सोनम वांगचुक 170 दिन बाद जेल से छूटे, सरकार ने NSA के तहत गिरफ्तारी रद्द कर दी
Sonam Wangchuk को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था. अब केंद्र सरकार ने उनकी गिरफ्तारी को खत्म करने का फैसला लिया है.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 170 दिन तक जेल में रहने के बाद शनिवार, 14 मार्च को रिहा हो गए. केंद्र सरकार ने उनकी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हुई हिरासत को रद्द कर दिया. गृह मंत्रालय के मुताबिक, वांगचुक NSA के तहत तय हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय काट चुके हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने उनकी हिरासत खत्म करने का फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी करके इसकी जानकारी दी है.
रातनाडा पुलिस स्टेशन के एसएचओ दिनेश लखावत ने बताया कि केंद्र सरकार के आदेश के बाद वांगचुक को शनिवार, 14 मार्च की दोपहर करीब 1:30 बजे जेल से रिहा कर दिया गया. उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो कागजी कार्रवाईयों को पूरा करने के लिए मौजूद थीं.
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था. ये आदेश लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया था. सरकार का कहना था कि ये कदम इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था. दरअसल, 24 सितंबर 2025 को लेह में हालात बिगड़ गए थे. उस दिन हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. इसके बाद, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हिंसा के पीछे सोनम वांगचुक का हाथ था.
सरकार का आरोपसरकार की तरफ से आरोप लगाया गया कि वांगचुक ने ही लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था. सरकार का ये भी कहना था कि NSA के तहत गिरफ्तारी में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उन्हें हिरासत में लेने के बाद हालात शांत हो गए. गृह मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने बताया कि पिछले कुछ समय से लद्दाख के अलग-अलग समूहों और समुदाय के नेताओं से बातचीत की जा रही है, ताकि इलाके के लोगों की मांगों और चिंताओं को समझा जा सके.
हालांकि, सरकार ने ये भी कहा कि लगातार बंद और विरोध-प्रदर्शन की वजह से इलाके के माहौल पर असर पड़ा है. इसका असर छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, कारोबारियों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटकों और पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. बयान में कहा गया कि सरकार का लक्ष्य लद्दाख में शांति, स्थिरता और भरोसे का माहौल बनाना है, ताकि सभी पक्षों के साथ बैठकर सार्थक बातचीत की जा सके.
सरकार ने कहा कि लद्दाख के लिए जरूरी सुरक्षा और व्यवस्थाएं देने को वह प्रतिबद्ध है. साथ ही उम्मीद जताई कि इलाके से जुड़े मुद्दों का हल हाई-लेवल कमेटी और दूसरे मंचों पर बातचीत के जरिए निकाला जा सकेगा.
सोनम वांगचुक काफी समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और उसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल मार्च में उन्होंने इसी मांग को लेकर 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी. इसके बाद अक्टूबर 2024 में वांगचुक ने लद्दाख से दिल्ली तक पैदल मार्च भी शुरू किया था. हालांकि दिल्ली पहुंचने से पहले ही सिंघु बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था.
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फिर साल 2025 में उन्होंने एक बार फिर 35 दिन की भूख हड़ताल शुरू की. लेकिन इस आंदोलन के 15वें दिन, 24 सितंबर को लेह में हालात बिगड़ गए और प्रदर्शन हिंसक हो गया. इस दौरान 4 लोगों की मौत हुई और करीब 50 लोग घायल हो गए.
साल 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था. उस समय लद्दाख के कई लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया था, क्योंकि वे लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से अलग प्रशासन की मांग कर रहे थे.
वीडियो: पुलिस ने सोनम वांगचुक के किस भाषण का थंबनेल दिखाया था?

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