त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में 10 हजार से अधिक शिक्षक अपने परिवार के साथ धरने परबैठे हैं. इन शिक्षकों को त्रिपुरा हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद नौकरी से निकालदिया गया था. सितंबर 2020 में मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने इन्हें दिसंबर तक वैकल्पिकनौकरी देने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. जिसके बाद अब ये टीचरधरने पर बैठे हैं. क्यों निकाला गया नौकरी से? राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आएशिक्षक और उनके परिवार के लोग अगरतला के सिटी सेंटर पर इकट्ठा हुए और यहीं धरने परबैठ गए. ये शिक्षक चाहते हैं कि सरकार अपना वादा पूरा करे और इस मसले का स्थायी हलनिकाले. मसला क्या है? मसला ये है कि 2014 में त्रिपुरा हाई कोर्ट ने 10,323शिक्षकों की नियुक्ति ये कहते हुए रद्द कर दी थी कि इनकी भर्ती गलत तरीके से हुईहै. इन टीचर्स की नियुक्ति अलग-अलग भर्तियों के जरिए हुई थी. इनमें ग्रेजुएट,अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट लेवल के टीचर शामिल हैं.From today we Joint movement committee 10323 teachers started our sit indemonstration program at City centre Agartala with demand of permanent jobsolutions. We request the state government @BjpBiplab to solve our matterimmediately. @psanta32 @GautamDebbarma6 @depankar2017 pic.twitter.com/SJha5vdHnU— Justice For 10323 Teachers (@Justice10323) December 7, 2020 हाई कोर्ट के फैसलेके खिलाफ नौकरी से निकाले गए टीचर्स सुप्रीम कोर्ट गए. 2017 में सुप्रीम कोर्ट काफैसला आया. यहां से भी इन टीचर्स को झटका मिला और सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा. राज्य सरकार ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की और करीब 8000टीचर्स को 31 मार्च 2020 तक ऐड हॉक पर बेसिस पर रखा. 31 मार्च के बाद फिर से येटीचर बेरोजगार हो गए. राज्य सरकार क्या कर रही? धरने पर बैठे टीचर्स का कहना है किउन्हें पहले की लेफ्ट सरकार और अब की बीजेपी सरकार दोनों ने धोखा दिया है. धरने मेंशामिल दलिया दास ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, हमारा छह लोगों का एक प्रतिनिधिमंडलइस साल सितंबर में मुख्यमंत्री बिप्लब देब से मिला था. जहां उन्होंने दो महीने केअंदर इस मसले का स्थायी समाधान निकालने का आश्वासन दिया था. दो महीने बीत चुके हैंलेकिन अब तक स्थायी समाधान को लेकर एक कदम भी नहीं उठाया गया है. हमारी नौकरी खत्महुए नौ महीने हो चुके हैं. हमारे सामने अपनी जीविका चलाने की चुनौती है. हम इस मसलेका स्थायी समाधान चाहते हैं. यही वजह है कि हम अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. इससाल सितंबर में राज्य कैबिनेट ने नौकरी से निकाले गए टीचर्स को ग्रुप C के नॉनटेक्निकल पदों के लिए निकाली गई भर्ती में अवसर देने को मंजूरी दी थी. इसके अलावासभी बर्खास्त शिक्षकों को 31 मार्च 2023 तक आयु में छूट को भी मंजूरी दी गई थी. उससमय राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि नौकरी से निकाले गए शिक्षकों को वैकल्पिकरोजगार देने के लिए चरणबद्ध तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं.