चीन जा रहा था रूसी तेल टैंकर, रास्ता बदलकर भारत पहुंचा, ऐसे ही छह और आ रहे
रूसी तेल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ को असल में चीन के लिए जाना था. लेकिन मार्च के बीच में इसने अपना रास्ता बदल लिया. अब यह भारत के पश्चिमी तट पर पहुंच गया है.

रूसी तेल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ (Aqua Titan) अब भारत के पश्चिमी तट पर पहुंच गया है. ब्लूमबर्ग ने 18 मार्च को रिपोर्ट किया था कि रूस से तेल लेकर चीन जा रहे कम से कम सात टैंकरों ने बीच रास्ते में ही अपना रास्ता बदल लिया है और अब वे भारत की ओर बढ़ रहे हैं. ‘एक्वा टाइटन’ उन सात जहाजों में से पहला जहाज है, जो 22 मार्च को भारत पहुंचा है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एक्वा टाइटन’ मीडियम साइज का टैंकर है. इसे जनवरी के आखिर में बाल्टिक सी पोर्ट पर लोड किया गया था और इसे असल में चीन के रिझाओ पोर्ट के लिए जाना था. लेकिन, मार्च के बीच में इसने अपना रास्ता बदल लिया. ऐसा तब हुआ जब भारत को अमेरिका से समुद्र में फंसे ‘प्रतिबंधित’ रूसी तेल को खरीदने के लिए कुछ समय की छूट मिली. ताजा जानकारी के मुताबिक, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) का किराए पर लिया गया यह जहाज अभी अरब सागर में मैंगलोर तट से करीब 18 किलोमीटर दूर है और माल उतरने का इंतजार कर रहा है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में चल रही जंग की वजह से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया है. यहां से जहाजों को नहीं निकाला जा रहा. सप्लाई रुकने से भारत समेत कई देशों में कच्चे तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का संकट खड़ा हो गया है. होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इसका लगभग 40 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है. देश के LNG आयात का लगभग आधा हिस्सा और LPG की ज्यादातर खेप इसी जलमार्ग से होकर आती-जाती है.
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रूसी कच्चा तेल लेकर आ रहे इन सात टैंकरों के आने से भारत में कच्चे तेल की कमी कुछ वक्त के लिए दूर होने की उम्मीद है. वहीं, LPG की एक बड़ी खेप भी भारत पहुंच गई है. अमेरिका के टेक्सास से रवाना हुआ कार्गो शिप ‘पाइक्सिस पायनियर’ (Pyxis Pioneer) रविवार, 22 मार्च को न्यू मंगलुरु पोर्ट पर पहुंचा. पोर्ट पर इस समय जरूरी सुरक्षा जांच और माल उतारने की प्रक्रियाएं चल रही हैं.
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