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तमिलनाडु, पंजाब और इन राज्यों ने बर्बाद कर डाली इतनी सारी वैक्सीन डोज

पीएम मोदी के कहने के बाद भी नहीं सुधरे.

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एक तरफ जहां कोरोना वैक्सीन के लिए मारामारी मची हुई है, वहीं राजस्थान में वैक्सीन की बर्बादी के आरोप लग रहे हैं. ( प्रतीकात्मक फ़ोटो- Pixabay)
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दुष्यंत कुमार
20 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 20 अप्रैल 2021, 12:42 PM IST)
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कोरोना वायरस की दूसरी लहर और इससे निपटने के लिए किए जा रहे उपाय सुर्खियां बने हुए हैं. वायरस इसलिए चर्चा में है, क्योंकि इसके संक्रमण का दायरा हर नए दिन के साथ और ज्यादा बढ़ता जा रहा है. और इसे नियंत्रण में करने के उपाय इसलिए खबर बनते हैं, क्योंकि वे पर्याप्त नहीं दिखते. केंद्र और राज्य सरकारें अपनी ओर से तमाम प्रयास कर रही हैं. लेकिन इन प्रयासों की भी अपनी कई समस्याएं हैं. अब जैसे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को ही देख लीजिए. इस अभियान के लिए वैक्सीनों की कमी पहले से महसूस की जा ही थी. और जो वैक्सीन उपलब्ध हैं, उनकी बर्बादी ने सरकारों की मुश्किल और बढ़ा रखी है. एक नई जानकारी की मानें तो अब तक लाखों वैक्सीन डोज वेस्ट किए जा चुके हैं.
Covid Vaccine
कोरोना संकट से निपटने में वैक्सीन का रोल सबसे अहम है.
RTI से मिली जानकारी सूचना का अधिकार यानी RTI के जरिये मिली जानकारी के मुताबिक, देश के कई राज्यों में बहुत बड़ी संख्या में कोरोना वैक्सीनों की बर्बादी हुई है. RTI में पूछे गए सवालों के जवाब में सरकार ने बताया कि बीती 11 अप्रैल तक देशभर में 10 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन इस्तेमाल की गई थीं. इनमें से 44 लाख से भी ज्यादा टीके बर्बाद हो गए. जिन राज्यों में सबसे अधिक वैक्सीन बर्बाद हुईं, उनमें तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, मणिपुर और तेलंगाना सबसे आगे हैं. तमिलनाडु टॉपर सबसे ज्यादा वैक्सीन वेस्ट करने वाले राज्यों में तमिलनाडु ने टॉप किया है. एनडीटीवी ने इस RTI के हवाले से बताया है कि दक्षिण राज्य में सबसे ज्यादा कोविड-19 वैक्सीन बर्बाद हुई हैं. यहां 11 अप्रैल तक कुल वेस्टेड वैक्सीन का 12.10 प्रतिशत यानी 5 लाख 28 हजार से भी ज्यादा डोज बर्बाद हो गए. इसके बाद नंबर आता है हरियाणा का. यहां कुल वेस्टेड वैक्सीन का 9.74 प्रतिशत व्यर्थ हो गया. यानी 4 लाख 28 हजार के आसपास. इसी तरह पंजाब में 3 लाख 57 हजार, मणिपुर में 3 लाख 43 हजार और तेलंगाना में 3 लाख 32 हजार से ज्यादा वैक्सीन वेस्ट हो गईं.
वहीं, ऐसे राज्य भी हैं जहां वैक्सीन वेस्टेज प्रतिशत जीरो है. यानी वहां बिल्कुल भी वैक्सीन बर्बाद नहीं हुई हैं. RTI के मुताबिक, केरल, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, गोवा, दमन और दीव, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप में वैक्सीन वेस्टेज पर्सेंटेज शून्य है.
Covid Vaccine (2)
(फोटो- PTI)
केंद्र सरकार ने कई बार किया है आगाह ये जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब हाल के दिनों में पीएम नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्रालय कई बार वैक्सीन की बर्बादी को लेकर राज्यों को आगाह कर चुके हैं. पीएम मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि राज्यों को वैक्सीन कम से कम वेस्ट करनी चाहिए. वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय कह चुका है, राज्यों को मिलने वाले वैक्सीन डोज वैक्सीनेशन के मामले में उनके परफॉर्मेंस पर निर्भर करेंगे. यानी जिन राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी कम से कम होगी, उन्हें टीके मिलने में ज्यादा आसानी होगी.
इस सिलसिले में सोमवार (19 अप्रैल) को स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी किया था. इसमें उसने कहा था कि भारत सरकार एक क्राइटेरिया के तहत अपने हिस्से से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वैक्सीन ऐलोकेट करेगी. जहां संक्रमण पहले से ज्यादा होगा (यानी एक्टिव कोविड मामले अधिक होंगे) और जहां वैक्सीनेशन तेजी से होगा, वहां वैक्सीन दी जाएंगी. इस क्राइटेरिया में वैक्सीन की बर्बादी को लेकर भी विचार किया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि वैक्सीन बर्बाद होने पर ये क्राइटेरिया नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है. यानी कि डोज वेस्ट करने वाले राज्यों की वैक्सीन सप्लाई में बदलाव किया जा सकता है. इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना था,
राज्य को मिलने वाला (वैक्सीन) कोटा इस क्राइटेरिया के आधार पर तय किया जाएगा और अन्य राज्यों को इस बारे में एडवांस में सूचित किया जाएगा.
Pm Modi Covid Vaccine
वैक्सीन वेस्टेज को लेक आगाह कर चुके हैं पीएम मोदी.

चलते-चलते बता दें कि केंद्र सरकार ने अब 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को कोरोना का टीका लगाने का फैसला किया है. सोमवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक के बाद ये बड़ा फैसला लिया गया. इसके मुताबिक, आगामी 1 मई से कोरोना वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरुआत होगी. इसमें 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को शामिल किया जाएगा. साथ ही 45 साल के ऊपर वाले लोगों के लिए चल रहा वैक्सीनेशन अभियान भी जारी रहेगा. एक अन्य अहम फैसले के तहत अब वैक्सीन निर्माता कंपनियां खुले बाजार में और राज्य सरकारों को पहले से तय कीमत पर सीधे टीके बेच सकेंगीं. राज्य सरकारें कई दिनों से इसकी मांग कर रही थीं.

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