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IAS, IPS और आर्मी अफसर सलाहकार, संजय शेरपुरिया के 'कांड' में कौन-कौन था शामिल?

संजय शेरपुरिया का एक और कांड पता लगा

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1 मई 2023 (अपडेटेड: 1 मई 2023, 01:12 PM IST)
sanjay Sherpurias charity firm retired IAS IPS armed forces
संजय शेरपुरिया के बड़े अफसरों से रिश्ते भी सामने आए हैं | पहला फ़ाइल फोटो, दूसरा प्रतीकात्मक फोटो
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उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल ही में संजय प्रकाश राय उर्फ़ संजय शेरपुरिया नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसके फाउंडेशन में बड़े-बड़े अधिकारी एडवाइजर थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक संजय शेरपुरिया की कंपनी - यूथ रूरल आंत्रप्रेन्योर फाउंडेशन (YREF) - के सलाहकार बोर्ड में रिटायर्ड IAS, IPS और सैन्य अधिकारी अधिकारी तक शामिल थे.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शेरपुरिया के फाउंडेशन से जुड़े एक रिटायर्ड IAS अधिकारी के कश्मीर में गिरफ़्तार किए गए ठग किरण पटेल से भी संबंध रहे हैं. सलाहकार बोर्ड के एक अन्य सदस्य, जो एक IPS अधिकारी थे, वो 2018 में CBI में हुए अधिकारियों के झगड़े में शामिल रहे थे. एक और बात ये भी पता लगी है कि इस IPS अधिकारी का बेटा YREF के निदेशक के साथ एक और कंपनी चलाता है. संयोग से इस कंपनी का एड्रेस कभी वही था जो संजय प्रकाश राय का था.

रिपोर्ट के मुताबिक कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार YREF को 30 अक्टूबर, 2019 को रजिस्टर कराया गया था. इसका रजिस्टर्ड ऑफिस वाराणसी में है और ये कंपनी गाजीपुर से संचालित होती है. YREF ने अपने शेयरधारकों का खुलासा भी नहीं किया है. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में इसका कारण इस कंपनी का चैरिटेबल संस्था होना बताया गया है. जानकारी ये भी है कि YREF में संजय शेरपुरिया किसी पद पर नहीं है. लेकिन, यूपी पुलिस की FIR में दावा किया गया है कि वही इस कंपनी को चला रहा था. 

मनोज सिन्हा के हलफनामे में संजय शेरपुरिया का नाम

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा 2014 में यूपी के गाजीपुर से लोकसभा चुनाव जीते थे. लेकिन 2019 में वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार अफजाल अंसारी से हार गए थे. मनोज सिन्हा को साल 2020 में जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था. मनोज सिन्हा के 2019 के लोकसभा चुनाव हलफनामे में 57 लाख रुपये तक के पांच "असुरक्षित" लोन का जिक्र है. इसमें संजय शेरपुरिया की ओर से दिया गया लोन सबसे अधिक (25 लाख रुपये) है. इसके अलावा चार अन्य लोगों की ओर से 3 लाख रुपये, 6 लाख रुपये, 8 लाख रुपये और 15 लाख रुपये के कर्ज हैं.

मनोज सिन्हा, जो 1996 और 1999 में गाजीपुर से सांसद चुने गए थे, 2019 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी इस क्षेत्र में राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय थे. लेकिन जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल बनने के बाद, अपनी संवैधानिक स्थिति को देखते हुए, वे पार्टी की गतिविधियों से दूर रहे हैं.

BJP से संजय शेरपुरिया का क्या कनेक्शन है?

इंडियन एक्सप्रेस की ओर से मनोज सिन्हा को शेरपुरिया से कर्ज लेने के मामले में सवाल भेजा गया था. हालांकि, वे टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे. रिपोर्ट के मुताबिक मनोज सिन्हा के एक करीबी सूत्र ने दावा किया कि सिन्हा का 2015-16 से संजय शेरपुरिया के साथ कोई संपर्क नहीं है.

सूत्र ने बताया कि LG की ओर से शेरपुरिया को पैसा वापस करने की कोशिश की गई थी, लेकिन उससे संपर्क नहीं हो सका. वहीं गाजीपुर में BJP के जिला अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने बताया,

"(संजय प्रकाश) राय न तो BJP के सदस्य हैं और न ही कोई पदाधिकारी. वह गाजीपुर आते थे और हमसे मिलते थे, लेकिन उनका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है."

वहीं रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी के एक BJP नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शेरपुरिया को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से निकटता के लिए जाना जाता था. BJP नेता के मुताबिक जब भी संजय शेरपुरिया वाराणसी आता, स्थानीय पार्टी नेता उससे मिलते थे.

वीडियो: ED से बचाने के नाम पर संजय शेरपुरिया पर जालसाजी का आरोप, BJP के बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल

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