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उद्धव ठाकरे को SC से राहत नहीं, शिंदे गुट के पास ही रहेगा शिवसेना का नाम और सिंबल

EC के फैसले पर रोक लगाने से इनकार

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22 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 22 फ़रवरी 2023, 05:02 PM IST)
uddhav thackeray eknath shinde supreme court
फाइल फोटो: आजतक
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सुप्रीम कोर्ट से उद्धव गुट को अभी के लिए राहत नहीं मिली है. चुनाव आयोग के फैसले को कोर्ट ने बरकरार रखा है. यानी शिवसेना का नाम और उसका चुनाव निशान दोनों ही फिलहाल शिंदे गुट के पास ही बने रहेंगे. कोर्ट ने उद्धव गुट और शिंदे के खेमे को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है.

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभी इस स्थित में चुनाव आयोग के ऑर्डर पर रोक नहीं लगाई जा सकती. क्योंकि शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने खुद को साबित किया है. उद्धव गुट की ओर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पैरवी की. उन्होंने अदालत से यथास्थिति बनाए रखने की मांग की. लेकिन, कोर्ट ने ऐसा कोई ऑर्डर पास नहीं किया. शिंदे गुट ने भी उद्धव की याचिका से पहले सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की थी जिसमें मांग की गई थी कि कोर्ट कोई भी फैसला देने से पहले उनका पक्ष जरूर सुने.

बता दें कि कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग ने उद्धव गुट को बड़ा झटका दिया था. आयोग ने शिंदे गुट को ही असल शिवसेना माना था और धनुष-बाण वाला चिन्ह भी उन्हीं के पास गया था. उस फैसले को उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

चुनाव आयोग ने किस आधार पर फैसला सुनाया था?

17 फरवरी को चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के नाम और निशान पर अधिकार एकनाथ शिंटे गुट को दे दिया था. चुनाव आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि शिंदे गुट के पास 40 विधायकों का समर्थन है. जबकि ठाकरे गुट के पास सिर्फ 15 विधायक हैं.

इसके अलावा ने कहा था कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है. बिना किसी चुनाव के पदाधिकारियों के रूप में एक मंडली के लोगों को नियुक्त किया गया है. इस तरह की पार्टी संरचनाएं भरोसा पैदा करने में विफल रहती हैं.

चुनाव आयोग ने पाया कि 2018 में शिवसेना के संविधान में बदलाव किया गया और इसकी सूचना चुनाव आयोग को नहीं दी गई. आयोग के मुताबिक शिवसेना की तरफ से 2018 में पार्टी संविधान में किए गए बदलाव लोकतंत्र के अनुकूल नहीं थे, क्योंकि इससे पार्टी एक जागीर के समान हो गई.

इससे पहले अक्टूबर 2022 में, चुनाव आयोग ने शिवसेना के धनुष और तीर के चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया था. दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और अलग चिन्ह दिए. शिंदे गुट को दो तलवारों और ढालों के साथ "बालासाहेब की शिवसेना" नाम दिया गया था. उद्धव गुट को शिवसेना- उद्धव बालासाहेब ठाकरे नाम दिया गया और मशाल को उसका प्रतीक चिन्ह दिया गया था.

उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?

चुनाव आयोग के फैसले के बाद उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बातचीत की थी. उन्होंने कहा था कि उनकी शिवसेना को चुराया गया है और वे जनता के बीच भी इसी बात का प्रचार करने वाले हैं. उन्होंने आगे कहा था कि शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी के तलवे चाटने के लिए पैदा नहीं हुई. शिवसेना को 'सुपारी' देकर खत्म करने की कोशिश की जा रही है. उद्धव ने माना कि उनके लिए ये सबसे कठिन समय है और वो पार्टी को फिर से खड़ा करके दिखाएंगे.

वीडियो: महाराष्ट्र में वो चिट्ठी ना मिली तो शिंदे सरकार पर आफत?

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