कार एक्सीडेंट में घायल हुईं शबाना आज़मी, घटियापन पर उतर आए ट्रोल्स
कुछ दिनों पहले शबाना ने CAA का विरोध किया था.
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शबाना आज़मी ने कुछ दिनों पहले CAA के ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट की अपील की थी.
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दिग्गज अदाकारा शबाना आज़मी 18 जनवरी को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गईं. मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर खालापुर टोल प्लाज़ा के पास उनकी कार एक ट्रक से टकरा गई. उन्हें पनवेल के महात्मा गांधी मिशन अस्पताल (MGM) के इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती कराया गया. कार में उनके पति और मशहूर गीतकार जावेद अख्तर भी थे. उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है.
एक तरफ लोग उनके जल्दी ठीक होने की दुआएं मांग रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ एक जमात ऐसी भी है जो शबाना आज़मी के लिए अभद्रता का कीर्तिमान बना रहे हैं. सिर्फ इसलिए कि शबाना आज़मी ने कुछ दिनों पहले CAA का विरोध किया था और लोगों से इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की अपील भी की थी. जावेद अख्तर भी लगातार CAA का मुखर होकर विरोध कर रहे हैं.
शबाना आज़मी का वामपंथी और देशविरोधी कहकर मज़ाक उड़ाया जा रहा है. ट्रोल आर्मी ये कहने से भी नहीं चूक रही कि शबाना आज़मी को उनके कर्मों की सजा मिल रही है.
ये सड़क हादसा करीब शाम 4 बजे हुआ. सूचना के मुताबिक, शबाना आज़मी के हाथ और चेहरे में गंभीर चोट आई थी. हादसे के बाद की एक तस्वीर में वो बेहोशी की हालत में सड़क पर लेटी नज़र आ रही हैं. उनका चेहरा सूजा हुआ दिख रहा है. उनका ड्राइवर भी घायल हुआ है. कार का अगला हिस्सा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. शबाना आज़मी को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाएगा.
लोग उनके बारे में कैसी बातें कर रहे हैं देखिए.
किसी भी मुद्दे पर लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं. शबाना आज़मी ने भी CAA के मुद्दे पर अपनी बात ही रखी थी. उनके साथ हुआ हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है. विचारों में अंतर होने से कोई किसी के मरने की दुआ कैसे कर सकता है? ये एक सभ्य समाज की सोच से परे है. और, हमारा देश तो ऐसा बिल्कुल ही नहीं है. एक ऐसा देश जो सबको समानता और स्वतंत्रता देने में यकीन रखता हो. उसमें ऐसी घटिया सोच की कोई जगह नहीं हो सकती.
वीडियो : जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा पर खुलकर बोले अनिल कपूर और शबाना आज़मी
किसी भी मुद्दे पर लोगों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं. शबाना आज़मी ने भी CAA के मुद्दे पर अपनी बात ही रखी थी. उनके साथ हुआ हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है. विचारों में अंतर होने से कोई किसी के मरने की दुआ कैसे कर सकता है? ये एक सभ्य समाज की सोच से परे है. और, हमारा देश तो ऐसा बिल्कुल ही नहीं है. एक ऐसा देश जो सबको समानता और स्वतंत्रता देने में यकीन रखता हो. उसमें ऐसी घटिया सोच की कोई जगह नहीं हो सकती.
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