होर्मुज से अब पैसा दिए बिना निकलने की कोई सोच भी नहीं सकता, ईरान ने ऐसा ठोस काम कर दिया
Strait of Hormuz: जहां से दुनिया की बड़ी ऑयल सप्लाई गुजरती है, वहां के लिए ईरानी संसद ने नियम तय कर दिए हैं. इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं बल्कि पूरी ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ सकता है.

मिडिल ईस्ट में टेंशन बढ़ रही है और अब गेम में एंट्री हुई है दुनिया के सबसे ज़रूरी ऑयल रूट स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की. ईरान ने साफ कर दिया है कि अब यहां से गुजरने वाले जहाजों को टोल देना पड़ेगा. साथ ही यूएस-इजरायल के जहाजों के लिए यहां नो एंट्री रहेगी. यानी जहां से दुनिया की बड़ी ऑयल सप्लाई गुजरती है, वहां के लिए ईरानी संसद ने नियम तय कर दिए हैं. इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं बल्कि पूरी ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ सकता है.
30 मार्च को ईरान की एक संसदीय समिति ने एक नया मैनेजमेंट प्लान पास किया है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस लेकर जाता है. लेकिन अब कॉन्फ्लिक्ट की वजह से ईरान ने यहां रेस्ट्रिक्शन लगा दिए हैं. ये जानकारी ईरान के सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने दी है.
इस प्लान में ईरान ने बिल्कुल क्लियर कर दिया है कि यूएस और इजरायल के जहाजों के लिए नो एंट्री है. साथ ही ईरान ने ये भी कहा कि इस पूरे एरिया पर उसका अधिकार है. यानी यहां के नियम ईरान ही तय करेगा. प्लान में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की सिक्योरिटी को और मजबूत करना, जहाजों की सिक्योरिटी के लिए नए प्रोटोकॉल, एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन के उपाय और ईरानी करेंसी यानी रियाल में टोल सिस्टम लागू करना शामिल है.
इसके अलावा आगे की प्लानिंग भी चल रही है. ओमान के साथ मिलकर एक प्रॉपर लीगल फ्रेमवर्क बनाने की बात हो रही है, ताकि ये सिस्टम ऑफिशियली स्ट्रॉंग बन जाए. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज अकेले ईरान का नहीं है. इसका एक किनारा ईरान के पास है, तो दूसरा ओमान के पास है. इसलिए रूल्स अकेले तय करने के बाद भी लीगल नहीं माने जाएंगे. प्लान के मुताबिक़, जिन देशों ने ईरान पर एक तरफ़ा सैंक्शन लगाए हैं, उनके जहाजों को भी इस रूट से गुजरने से रोका जा सकता है.
इससे पहले US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में होर्मुज को कंट्रोल करने की बात कही थी. स्कॉट ने कहा था कि यूनाइटेड स्टेट्स होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से कंट्रोल करने जा रहा है, जिससे आखिरकार नेविगेशन की आजादी होगी. उन्होंने कहा था कि US या तो अमेरिकन एस्कॉर्ट्स या मल्टीनेशनल एस्कॉर्ट इसपर कंट्रोल कर लेगा क्योंकि ये रास्ता काफी अहम और यहां से ज्यादा से ज्यादा जहाज गुजरते हैं.
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US-इजरायल ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने कुछ जहाजों से इनफॉर्मली फीस मांगना शुरू कर दिया था. जिसके तहत एक जहाज से 20 लाख डॉलर यानी करीब 17 करोड़ रुपए तक की मांग की गई थी. जिसे कानूनी रूप देने की कोशिश चल रही थी. और अब ईरान की संसद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर टोल वसूलने को ऑफिशियली परमीशन दे दी है.
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