सीरम इंस्टीट्यूट किस कीमत पर राज्यों और निजी अस्पतालों को कोविशील्ड वैक्सीन देगा, जान लीजिए
कंपनी केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रति डोज की कीमत पर कोविशील्ड दे रही है.
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सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज़ के बीच का वक्त बढ़ा दिया है. लोग कह रहे हैं वैक्सीन की कमी पूरा करने को ऐसा कर रहे हैं. क्या इसके पीछे कुछ कोई वैज्ञानिक कारण भी है.
फाइल फोटो- India Today
कोविड-19 महामारी के खिलाफ चल रहे वैक्सीनेशन प्रोग्राम में अहम भूमिका निभा रही वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने बड़ी घोषणा की है. बुधवार (21 अप्रैल) को एक बयान जारी कर SII ने राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए अपनी कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड के दाम तय कर दिए. कंपनी के मुताबिक, राज्य सरकारों को 400 रुपये प्रति डोज की कीमत पर वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी. वहीं, निजी अस्पतालों को इसके लिए 600 रुपये देने होंगे. केंद्र सरकार को SII 150 रुपये प्रति डोज की कीमत पर वैक्सीन मुहैया करा रही है.
कंपनी ने ये भी कहा कि वो अगले दी महीने वैक्सीन उत्पादन की अपनी क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देगी. इस दौरान कंपनी अपनी 50 प्रतिशत उत्पादन क्षमता भारत सरकार के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए देती रहेगी. बाकी 50 प्रतिशत वैक्सीन राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए मुहैया कराई जाएंगी.
SII की प्रेस रिलीज.
विदेशी टीकों से तुलना SII ने अपने बयान में विदेशी वैक्सीनों के दामों की कोविशील्ड के कीमतों से तुलना भी की है. उसने बताया है कि जहां प्राइवेट मार्केट में अमेरिकी वैक्सीन्स के एक डोज के लिए 1500 रुपये, रूसी वैक्सीन्स के लिए 750 रुपये और चीन के टीके के लिए 750 रुपये देने पड़ रहे हैं, वहीं कोविशील्ड की कीमत 600 रुपये रखी गई है. कंपनी का कहना है कि उसने टीके के दाम इसलिए कम रखे ताकि अन्य विदेशी वैक्सीन्स की अपेक्षा भारत की वैक्सीन कम दाम में उपलब्ध हो सकें.
बयान में SII के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि कोविड-19 की मौजूदा स्थिति में हर किसी को अपने बलबूते वैक्सीन उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण काम है. उन्होंने कहा, यानी 4-5 महीने बाद लोगों को आसानी से मार्केट में ये वैक्सीन मिल जाएगी.
तस्वीर- Pixabay
और क्या कहा? बयान में अदार पूनावाला ने कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम को और तेज करने के लिए हाल में लिए गए निर्णयों को लेकर भारत सरकार का आभार व्यक्त किया. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों से कोविड-19 के खिलाफ चलाए गए टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और राज्य सरकारों, निजी अस्पतालों और वैक्सीनेशन सेंटर्स को सीधे वैक्सीन डोज मिल पाएंगे.
बता दें कि वैक्सीनेशन ड्राइव को और तेज करने के लिए इसी हफ्ते भारत सरकार ने SII और एक अन्य वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक को कुल 4500 करोड़ देने का फैसला किया है. इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी थी. इसके मुताबिक, इन 4500 करोड़ रुपये में से 3000 करोड़ रुपये SII को दिए जाएंगे. बाकी 1500 करोड़ रुपये भारत बायोटेक को देने का निर्णय किया गया है.
कोविशील्ड और कोवैक्सीन, दोनों वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति मिली है. फोटो- आजतक
क्या हैं मायने? केंद्र सरकार ने कुछ ही दिन पहले फैसला किया था कि अब कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को शामिल किया जाएगा. इसकी शुरुआत तीसरे चरण के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के साथ ही हो जाएगी. ये अभियान आगामी 1 मई से शुरू होने जा रहा है. पहले केवल 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को टीके लगाए जा रहे थे. लेकिन 1 मई से ऐसे लोगों की संख्या कई गुना बढ़ने वाली है. लाजमी है टीकों की मांग में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. उधर, कई राज्य सरकारें पहले से वैक्सीन की कमी की शिकायत कर रही हैं. महाराष्ट्र जैसे राज्य खुद से ही वैक्सीन डोज खरीदने की बात कहते रहे हैं. अब SII की घोषणा के बाद राज्य भी दुनिया की इस सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी से टीके खरीद सकेंगे.
कंपनी ने ये भी कहा कि वो अगले दी महीने वैक्सीन उत्पादन की अपनी क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देगी. इस दौरान कंपनी अपनी 50 प्रतिशत उत्पादन क्षमता भारत सरकार के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए देती रहेगी. बाकी 50 प्रतिशत वैक्सीन राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों के लिए मुहैया कराई जाएंगी.
SII की प्रेस रिलीज.
विदेशी टीकों से तुलना SII ने अपने बयान में विदेशी वैक्सीनों के दामों की कोविशील्ड के कीमतों से तुलना भी की है. उसने बताया है कि जहां प्राइवेट मार्केट में अमेरिकी वैक्सीन्स के एक डोज के लिए 1500 रुपये, रूसी वैक्सीन्स के लिए 750 रुपये और चीन के टीके के लिए 750 रुपये देने पड़ रहे हैं, वहीं कोविशील्ड की कीमत 600 रुपये रखी गई है. कंपनी का कहना है कि उसने टीके के दाम इसलिए कम रखे ताकि अन्य विदेशी वैक्सीन्स की अपेक्षा भारत की वैक्सीन कम दाम में उपलब्ध हो सकें.
बयान में SII के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि कोविड-19 की मौजूदा स्थिति में हर किसी को अपने बलबूते वैक्सीन उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण काम है. उन्होंने कहा, यानी 4-5 महीने बाद लोगों को आसानी से मार्केट में ये वैक्सीन मिल जाएगी.
तस्वीर- Pixabay
और क्या कहा? बयान में अदार पूनावाला ने कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम को और तेज करने के लिए हाल में लिए गए निर्णयों को लेकर भारत सरकार का आभार व्यक्त किया. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय का जिक्र करते हुए कहा कि इन फैसलों से कोविड-19 के खिलाफ चलाए गए टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और राज्य सरकारों, निजी अस्पतालों और वैक्सीनेशन सेंटर्स को सीधे वैक्सीन डोज मिल पाएंगे.
बता दें कि वैक्सीनेशन ड्राइव को और तेज करने के लिए इसी हफ्ते भारत सरकार ने SII और एक अन्य वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक को कुल 4500 करोड़ देने का फैसला किया है. इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी थी. इसके मुताबिक, इन 4500 करोड़ रुपये में से 3000 करोड़ रुपये SII को दिए जाएंगे. बाकी 1500 करोड़ रुपये भारत बायोटेक को देने का निर्णय किया गया है.
कोविशील्ड और कोवैक्सीन, दोनों वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति मिली है. फोटो- आजतक
क्या हैं मायने? केंद्र सरकार ने कुछ ही दिन पहले फैसला किया था कि अब कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को शामिल किया जाएगा. इसकी शुरुआत तीसरे चरण के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के साथ ही हो जाएगी. ये अभियान आगामी 1 मई से शुरू होने जा रहा है. पहले केवल 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को टीके लगाए जा रहे थे. लेकिन 1 मई से ऐसे लोगों की संख्या कई गुना बढ़ने वाली है. लाजमी है टीकों की मांग में जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. उधर, कई राज्य सरकारें पहले से वैक्सीन की कमी की शिकायत कर रही हैं. महाराष्ट्र जैसे राज्य खुद से ही वैक्सीन डोज खरीदने की बात कहते रहे हैं. अब SII की घोषणा के बाद राज्य भी दुनिया की इस सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी से टीके खरीद सकेंगे.

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