उसे पुलिस के हवाले कर दिया, लेकिन रामानुज भागता रहा. जब उसका पीछा कर रही भीड़ बढ़ गई, तो उसने अपने कट्टे से हवाई फायर किए. इस बीच एक गोली नितेश कुमार नाम के एक लड़के के सीने में लग गई. इसके बाद भीड़ आपे से बाहर हो गई. भीड़ ने रामानुज को घेर लिया और जो हाथ लगा, उससे पीटने लगे. फेसबुक पर शेयर हो रहे वीडियो इसी दौरान के हैं. रामानुज को बचाया नहीं जा सका.

इस खबर को एक अगस्त को मीडिया ने कवर भी किया थाः

दैनिक भास्कर (मुजफ्फरपुर संस्करण)

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दैनिक जागरण (वेबसाइट)

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काफी देर बाद जाकर रामानुज की लाश को पुलिस वहां से उठाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज पाई. भीड़ का गुस्सा इतना था कि रंजीत को थाने ले जा रही जीप का भी का भी पीछा किया गया. पुलिस किसी तरह उसे लेकर थाने पहुंची. रंजीत और दोनों के पास से 7.62 बोर के दो पिस्टल, लोडेड मैगजीन, एक लोडेड कट्टा व नौ गोली बरामद हुईं.


तो आपने देखा कि कैसे एक वीभत्स वीडियो का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है. कैसे लोग इस पर रिएक्ट कर रहे हैं और कैसे ये समाज में रहने लोगों को एक-दूसरे को शक की निगाह से देखने के लिए मजबूर रहा है. इस प्रोपोगेंडा का मोहरा न बनें. बुद्धि इस्तेमाल करें. विवेक से काम लें. अपने समाज और देश, जिस पर इतना गर्व करते हैं, उसे रहने के लिए एक अच्छी जगह बनाएं.



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