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फर्रुखाबाद के बौद्ध तीर्थ क्षेत्र में मंदिर से भगवा झंडा उतारने और उसके बाद के बवाल की पूरी कहानी

यहां बौद्ध धर्मी और सनातन धर्मी के बीच की तनातनी की वजह क्या है?

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संकिसा बौद्ध तीर्थ क्षेत्र में स्थित विवादित स्थल पर भगवा झंडा उतारकर पंचशील ध्वज फहराने को लेकर विवाद हो गया. (वीडियो का स्क्रीनशॉर्ट)
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डेविड
21 अक्तूबर 2021 (Updated: 21 अक्तूबर 2021, 12:16 PM IST)
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उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला. बुधवार 20 अक्टूबर को यहां के एक बौद्ध तीर्थ क्षेत्र में बवाल हो गया. कुछ अराजक तत्वों ने यहां के एक मंदिर पर लगा भगवा झंडा उतारकर वहां पंचशील ध्वज फहरा दिया. जिस जगह पर मंदिर बना है, उसे लेकर बौद्ध और सनातन धर्मियों के अपने-अपने दावे हैं. इसी वजह से इसे विवादित स्थल माना जाता है. बुधवार के वाकये के बाद ये विवाद फिर उभर आया. दोनों समूहों की ओर से पथराव भी हुआ था, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए. बाद में प्रशासन ने माहौल शांत कराया. इस मामले में दोनों ओर से FIR दर्ज कराई गई है. हालांकि विवाद बुधवार को ही खत्म हो गया और इलाके में अब शांति है. क्या है मामला? आजतक से जुड़े फिरोज खान की रिपोर्ट के मुताबिक, फर्रुखाबाद जिले में संकिसा बौद्ध तीर्थ क्षेत्र है. ये एक टूरिस्ट प्लेस भी है, जो पुरातत्व विभाग के अंडर में है. यहां एक बौद्ध स्तूप है. बौद्ध अनुयायियों की मान्यता के मुताबिक यहीं भगवान बुद्ध का स्वर्गावतरण हुआ था. वहीं सनातन धर्मियों का दावा है कि धार्मिक स्थल पर मां बिसारी देवी का प्राचीन मंदिर है. यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित है. धार्मिक स्थल पर अपने-अपने दावे को लेकर बौद्ध और सनातन धर्मावलम्बियों के बीच लंबे समय से अदालत में मुकदमा भी चल रहा है. शरद पूर्णिमा पर हर साल बौद्ध धर्म के लोगों का यहां एक कार्यक्रम होता है. बुधवार 20 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का दूसरा दिन था. सुबह 8 बजे एक धम्म यात्रा निकल रही थी. आरोप है कि कुछ लोग बिसारी देवी के मंदिर में पहुंच गए. वहां जो भगवा ध्वज लहरा रहा था, उसे उन्होंने उतार दिया. इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ. दोनों गुटों ने एक-दूसरे के खिलाफ पथराव किया. कुछ लोगों को चोटें आईं. कुछ गाड़ियों को नुकसान पहुंचा. इस सबका पता चला तो पुलिस मौके पर पहुंची. तब जाकर मामला शांत हुआ. प्रशासन का क्या कहना है? फिरोजखान की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रकरण को लेकर फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया,
यहां पिछले कई सालों से मेला लगता है. लेकिन इस बार मेले की अनुमति नहीं थी. संख्या भी उतनी नहीं थी, जितनी पहले हुआ करती थी. लेकिन अचानक दोनों पक्षों के बीच में कुछ इस तरह की बात हो गई कि जो यहां पर टीला है, जिसे पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किया गया है, उसे थोड़ा बहुत नुकसान पहुंचाया गया. इस कारण थोड़ा तनाव हुआ. पत्थर भी चले. फिलहाल सब ठीक है. जो करीब दो-तीन हजार मेलार्थी आए थे, वे सभी जा चुके हैं. कुछ लोगों को पत्थर लगने से चोटें आई हैं जिनका इलाज चल रहा है. एडीएम और एएसपी इस पूरे प्रकरण की जांच करेंगे. जो मंदिर में डैमेज हुआ है उसको ठीक करा लिया जाएगा.
वहीं पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने बताया.
आज यहां पर जो मेला लगता है उसमें बौद्ध धर्म और सनातन धर्म दोनों ही लोग आते हैं. सुबह के टाइम पर थोड़ी भीड़ थी. टीले के ऊपर दोनों तरफ के लोगों की आस्था का स्थान है. इसे लेकर विवाद हुआ. फोर्स बुलाकर विवाद को शांत कराया गया. दोनों पक्षों को समझाया गया. एडीएम और एएसपी की टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
वहीं एडवोकेट अविनाश दीक्षित ने आजतक को बताया कि बौद्ध धर्मी और सनातन धर्मी के बीच का ये विवाद काफी पुराना है. उन्होंने कहा,
विवाद लगभग 30-40 साल से तैयार किया गया है. संकिसा राजा जनक के भाई केशव की राजधानी थी. उस संकिसा में बिसारी देवी मंदिर को अब वो स्तूप बताने लगे. यहां बिसारी देवी का मंदिर है, जिसका जिक्र वाल्मिकी रामायण में भी है. ये तो हो गई त्रेता युग की बात. दूसरी, गजेटियर ऑफ इंडिया, आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तीन सर्वे ऐसे हैं जिनमें बिसारी देवी मंदिर का जिक्र है. ये कोर्ट में भी दाखिल हैं. एक में ये बताया गया है कि बौद्ध टीला बिसारी देवी मंदिर से 200 मीटर दक्षिण की तरफ है. आज भी है. उसे बुद्ध टीला कहा जाता है.
अविनाश दीक्षित का कहना है कि विवाद करने के लिए कुछ षड्यंत्रकारी लोग प्रोपैडेंगा फैला रहे हैं. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा- भाजपा के शासन में ही इस तरह की स्थिति क्यों बनती है?

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