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एक केस लड़ने का लाखों लेते हैं SC के वकील? राम मंदिर केस लड़ने वाले वकील ने क्या बताया?

दुष्यंत दवे ने महंगी फीस लेने का बचाव भी किया लेकिन कहा कि वे खुश होंगे अगर इस पर कैप लगेगी.

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15 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 15 जुलाई 2023, 04:37 PM IST)
Dushyant Dave Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुष्यंत दवे (फाइल फोटो)
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जितनी महंगी फीस, उतने सफल लॉयर. वकीलों की जमात के बारे में ये कहावत खूब चलती है. इंटरनेट पर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक लिस्ट भी दिख जाएगी कि फलां वकील एक सुनवाई के लिए लाखों फीस लेते हैं. उनमें दुष्यंत दवे का भी नाम रहता है कि 5 लाख से 10 लाख रुपये लेते हैं. इस बार दी लल्लनटॉप के खास प्रोग्राम 'गेस्ट इन द न्यूजरूम' में मेहमान थे सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील दुष्यंत दवे. जज लोया की मौत की जांच का मामला हो या अयोध्या विवाद या फिर कृषि कानूनों के खिलाफ केस लड़ने का, दुष्यंत दवे ऐसे कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट में ब्लैक एंड वाइट ड्रेस पहनकर पहुंच चुके हैं.

दुष्यंत दवे तीन बार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्होंने वकीलों की महंगी फीस लेने का बचाव किया और कहा कि उन्हें अपने हिसाब से चार्ज करने का अधिकार है. दवे ने फीस के सवाल पर बताया, 

"आज मैं साल में कम से कम 100 केस फ्री लड़ता हूं. सैलरी पाने वाले लोग, जैसे टीचर्स, डॉक्टर्स, जज, वकील और NGOs, ट्रस्ट को चार्ज नहीं करता हूं. पत्रकार से फीस लेने को लेकर तो सवाल ही नहीं उठता है. आर्म्ड फोर्सेस के किसी व्यक्ति से 45 साल के करियर में फीस नहीं लिया."

"जो पैसे दे सकते हैं, उनसे रहमी नहीं"

दवे ने ये भी कहा कि वकीलों की फीस का कोई मापदंड नहीं है. लेकिन जहां मदद की जरूरत होती है, जरूर करता हूं. दवे के मुताबिक, जहां लगता है कि क्लाइंट पैसे दे सकते हैं तो रहमी नहीं दिखाता हूं. अपनी जो फीस होती है, वो लेता हूं. ये फीस मैं चेक से ही लेता हूं. मेरे पिता ने बताया कि कभी कानून से खिलवाड़ नहीं करना है.

दुष्यंत दवे ने अपनी फीस बताने से इनकार करते हुए कहा, 

"फीस बातचीत का कोई मुद्दा नहीं है. क्या आप किसी कंपनी को बोल सकते हैं कि आप सर्फ इतनी कीमत पर क्यों बेच रहे हैं? संसद में आप बोल सकते हैं कि आप सांसद को इतनी तनख्वाह और सुविधाएं दे रहे हैं? वे खुद को इतनी सुविधाएं द रहे हैं."

दवे के मुताबिक, समाजवाद एक आदर्श विचारधारा है. लेकिन ये फेल हो गई. साम्यवाद बुरी तरह से फेल हो गया. पूंजीवाद एकमात्र राजनीतिक विचारधारा है जो बच पाया है. क्योंकि समाजवाद और साम्यवाद किसी के व्यक्तिगत पहल को मार देता है. इंसान की सबसे बड़ी उपलब्धि धन का आविष्कार करना है.

"महंगी फीस का कोई मतलब नहीं"

उन्होंने आगे यह भी कहा, 

"मुझे खुशी होगी अगर किसी कानून के जरिये हमारी फीस पर कैप लगेगी. कि इस सीमा के बाद आप फीस नहीं लेंगे. मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो इससे खुश होगा. लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता है तो हम ऐसी ऊटपटांग फीस लेते रहेंगे. मैं भी ऐसी फीस लेता हूं. इसमें कोई शक नहीं है कि इतनी फीस का कोई मतलब नहीं है."

दुष्यंत दवे 'प्रो बोनो' केस लड़ने के लिए भी जाने जाते हैं. 'प्रो बोनो पब्लिको' एक लैटिन वाक्य है जिसका अर्थ होता है "लोगों की भलाई के लिए". कानूनी क्षेत्र में, 'प्रो बोनो' का अर्थ उन कानूनी सेवाओं से है जो लोगों की भलाई के लिए या तो मुफ्त में या कम शुल्क पर दी जाती हैं. दुष्यंत दवे के साथ हुई पूरी बातचीत को देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

वीडियो: गेस्ट इन द न्यूज़रूम: सुप्रीम कोर्ट में ध्रुवीकरण, जस्टिस लोया, अयोध्या केस पर क्या बता गए एडवोकेट दुष्यंत दवे?

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