क्या शीला दीक्षित ने आतंकवाद पर मनमोहन की बुराई और मोदी की तारीफ की?
शीला दीक्षित ने कहा कि मोदी की आतंकविरोधी कार्रवाइयां राजनीतिक फायदे के लिए हैं.
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फोटो - thelallantop
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कई ऐसी खबरें चलीं कि शीला दीक्षित ने आतंकवाद पर मोदी को मनमोहन से ज्यादा कड़ा बताया है. लेकिन खुद इस इंटरव्यू को लेने वाले पत्रकार वीर सांघवी ने इसे गलत बताया है. वीर सांघवी ने ये इंटरव्यू CNN न्यूज़ 18 के लिए लिया है. इस हफ्ते के अंत में पूरा इंटरव्यू ब्रॉडकास्ट होगा.
अभी वीडियो का एक छोटा हिस्सा उपलब्ध है. इस हिस्से में वीर सांघवी से बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा कि नरेंद्र मोदी की तुलना में मनमोहन सिंह ने आतंकवाद से लड़ने में सख्ती नहीं दिखाई. हालांकि शीला दीक्षित ने जवाब में यह भी कहा कि मोदी की आतंकविरोधी कार्रवाइयां राजनीतिक फायदे के लिए हैं.
शीला दीक्षित से पूछा गया कि 26/11 के आतंकी हमलों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की कार्रवाई पर वह क्या सोचती हैं, तो शीला दीक्षित ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद से लड़ाई में मनमोहन सिंह ने मौजूदा प्रधानमंत्री जितनी सख्ती नहीं दिखाई है.
26 नवम्बर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे. तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने नवम्बर ख़त्म होते-होते सैन्य कार्रवाई की घोषणा भी की थी, लेकिन ऐसा होता देखा नहीं गया. इस तथ्य पर ही शीला दीक्षित का हालिया बयान आया है.

शीला दीक्षित बता रही हैं कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है.
इस बयान के सामने आते ही हल्ला शुरू हुआ तो समाचार एजेंसी एएनआई से शीला दीक्षित ने कहा कि यदि कोई बात बिना सन्दर्भ के प्रसारित हो रही है, तो इस पर मैं कुछ नहीं कह सकती हूं.
शीला दीक्षित ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष साफ़ करते हुए कुछ ट्वीट भी किए हैं. वीर सांघवी ने शीला दीक्षित के ट्वीट्स को रीट्वीट करते हुए लिखा,
वीर सांघवी का ट्वीट
वीर सांघवी ने बातचीत में सवाल किया कि मोदी कहते हैं कि इन आतंकविरोधी कार्रवाइयों का मतलब है कि दुश्मन के घर में घुसकर सबक सिखाना, इसके जवाब में शीला दीक्षित ने उलटा सवाल किया कि क्या कोई ऐसा भी समय था कि जब देश की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया हो?
शीला दीक्षित की तरह कांग्रेस ने भी नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. भाजपा के कई नेताओं ने विंग कमांडर अभिनंदन और अन्य सैनिकों की तस्वीरों का इस्तेमाल अपने पोस्टरों पर किया है, जिसके खिलाफ चुनाव आयोग ने कार्रवाई के भी आदेश जारी कर दिए.
हालांकि यह पहला मौक़ा नहीं है जब शीला दीक्षित ने कांग्रेस की ही आलोचना की हो. इसके पहले भी कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हुए घोटालों और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन पर कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर शीला दीक्षित ने अपनी चिंता ज़ाहिर की थी.
वीडियो: फैक्ट चेक - क्या अशोक गहलोत ने कुंभलगढ़ फोर्ट में मुस्लिम धर्म सम्मेलन की इजाजत दी?
अभी वीडियो का एक छोटा हिस्सा उपलब्ध है. इस हिस्से में वीर सांघवी से बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा कि नरेंद्र मोदी की तुलना में मनमोहन सिंह ने आतंकवाद से लड़ने में सख्ती नहीं दिखाई. हालांकि शीला दीक्षित ने जवाब में यह भी कहा कि मोदी की आतंकविरोधी कार्रवाइयां राजनीतिक फायदे के लिए हैं.
शीला दीक्षित से पूछा गया कि 26/11 के आतंकी हमलों के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार की कार्रवाई पर वह क्या सोचती हैं, तो शीला दीक्षित ने कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद से लड़ाई में मनमोहन सिंह ने मौजूदा प्रधानमंत्री जितनी सख्ती नहीं दिखाई है.
26 नवम्बर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे. तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने नवम्बर ख़त्म होते-होते सैन्य कार्रवाई की घोषणा भी की थी, लेकिन ऐसा होता देखा नहीं गया. इस तथ्य पर ही शीला दीक्षित का हालिया बयान आया है.

शीला दीक्षित बता रही हैं कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है.
इस बयान के सामने आते ही हल्ला शुरू हुआ तो समाचार एजेंसी एएनआई से शीला दीक्षित ने कहा कि यदि कोई बात बिना सन्दर्भ के प्रसारित हो रही है, तो इस पर मैं कुछ नहीं कह सकती हूं.
शीला दीक्षित ने इस पूरे मामले पर अपना पक्ष साफ़ करते हुए कुछ ट्वीट भी किए हैं. वीर सांघवी ने शीला दीक्षित के ट्वीट्स को रीट्वीट करते हुए लिखा,
वह सही कह रही हैं. किसी बात को संदर्भ से अलग करके, तोड़-मरोड़ के नहीं देखना चाहिए. आप इस हफ्ते के अंत में पूरा इंटरव्यू देख सकते हैं.

वीर सांघवी का ट्वीट
वीर सांघवी ने बातचीत में सवाल किया कि मोदी कहते हैं कि इन आतंकविरोधी कार्रवाइयों का मतलब है कि दुश्मन के घर में घुसकर सबक सिखाना, इसके जवाब में शीला दीक्षित ने उलटा सवाल किया कि क्या कोई ऐसा भी समय था कि जब देश की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया हो?
शीला दीक्षित की तरह कांग्रेस ने भी नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. भाजपा के कई नेताओं ने विंग कमांडर अभिनंदन और अन्य सैनिकों की तस्वीरों का इस्तेमाल अपने पोस्टरों पर किया है, जिसके खिलाफ चुनाव आयोग ने कार्रवाई के भी आदेश जारी कर दिए.
हालांकि यह पहला मौक़ा नहीं है जब शीला दीक्षित ने कांग्रेस की ही आलोचना की हो. इसके पहले भी कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान हुए घोटालों और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन पर कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर शीला दीक्षित ने अपनी चिंता ज़ाहिर की थी.
वीडियो: फैक्ट चेक - क्या अशोक गहलोत ने कुंभलगढ़ फोर्ट में मुस्लिम धर्म सम्मेलन की इजाजत दी?

