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बांग्लादेश में भारत-पाक युद्ध से जुड़ी ऐतिहासिक मूर्तियों को किसने तोड़ा?

1971 शहीद मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में बनी मूर्तियां बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारत-पाकिस्तान युद्ध के समाप्त होने का प्रतीक हैं. टूटी प्रतिमा की फोटो शेयर करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वो इस तरह की घटनाएं देखकर दुखी हैं.

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12 अगस्त 2024 (पब्लिश्ड: 04:43 PM IST)
Statue of Pakistan 1971 surrender vandalised in Bangladesh Shashi Tharoor reacts
1971 में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद इस कॉम्प्लेक्स को बनाया गया था. (फोटो- X)
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बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंसा रोकने की कोशिशें जारी हैं. हालांकि अब तक सरकार को इसमें खास कामयाबी नहीं मिली है. अल्पसंख्यकों को बड़ी संख्या में सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं. इस बीच 1971 शहीद मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में एक मूर्तिकला को तोड़ दिया गया है. इसमें 1971 युद्ध के उस मोमेंट को मूर्तियों की शक्ल दी गई थी जब हजारों पाकिस्तानी सैनिकों ने एक साथ भारतीय सेना के आगे सरेंडर किया था. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस घटना पर कड़ा विरोध करते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘भारत विरोधी’ बताया है.

इंडिया टुडे से जुड़ीं शारंगी दत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक 1971 शहीद मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में बनी मूर्तियां बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारत-पाकिस्तान युद्ध के समाप्त होने का प्रतीक हैं. टूटी प्रतिमा की फोटो शेयर करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वो इस तरह की घटनाएं देखकर दुखी हैं. उन्होंने X पर लिखा,

“मुजीबनगर स्थित 1971 के शहीद मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में भारत विरोधी उपद्रवियों द्वारा तोड़ी गई मूर्तियों की ऐसी तस्वीरें देखकर दुख हुआ. ये भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, मंदिरों और कई स्थानों पर हिंदू घरों पर अपमानजनक हमलों के बाद हुआ है. जबकि ऐसी भी खबरें आई हैं कि मुस्लिम नागरिक अन्य अल्पसंख्यक घरों और पूजा स्थलों की रक्षा कर रहे हैं.”

थरूर ने आगे लिखा कि अल्पसंख्यकों पर हमले कुछ आंदोलनकारियों के एजेंडे को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं. उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस से आग्रह किया कि वो हर धर्म के हित में देश में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाएं. कांग्रेस नेता ने ये भी लिखा कि भारत इस कठिन समय में बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ा है, लेकिन इस तरह की अराजक गतिविधियों को कभी भी माफ नहीं किया जा सकता.

हसीना को शरण देने से नाराजगी!

शेख हसीना को शरण देने को लेकर बांग्लादेश की BNP पार्टी के नेताओं ने भारत सरकार को घेरा था. प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण देने पर उनकी सबसे बड़ी विरोधी नेता खालिदा जिया की पार्टी ने भारत के लिए बयान जारी किया था. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता खांडेकर मोशर्रफ हुसैन ने कहा कि हसीना को शरण देने पर भारत के लिए बांग्लादेश से प्रतिकूल प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार आगे चलकर अवामी लीग का समर्थन नहीं करेगी. 

खांडेकर मोशर्रफ हुसैन ने कहा,

“शेख हसीना को भारत में शरण मिलने का असर स्वाभाविक है. उदाहरण के लिए, अगर मैं आपको पसंद नहीं करता और कोई तीसरा व्यक्ति आपका समर्थन कर रहा है तो स्वाभाविक रूप से मेरे मन में उस व्यक्ति के लिए भी नापसंदगी होगी. प्रतिकूल प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक है.”

वहीं BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने इंडिया टुडे को बताया कि भारत को केवल बांग्लादेश की एक पार्टी के साथ संबंध नहीं रखना चाहिए. शेख हसीना को शरण देने से पहले भारत को सोचना चाहिए, इससे लोगों के आपसी रिश्ते प्रभावित होंगे.

वीडियो: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर क्या बोले इस्कॉन के पुजारी

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