थाईलैंड की अदालत ने प्रधानमंत्री शिनावात्रा को बर्खास्त किया, एक कॉल ने छीना पद
Thai Court Dismisses PM: इस फैसले का मतलब है कि अब पैतोंगटार्न शिनावात्रा तुरंत अपना पद खो देंगी, जो उन्होंने लगभग एक साल तक संभाली थी. इससे पहले, पैतोंगटार्न को उनके कर्तव्यों से सस्पेंड कर दिया गया था. उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने उनकी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं.

थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने पैतोंगटार्न शिनावात्रा को प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है. अदालत ने कहा कि देश की नेता के रूप में उन्होंने कंबोडिया के सीनेट अध्यक्ष हुन सेन के साथ फोन पर जो बातचीत की, उसमें उन्होंने ‘नैतिकता को लेकर संवैधानिक नियमों का उल्लंघन’ किया.
इस फैसले का मतलब है कि अब पैतोंगटार्न शिनावात्रा तुरंत अपना पद खो देंगी, जो उन्होंने लगभग एक साल तक संभाली थी. 1 जुलाई को जब अदालत ने उनके खिलाफ मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई तब पैतोंगटार्न को उनके कर्तव्यों से सस्पेंड कर दिया गया था. उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने उनकी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं.
फैसले पर पैतोंगटार्न शिनावात्रा की भी प्रतिक्रिया आई है. बीबीसी की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा,
सबसे पहले मैं न्याय प्रणाली के प्रति पूरे सम्मान के साथ अदालत के फैसले को स्वीकार करती हूं. लेकिन एक थाई व्यक्ति के रूप में मैं अपनी ईमानदारी पर भी जोर दूंगी.
पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने कहा कि इस फैसले के केंद्र में हुन सेन के साथ फोन पर हुई बातचीत थी. लेकिन इस कॉल में उन्होंने व्यक्तिगत लाभ की कोई मांग नहीं की थी. शिनावात्रा की दलील है कि इस लीक हुई बातचीत का मकसद सीमा पर तनाव को कम करना था.
क्या है मामला?वैसे तो कंबोडिया और थाईलैंड के बीच दशकों से सीमा विवाद चल रहा है. लेकिन इस मामले की जड़ें कुछ महीने की एक घटना से जुड़ी हैं. 28 मई, 2025 को सीमावर्ती क्षेत्र में एक सैन्य झड़प हुई, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई. इसके विरोध में कंबोडिया ने थाईलैंड पर कई प्रतिबंध लगाए.
तनाव की इस स्थिति के बीच पैतोंगटार्न शिनावात्रा और हुन सेन की बातचीत हुई. आलोचकों का कहना है कि शिनावात्रा इस कॉल में हुन सेन को ‘अंकल’ कहकर संबोधित कर रही हैं और बिना जरूरत के अतिरिक्त सम्मान दे रही हैं. साथ ही, वो सीमा विवाद संभालने वाले अपने ही एक सैन्य कमांडर की आलोचना कर रही हैं.
कॉल पर उन्होंने हुन सेन से ये भी कहा, ‘अगर आपको कुछ कहना हो, तो सीधे मुझे बताएं, मैं उसका ख्याल रखूंगी.’ थाईलैंड की अब तक की सबसे युवा प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने अपने बचाव में कहा कि ये उनके नेगोशिएशन का तरीका था.
लेकिन उनके परिवार और कंबोडिया में शासन कर रहे हुन परिवार के पुराने रिश्तों के कारण, वो संदेह के घेरे में आ गईं. दरअसल, हुन सेन को शिनावात्रा का पारिवारिक मित्र माना जाता है. थाई प्रधानमंत्री के पिता थाकसिन शिनावात्रा और हुन सेन लंबे समय से एक दूसरे के सहयोगी रहे हैं. दोनों एक-दूसरे को ‘गॉडब्रदर्स’ कहते हैं.
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