मुहर्रम के चबूतरे पर विवाद, संघ कार्यकर्ता पर मुस्लिम बुजुर्ग को पीट-पीटकर मार डालने का आरोप
पुलिस ने कहा- आरोपी शाखा संचालक बच्चों को चबूतरा तोड़ने के लिए भड़काया करता था.
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मृतक मुहम्मद अनवर
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भारत का ऊर्जांचल कहे जाने वाले सोनभद्र से संघ के शाखा संचालक की शह में एक मुस्लिम व्यक्ति को पीट-पीटकर मार डालने की खबर सामने आ रही है. होलिका दहन की रात सोनभद्र के पारसोई गांव में 60 वर्षीय मुहम्मद अनवर को भीड़ ने लाठी-डंडे, फावड़े और कुल्हाड़ी से पीट-पीटकर मार डाला. मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार समेत पुलिस ने 19 नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. खबर लिखे जाने तक पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया है. इस घटना के बाद से दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया है. इसके मद्देनज़र पूरे गांव और आसपास के इलाकों में पुलिस और पीएसी की तैनाती कर दी गयी है.

घटना के बाद पारसोई गांव में तफ्तीश में जुटी पुलिस
सोनभद्र के ओबरा थाने के पारसोई गांव में बीते कुछ दिनों से एक चबूतरे को लेकर विवाद चल रहा था. इस चबूतरे का मुहर्रम से संबंध है. मृतक मुहम्मद अनवर के घर के पास ईमाम चौक है जिस पर यह चबूतरा बना हुआ है. गांव के लोगों की मानें तो इस चबूतरे पर बीते 20 सालों से मुहर्रम के दिन ताजिये रखे जाते हैं और तलवार-डंडों का खेल खेला जाता है.
पूरे आयोजन या चबूतरे को लेकर कभी कोई विवाद सामने नहीं आया था. मृतक के परिजनों के मुताबिक़ मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार ने छह महीनों पहले इसी इमाम चौक के पास संघ की शाखा का संचालन शुरू किया. उसके बाद से रवीन्द्र खरवार और उसके सहयोगियों ने इस चबूतरे पर कब्जा जमाने की बहुत कोशिशें कीं. रवीन्द्र खरवार की इस कोशिश को लेकर फरवरी के शुरुआती हफ्ते में दोनों समुदायों के बीच विवाद भी हुआ था. इस विवाद को तब पुलिस की दखल से शांत कराया गया.
लेकिन होलिका दहन यानी बुधवार 20 मार्च की आधी रात कुछ लोग लोहे की छड़ और फावड़ों के साथ इस चबूतरे को तोड़ने की कोशिश करने लगे. मौके पर मुहम्मद अनवर ईमाम चौक पर पहुंचे और उपद्रवियों को रोकने का प्रयास करने लगे. लेकिन कहासुनी बढ़ गयी और अनवर को मौके पर ही भयानक रूप से पीटने के बाद कुल्हाड़ी से काट दिया गया. अनवर को उनके बेटे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
इसके बाद सभी आरोपी घटनास्थल से भाग निकले. मृतक मुहम्मद अनवर के बेटे मोहम्मद हसनैन ने फ़ौरन पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद एसपी सोनभद्र सलमानताज पाटिल के साथ-साथ और भी कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. मोहम्मद हसनैन ने "द लल्लनटॉप" से बातचीत में बताया कि इस चबूतरे को लेकर पहले भी विवाद हो चुका था. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने उस समय मामले को गंभीरता से लिया होता तो आज ये नौबत नहीं आई होती.

मृतक अनवर के बेटे मोहम्मद हसनैन
इस मामले में सोनभद्र पुलिस ने ओबरा थाने के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 295 और 302 के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने अपनी एफआईआर में लिखा है कि मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार संघ की शाखा चलाता था. और यह भी कि शाखा के दौरान वह बच्चों को उस चबूतरे के खिलाफ भड़काया करता था.

एफआईआर की प्रति जिसमें पुलिस ने लिखा है कि आरोपी संघ की शाखा चलाता था और बच्चों को चबूतरे के खिलाफ भड़काया करता था
मृतक के बड़े भाई नईम गाजीपुरी ने बातचीत में बताया कि आरोपी रवीन्द्र खरवार पहले अपनी शाखा गांव के मिडिल स्कूल में लगाता था. बाद में वह शाखा ईमाम चौक के पास आ गयी. नईम ने बताया कि रवीन्द्र खरवार की मंशा चबूतरे को तोड़कर उस जगह पर कब्जा करने की थी. मृतक मोहम्मद अनवर एक दिन पहले ही अजमेर शरीफ से तिजारत करके आए थे. जिस रात यह घटना घटी, अनवर खाना खाने के बाद घर के बाहर टहल रहे थे. तभी अनवर ने शाखा संचालक रवीन्द्र खरवार और उनके सहयोगियों को चबूतरे को तोड़ते देखा. कहासुनी बढ़ी तो मृतक के मुंह पर गमछा लपेट कर उस पर हमला किया गया, जिसके बाद मुहम्मद अनवर की मौत हो गयी.

अनवर के बड़े भाई नईम गाजीपुरी
मुहम्मद अनवर के बड़े पुत्र ऐनुलहक़ "द लल्लनटॉप" से बताते हैं -
हमसे बातचीत में सोनभद्र पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल ने बताया -
सोनभद्र पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल
पुलिस के मुताबिक़ मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है. पाटिल ने बताया -
जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रवीन्द्र खरवार और मुस्लिम समुदाय के बीच का यह मामला सोनभद्र जिले के लिए नया है. ज्यादातर आदिवासी जनसंख्या वाले जनपद सोनभद्र में इस तरह के सामुदायिक टकराव की घटना पहले कभी सामने नहीं आई. पारसोई गांव के ही सुनील कुमार प्रजापति बताते हैं -
वीडियो: बीजेपी ने उम्मीद्वारों की लिस्ट में स्मृति ईरानी के नाम के साथ पहले पारसी लिखा, बाद में हटाया

घटना के बाद पारसोई गांव में तफ्तीश में जुटी पुलिस
सोनभद्र के ओबरा थाने के पारसोई गांव में बीते कुछ दिनों से एक चबूतरे को लेकर विवाद चल रहा था. इस चबूतरे का मुहर्रम से संबंध है. मृतक मुहम्मद अनवर के घर के पास ईमाम चौक है जिस पर यह चबूतरा बना हुआ है. गांव के लोगों की मानें तो इस चबूतरे पर बीते 20 सालों से मुहर्रम के दिन ताजिये रखे जाते हैं और तलवार-डंडों का खेल खेला जाता है.
पूरे आयोजन या चबूतरे को लेकर कभी कोई विवाद सामने नहीं आया था. मृतक के परिजनों के मुताबिक़ मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार ने छह महीनों पहले इसी इमाम चौक के पास संघ की शाखा का संचालन शुरू किया. उसके बाद से रवीन्द्र खरवार और उसके सहयोगियों ने इस चबूतरे पर कब्जा जमाने की बहुत कोशिशें कीं. रवीन्द्र खरवार की इस कोशिश को लेकर फरवरी के शुरुआती हफ्ते में दोनों समुदायों के बीच विवाद भी हुआ था. इस विवाद को तब पुलिस की दखल से शांत कराया गया.
लेकिन होलिका दहन यानी बुधवार 20 मार्च की आधी रात कुछ लोग लोहे की छड़ और फावड़ों के साथ इस चबूतरे को तोड़ने की कोशिश करने लगे. मौके पर मुहम्मद अनवर ईमाम चौक पर पहुंचे और उपद्रवियों को रोकने का प्रयास करने लगे. लेकिन कहासुनी बढ़ गयी और अनवर को मौके पर ही भयानक रूप से पीटने के बाद कुल्हाड़ी से काट दिया गया. अनवर को उनके बेटे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
इसके बाद सभी आरोपी घटनास्थल से भाग निकले. मृतक मुहम्मद अनवर के बेटे मोहम्मद हसनैन ने फ़ौरन पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद एसपी सोनभद्र सलमानताज पाटिल के साथ-साथ और भी कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए. मोहम्मद हसनैन ने "द लल्लनटॉप" से बातचीत में बताया कि इस चबूतरे को लेकर पहले भी विवाद हो चुका था. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने उस समय मामले को गंभीरता से लिया होता तो आज ये नौबत नहीं आई होती.

मृतक अनवर के बेटे मोहम्मद हसनैन
इस मामले में सोनभद्र पुलिस ने ओबरा थाने के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 295 और 302 के तहत मामला दर्ज किया है. पुलिस ने अपनी एफआईआर में लिखा है कि मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार संघ की शाखा चलाता था. और यह भी कि शाखा के दौरान वह बच्चों को उस चबूतरे के खिलाफ भड़काया करता था.

एफआईआर की प्रति जिसमें पुलिस ने लिखा है कि आरोपी संघ की शाखा चलाता था और बच्चों को चबूतरे के खिलाफ भड़काया करता था
मृतक के बड़े भाई नईम गाजीपुरी ने बातचीत में बताया कि आरोपी रवीन्द्र खरवार पहले अपनी शाखा गांव के मिडिल स्कूल में लगाता था. बाद में वह शाखा ईमाम चौक के पास आ गयी. नईम ने बताया कि रवीन्द्र खरवार की मंशा चबूतरे को तोड़कर उस जगह पर कब्जा करने की थी. मृतक मोहम्मद अनवर एक दिन पहले ही अजमेर शरीफ से तिजारत करके आए थे. जिस रात यह घटना घटी, अनवर खाना खाने के बाद घर के बाहर टहल रहे थे. तभी अनवर ने शाखा संचालक रवीन्द्र खरवार और उनके सहयोगियों को चबूतरे को तोड़ते देखा. कहासुनी बढ़ी तो मृतक के मुंह पर गमछा लपेट कर उस पर हमला किया गया, जिसके बाद मुहम्मद अनवर की मौत हो गयी.

अनवर के बड़े भाई नईम गाजीपुरी
मुहम्मद अनवर के बड़े पुत्र ऐनुलहक़ "द लल्लनटॉप" से बताते हैं -
"पुलिस को पहले अपना काम करना चाहिए था. इसके पहले भी दो बार जब भी तनाव हुआ तो पुलिस ने हर बार हमसे ही शांत रहने-हल्ला न मचाने की अपील की. पुलिस ने दूसरे पक्ष पर पुख्ता कार्रवाई नहीं की. अगर उस समय पुलिस ऐसा करती तो आज मेरे अब्बू शायद ज़िंदा होते."फरवरी महीने में भी जब ईमाम चौक को लेकर दोनों पक्षों में तनाव हुआ था तो भी रवीन्द्र खरवार आरोपों के घेरे में था. उस दौरान पुलिस ने 107/16 के तहत मामला दर्ज किया था. गांववालों को समझा-बुझाकर शांत किया था, लेकिन कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं हो सकी थी.
हमसे बातचीत में सोनभद्र पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल ने बताया -
"इस मामले में कुल आठ लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिन्हें आज अदालत में पेश किया जाएगा. प्राथमिक जांच में अभी तक हमें यही पता चल सका है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा चलाने वाले रवीन्द्र खरवार ने ही सारी घटना को अंजाम दिया है."

सोनभद्र पुलिस अधीक्षक सलमानताज पाटिल
पुलिस के मुताबिक़ मुख्य आरोपी रवीन्द्र खरवार की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो सकी है. पाटिल ने बताया -
"रवीन्द्र खरवार अभी तक फरार है. हमारी जानकारी के मुताबिक़ खरवार ने यह कोशिश की कि घटना के दिन वह गांव में अपनी गैर-मौजूदगी दिखा सके लेकिन असल में वह मौजूद था."सूत्रों के मुताबिक़ मुख्य आरोपी खरवार गिरफ्तारी से बचने के लिए बनारस के किसी अस्पताल में खुद भर्ती हो गया है. हालांकि इस तथ्य की पुष्टि होना अभी बाकी है.
जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रवीन्द्र खरवार और मुस्लिम समुदाय के बीच का यह मामला सोनभद्र जिले के लिए नया है. ज्यादातर आदिवासी जनसंख्या वाले जनपद सोनभद्र में इस तरह के सामुदायिक टकराव की घटना पहले कभी सामने नहीं आई. पारसोई गांव के ही सुनील कुमार प्रजापति बताते हैं -
"इसके पहले मुहर्रम हो या दिवाली, सब मिलकर रहते थे और त्यौहार मनाते थे. लेकिन बीते छः महीनों से धीरे-धीरे ईमाम चौक को लेकर तनाव हो रहा था. अब तो होलिका दहन के दिन इस तनाव में एक निर्दोष की जान भी चली गयी."
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