हरियाणा सरकार के घूंघट वाले ऐड का सबसे कर्रा जवाब इस न्यूज़ एंकर ने दिया है
आज के दौर में कितने टीवी चैनल वाले सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत रखते हैं?
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फोटो - thelallantop
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एक होता है जवाब देना. एक होता है जवाब चिपका देना. ये चिपकाना गोंद वाला नहीं है, वो वाला है जैसे थप्पड़ चिपकता है. हरियाणा सरकार ने अपनी मैगज़ीन में जो 'घूंघट वाला ऐड' छापा था, उसका जवाब एक न्यूज़ एंकर ने चिपका दिया है.
घूंघट वाला ऐड माने क्या?
हर सरकार की तरह हरियाणा सरकार को भी ऐसी ढेर सारी मैगज़ीन छापने का शौक है जिन्हें जाने कौन पढ़ता है. इनमें से ही एक मैगज़ीन है कृषि संवाद. हर महीने की एक आती है. ऐसे इसकी बिक्री का रिकॉर्ड क्या था, हम नहीं जानते. लेकिन जून के आखिर में जो कॉपी आई उसकी खूब पूछ हुई. काहे कि इसमें सरकार ने एक ऐड छापा थाः

सरकार की मैगज़ीन में सरकार का ऐड.

प्रतिमा दत्ता (फोटोःट्विटर)
प्रतिमा एसटीवी न्यूज़ की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं. बुलेटिन की शुरुआत में प्रतिमा ने कहा कि उन्होंने घूंघट हरियाणा सरकार के ऐड का विरोध करने के लिए लिया है. जनता का रिपोर्टर को प्रतिमा ने बताया कि वो हरियाणा सरकार के 'घूंघट ओढ़ने के हुक्म' के खिलाफ हैं. सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कैंपेन का क्या मतलब जब उसे हमारे सिर पर घूंघट के सिवा कुछ नहीं चाहिए.
प्रतिमा के अलावा हरियाणा के विपक्ष ने भी सरकार की आलोचना की. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तुरंत गिनवा दिया कि कल्पना चावला और मानुषी छिल्लर (जो इस बार मिस इंडिया वर्ल्ड बनीं) हरियाणा से हैं और उन्हीं की तरह कई और औरतें भी हैं जिन्होंने हर फील्ड में हरियाणा का नाम रोशन किया है. ये बात शायद उन्होंने ऐड वाली औरत के सिर पर रखी टोकरी को देखकर कहा.
रणदीप सिंह सुरजेवाला हरियाणा सरकार की 'रूढ़ीवादी सोच' की भर्तसना में एक कदम और आगे गए. उन्होंने कहा दिया कि घूंघट तो कभी हरियाणा की संस्कृति का हिस्सा रहा ही नहीं. ये प्रथा तब शुरू हुई जब हरियाणा में 'विदेशी हमलावरों' के हमले शुरू हुए. साउथ में देखिए, वहां कोई 'परदा सिस्टम' नहीं है. हरियाणा सरकार ने औरतों का 'ऑब्जेक्टिफिकेशन' कर दिया है.
एक्शन-रिएक्शन-कवर अप अपनी जगह हैं. इस पर बहस हो, और होती रहे यही सही है. हम बस इतना जानते हैं कि विरोध का सबसे कूल तरीका वही है जो मानुषी का है.
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घूंघट वाला ऐड माने क्या?
हर सरकार की तरह हरियाणा सरकार को भी ऐसी ढेर सारी मैगज़ीन छापने का शौक है जिन्हें जाने कौन पढ़ता है. इनमें से ही एक मैगज़ीन है कृषि संवाद. हर महीने की एक आती है. ऐसे इसकी बिक्री का रिकॉर्ड क्या था, हम नहीं जानते. लेकिन जून के आखिर में जो कॉपी आई उसकी खूब पूछ हुई. काहे कि इसमें सरकार ने एक ऐड छापा थाः

सरकार की मैगज़ीन में सरकार का ऐड.
एक्शन
ऐड में लिखा है- 'घूंघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान.' ऐड देखकर सामान्य मानवी को यही समझ आया कि सरकार कह रही है कि घूंघट हरियाणा की संस्कृति का हिस्सा है और घूंघट लेकर घर का काम करती औरतें हरियाणा की एक मुकम्मल तस्वीर.रिएक्शन
हर बात फेस वैल्यू पर नहीं ली जाती. लोग संकेत भी पढ़ना चाहते हैं. तो अगर सरकार के इस ऐड में कोई हरियाणा सरकार की औरतों को लेकर पिछड़ी सोच को देखा. राजनेताओं ने अपनी बयानबाज़ी की. लेकिन इस एड को सबसे कूल तरीके से जवाब चिपकाया गया 29 जून को. इस दिन STV Haryana News की एंकर प्रतिमा दत्ता ने घूंघट लेकर अपना न्यूज़ बुलेटिन पढ़ा.
प्रतिमा दत्ता (फोटोःट्विटर)
प्रतिमा एसटीवी न्यूज़ की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं. बुलेटिन की शुरुआत में प्रतिमा ने कहा कि उन्होंने घूंघट हरियाणा सरकार के ऐड का विरोध करने के लिए लिया है. जनता का रिपोर्टर को प्रतिमा ने बताया कि वो हरियाणा सरकार के 'घूंघट ओढ़ने के हुक्म' के खिलाफ हैं. सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे कैंपेन का क्या मतलब जब उसे हमारे सिर पर घूंघट के सिवा कुछ नहीं चाहिए.
प्रतिमा के अलावा हरियाणा के विपक्ष ने भी सरकार की आलोचना की. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तुरंत गिनवा दिया कि कल्पना चावला और मानुषी छिल्लर (जो इस बार मिस इंडिया वर्ल्ड बनीं) हरियाणा से हैं और उन्हीं की तरह कई और औरतें भी हैं जिन्होंने हर फील्ड में हरियाणा का नाम रोशन किया है. ये बात शायद उन्होंने ऐड वाली औरत के सिर पर रखी टोकरी को देखकर कहा.
रणदीप सिंह सुरजेवाला हरियाणा सरकार की 'रूढ़ीवादी सोच' की भर्तसना में एक कदम और आगे गए. उन्होंने कहा दिया कि घूंघट तो कभी हरियाणा की संस्कृति का हिस्सा रहा ही नहीं. ये प्रथा तब शुरू हुई जब हरियाणा में 'विदेशी हमलावरों' के हमले शुरू हुए. साउथ में देखिए, वहां कोई 'परदा सिस्टम' नहीं है. हरियाणा सरकार ने औरतों का 'ऑब्जेक्टिफिकेशन' कर दिया है.
कवर-अप
जब बात ऐसे फिसलने लगी तो हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज बचाव में आगे आए और कहा कि भैया हम कहां कह रहे हैं कि घूंघट लो. ऐड में वही दिखाया है जो हरियाणा का कल्चर है, ये बुर्के वाला मामला नहीं है. हम तो खुद वीमेन एम्पावरमेंट में मानने वाली सरकार हैं. हरियाणा का सेक्स रेशो भी 862 से 950 पर आ गया है.एक्शन-रिएक्शन-कवर अप अपनी जगह हैं. इस पर बहस हो, और होती रहे यही सही है. हम बस इतना जानते हैं कि विरोध का सबसे कूल तरीका वही है जो मानुषी का है.
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