हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडानी पर शरद पवार का बयान राहुल गांधी समेत पूरे विपक्ष को हिला देगा
कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष अडानी मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगा है. लेकिन शरद पवार की राय कुछ और है.

पिछले साल महाराष्ट्र में महा विकास अघाडी (MVA) गठबंधन की सरकार चली गई. इस गठबंधन में कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं. सरकार जाने के बाद अब कई मुद्दों पर सहयोगी दलों की राय भी बंटी हुई दिख रही है. एक तरफ कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष अडानी मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगा है. वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस पर अपनी सहयोगी पार्टी से अलग राय रखी है. उन्होंने कहा है कि अडानी ग्रुप पर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया गया.
"अडानी पर JPC जांच की मांग गलत"समाचार चैनल NDTV से बातचीत में शरद पवार ने अडानी मुद्दे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की मांग को भी गलत बताया. एनसीपी प्रमुख ने कहा,
अडानी के मुद्दे पर पूरे बजट सत्र के दौरान संसद में हंगामा हुआ. विपक्षी दलों ने पूरे सत्र में JPC गठित कर जांच करने की मांग की. हालांकि इस मांग को लेकर शरद पवार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी का गठन किया है. इसमें रिटायर्ड जज हैं, एक्सपर्ट हैं, इकनॉमिस्ट हैं. कोर्ट ने कमिटी को जांच के लिए कहा है. शरद पवार के मुताबिक,
शरद पवार ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि वह राहुल गांधी के "अडानी-अंबानी" जैसे बयानों के जरिये बड़े कॉरपोरेट की आलोचना से सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है.
सावरकर को लेकर अलग रायइससे पहले विनायक दामोदर सावरकर को लेकर भी पवार ने राहुल गांधी से अलग बयान दिया था. दरअसल, लोकसभा सदस्यता जाने के बाद राहुल गांधी ने मानहानि मामले में माफी मांगने को लेकर कहा था,
इसके बाद महा विकास अघाडी में शामिल एनसीपी और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने सावरकर की तारीफ की थी. हाल में शरद पवार ने कहा था कि देश की आजादी के लिए सावरकर के बलिदान की कोई अनदेखी नहीं कर सकता है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि सावरकर पर असहमति को राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बनाना चाहिए क्योंकि देश में कई बड़े मुद्दे हैं.
वहीं उद्धव ठाकरे ने साफ-साफ कहा था कि उनकी पार्टी सावरकर की आलोचना बर्दाश्त नहीं करेगी. पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था कि राहुल गांधी को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जिनसे दोनों दलों के बीच दरार पैदा हो.
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