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'मुस्लिमों के घर गिराने वाली सरकार की कमेटी...', संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट पर ओवैसी क्या बोले?

रिपोर्ट के मुताबिक संभल में 1936 से 2019 के बीच हुए 15 दंगों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई.

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रिपोर्ट को लेकर AIMIM सांसद असदूद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया आई है. (तस्वीर- पीटीआई)
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सौरभ
29 अगस्त 2025 (Updated: 29 अगस्त 2025, 09:59 PM IST)
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पिछले साल यूपी के संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी. रिपोर्ट 400 पन्नों की है और अभी इसे गोपनीय रखा गया है. लेकिन सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि संभल में अब सिर्फ 15 प्रतिशत हिंदू बचे हैं. हालांकि आधिकारिक रूप से जानकारी आना बाकी है. इस बीच रिपोर्ट को लेकर AIMIM सांसद असदूद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया आई है.

ओवैसी ने रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कमेटी पर ही सवाल उठा दिए हैं. मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने कहा,

हमें इस तथाकथित समिति से स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. यह उस सरकार के अधीन काम कर रही है जिसने मुसलमानों के घरों को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया है. जो सरकार एनकाउंटर्स करती है जिनमें ज्यादातर मुस्लिम ही टारगेट होते हैं. वो संभल में उथल-पुथल चाहते हैं. वो संभल के लोगों के लिए समस्या पैदा करना चाहते हैं. और मुझे यकीन है कि संभल के लोग बीजेपी और तथाकथित धर्मनिर्पेक्ष पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देंगे.

आयोग की जांच रिपोर्ट

आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज देवेंद्र कुमार अरोड़ा ने की. इसमें पूर्व IPS अधिकारी अरविंद कुमार जैन और पूर्व IAS अधिकारी अमित मोहन प्रसाद भी शामिल थे. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से इस रिपोर्ट पर एक विस्तृत खबर की है. रिपोर्ट के मुताबिक संभल में दंगे, हिंसा और तुष्टिकरण की नीतियों के कारण हिंदुओं की आबादी में कमी आई है. रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद ज़िया उर रहमान बर्क के शाही जामा मस्जिद में दिए गए भाषण को हिंसा भड़काने वाली घटनाओं में से एक कारण बताया गया है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यहां केवल हिंदू और मुसलमानों के बीच ही नहीं, बल्कि 'विदेशी मुसलमानों' (जैसे तुर्क) और ‘धर्मांतरित हिंदुओं’ (जैसे पठान) के बीच भी टकराव होते रहे हैं. आयोग ने 1936 से 2019 के बीच संभल में हुए 15 दंगों का ज़िक्र किया है, जिनमें 200 से अधिक लोगों की मौत हुई.

रिपोर्ट में कई तीर्थ स्थलों और पवित्र कुओं पर समय-समय पर कब्ज़े का भी जिक्र है. इसमें एक गैंग लीडर की भूमिका का भी उल्लेख है, जो नकली नोटों के कारोबार में शामिल था. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की हिंसा में जिन हथियारों का इस्तेमाल हुआ, उनमें से कई विदेशी थे और ज़्यादातर अमेरिका में बने थे.

क्यों बनी कमेटी?

संभल विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024 को हुई, जब हिंदू पक्ष ने जिला अदालत में दावा किया कि शाही जामा मस्जिद 16वीं सदी में बने एक मंदिर पर बनाई गई है.

कोर्ट ने उसी दिन मस्जिद का सर्वे कराने का आदेश दिया. दूसरा सर्वे 24 नवंबर को हुआ, जिसके बाद हिंसा भड़की. इसमें 4 लोगों की मौत और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए. इस हिंसा में सांसद ज़िया उर रहमान बर्क और मस्जिद कमेटी प्रमुख जफर अली समेत 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. बाद में सरकार ने एक अभियान चलाकर दावा किया कि इलाके में 68 धार्मिक स्थल और 19 पवित्र कुएं अवैध कब्ज़े से मुक्त कराए गए.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि रिपोर्ट गोपनीय है, लेकिन मीडिया में इसकी बातें आ रही हैं. यह सत्ताधारी पार्टी का तरीका है असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का और हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा खड़ा करने का. उन्होंने कहा कि नौजवान रोजगार ढूंढ रहे हैं, किसान परेशान हैं और सरकार केवल समाज को बांटने की कोशिश कर रही है.

वीडियो: संभल हिंसा पर रिपोर्ट, 45% से घटकर 15% हो गई हिंदुओं की आबादी

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