'एक्स्ट्रा तेल नहीं है', अमेरिका ने तेल बेचने की छूट पर बात की तो ईरान ने भी तेवर दिखा दिए
अमेरिकी छूट के बाद से भारतीय रिफाइनरियां ईरान से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने का प्लान बना रही हैं. हालांकि, ईरान इसे लेकर कड़ा रुख अपना रहा है.

पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने इशारा किया है कि वो ईरान को तेल बेचने के लिए 30 दिन की छूट दे सकता है. बताया गया कि इसके जरिए अमेरिका दुनिया भर में आसमान छूती तेल की कीमतों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है. इस खबर के सामने आने आने के बाद भारतीय रिफाइनरियां ईरान से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू करने का प्लान बना रही हैं. हालांकि, ईरान इसे लेकर कड़ा रुख अपना रहा है. तेहरान का कहना है कि उसके पास अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए एक्स्ट्रा कच्चा तेल नहीं है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 20 मार्च, शुक्रवार को कहा कि यूएस समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की इजाज़त दे सकता है.
बेसेंट ने बताया कि आने वाले दिनों में अमेरिका समुद्र में फंसे लगभग 140 मिलियन (14 करोड़) बैरल ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा सकता है. पिछले दो हफ्तों में तेल की कीमतें $100 (9312 रुपये) प्रति बैरल से ज्यादा रहीं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ईरान ने इजरायल-अमेरिका के साथ चल रही जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है. साथ ही इसके पास से गुजरने वाले तेल के टैंकरों पर भी हमला किया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से इस तरह की छूट मिलने के बाद भारत ने जहाजों पर लदे रूसी तेल को पहले ही खरीदना शुरू कर दिया है. अब भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल की ओर देख रही हैं. जाहिर है कि भारत अपने तेल का 90% हिस्सा बाहर से खरीदता है और उसके कच्चे तेल का लगभग 60% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. रॉयटर्स के मुताबिक, तीन कंपनियां ईरानी तेल खरीदने की योजना बना रही हैं और सरकार के निर्देशों का इंतजार कर रही हैं.
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ईरान का कड़ा रुखइसी बीच ईरान ने अमेरिका की बात को गलत बताकर एक नई अड़चन पैदा कर दी है. मुंबई में ईरान के दूतावास की ओर से जारी एक बयान में कहा गया,
"फिलहाल, ईरान के पास अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कोई फ्लोटिंग क्रूड या सरप्लस उपलब्ध नहीं है. ऐसा लगता है कि अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने खरीदारों को भरोसा दिलाने और बाजार के माहौल को संभालने के लिए यह बयान दिया है."
दरअसल, इस जंग में ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके दूसरे देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है. दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. यह देखना बाकी है कि अगले हफ्ते बाजार इस ताजा घटनाक्रम पर कैसी प्रतिक्रिया देता है.
वीडियो: ईरान ने Strait of Hormuz की जगह कौन सा नया रास्ता निकाला?

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