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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के राज्यपाल से क्यों कहा, "आप आग से खेल रहे हैं"

पंजाब सरकार ने राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

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10 नवंबर 2023 (पब्लिश्ड: 11:30 PM IST)
Supreme Court Raps Punjab Governor
पंजाब सरकार ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी. (फाइल फोटो: PTI)
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंजाब और तमिलनाडु की विधानसभा से पारित कई विधेयकों पर राज्यपाल की मंजूरी में देरी पर चिंता जाहिर की है. पंजाब और तमिलनाडु की सरकार ने अपने-अपने राज्यपालों के खिलाफ शिकायत की थी कि उन्होंने विधानसभा से पास हो चुके विधेयकों को रोक रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मुद्दों को गंभीर चिंता का विषय बताया है. पंजाब सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ( Banwarilal Purohit) को उनके पास भेजे गए विधेयकों पर फैसला लेने के लिए कहा है. वहीं तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन रवि के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख दी है.  

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पंजाब का पूरा मामला क्या है?

जून और अक्टूबर महीने में पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था. जून में बुलाए गए सत्र के दौरान चार विधेयक पारित किए गए थे. राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने बुलाए गए विशेष सत्र को अवैध बताते हुए विधेयकों पर अपनी मंजूरी नहीं दी थी. इसके खिलाफ पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.  

पंजाब सरकार ने शिकायत की थी कि राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने विधानसभा के विशेष सत्र में पारित हुए विधेयकों को रोक रखा है. वहीं राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने कहा था कि विधानसभा के जिस सत्र में विधेयक पारित हुए, वो अमान्य है. पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वो जून और अक्टूबर में बुलाए गए विधान सभा सत्र को वैध करार दे.

इस मामले पर 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणियां कीं. इस बेंच में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा थे. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल विधानसभा सत्र की वैधता पर संदेह जता दें, इसका संवैधानिक आधार नहीं मिलता है. 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा,

“सदन के सत्र की वैधता पर संदेह व्यक्त करना राज्यपाल के लिए कोई संवैधानिक विकल्प नहीं है. विधानसभा में विधायिका के विधिवत निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं. विधानसभा के सत्र पर संदेह करने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के लिए खतरा होगा.”

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से बुलाए गए विशेष विधानसभा सत्र को वैध बताते हुए कहा,

"हमारा विचार है कि पंजाब के राज्यपाल को अब विधेयकों पर इस आधार पर निर्णय लेना चाहिए कि 19-20 जून 2023 को हुई सदन की बैठक संवैधानिक रूप से वैध थी."

CJI बोले- 'आप आग से खेल रहे…'

CJI डी.वाई चंद्रचूड़ ने पंजाब के राज्यपाल के लिए टिप्पणी की,

“आप यह कैसे कह सकते हैं कि जो विधेयक पारित हो चुका है उस पर सहमति नहीं दी जा सकती क्योंकि सत्र अमान्य है? आप जो कर रहे हैं उसकी गंभीरता का एहसास है? आप आग से खेल रहे हैं. राज्यपाल ऐसा कैसे कह सकते हैं... ये विधेयक निर्वाचित सदस्यों ने पारित किए.”

कोर्ट ने ये भी कहा,

"यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि लोकतंत्र के संसदीय स्वरूप में, वास्तविक शक्ति जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होती है... राज्यपाल, राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त व्यक्ति के रूप में, राज्य का नाममात्र प्रमुख होता है."

तमिलनाडु का मामला क्या है?

तमिलनाडु सरकार ने भी राज्यपाल आर.एन रवि के खिलाफ ऐसे ही अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर रखी है. तमिलनाडु सरकार की शिकायत है कि राज्यपाल ने  12 विधेयकों पर अपनी सहमति रोक रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने 10 नवंबर को तमिलनाडु के मसले पर भी चिंता जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के पास 12 विधेयक लंबित हैं. इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से लिए गए कई फैसले भी राज्यपाल के पास पेंडिंग हैं.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, 

''ये मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं.''

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है. साथ ही, मदद के लिए भारत के अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल को मौजूद होने के लिए कहा है. 

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