'सब तुम्हारा ही किया धरा', यूक्रेन पहुंचे बाइडेन को पुतिन ने सुनाईं 10 बातें
'अमेरिका ने यूक्रेन के कंधे पर बंदूक रखी और दाग दी, सीरिया-इराक में भी उसने यही किया था'

रूस-यूक्रेन जंग की पहली बरसी 24 फरवरी को है. इससे ठीक 3 दिन पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने देश की जनता को संबोधित किया. उम्मीद की जा रही थी कि अपने संबोधन में पुतिन कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं. आइये बताते हैं कि पुतिन ने क्या कहा?
1- रूस ने शुरुआत में जंग को टालने के लिए तमाम डिप्लोमैटिक कोशिशें कीं, लेकिन नाटो और अमेरिका ने इन्हें कामयाब नहीं होने दिया. हम अब भी बातचीत चाहते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें मंजूर नहीं है.
2- यूक्रेन को लॉन्ग रेंज डिफेंस सिस्टम दिए जा रहे हैं. हमारे बॉर्डर पर इसकी वजह से खतरा मंडरा रहा है. रूस और यूक्रेन का मामला लोकल था. अमेरिका और उसके साथियों ने इसे दुनिया का मसला बना दिया.
3- सच्चाई ये है कि इस जंग की शुरुआत वेस्टर्न पावर्स की वजह से हुई. हमने उस वक्त भी हर मुमकिन कोशिश की. वो लोग कीव और यूक्रेन के कंधों पर रखकर बंदूक चला रहे हैं, उन्हें मूर्ख बना रहे हैं. उन्होंने सीरिया और इराक के साथ भी यही किया था. हम अपने वतन की हिफाजत करना बखूबी जानते हैं.
4- अमेरिका और उसके साथी महज अपना दबदबा बढ़ाने की साजिश के खातिर दूसरों को मोहरा बना रहे हैं. वेस्टर्न पावर ने ही जंग के जिन्न को बोतल से बाहर निकाला है, और वो ही इसे वापस बोतल में डाल सकते हैं. हम तो सिर्फ अपने देश और लोगों की हिफाजत करना चाहते हैं और यही कर भी रहे हैं.
5- जहां तक डोनबास इलाके का मामला है तो हमने हमेशा कहा कि पहले इसे शांति से सुलझा लीजिए. लेकिन, रूस पर इल्जाम लगाने वाले ये भी देख लें कि वेस्टर्न लीडर्स का क्या रोल रहा. इन लोगों ने लगातार धोखेबाजी की और झूठ बोला. वेस्टर्न पावर सम्मान देना नहीं जानते. वो पूरी दुनिया पर थूकने की कोशिश करते हैं. यही तरीका वो अपने देशों की जनता के साथ भी अपनाते हैं.
6- ये ध्यान रखिए कि रूस अपनी इज्जत से समझौता नहीं करेगा. कीव में इतनी ताकत नहीं कि वो डोनबास का मसला सुलझा ले. वहां के लोग चाहते हैं कि रूस आए और उनकी परेशानियों को हल करे.
7- मैंने ये कभी नहीं कहा कि जंग से ही इस मसले का हल निकाला जा सकता है. बातचीत तो होनी चाहिए, लेकिन इसमें सही तरीका अपनाया जाना चाहिए. प्रेशर टेक्टिक्स के आगे रूस न झुका है और न झुकेगा.
8- हमें तो वेस्टर्न पावर्स से भी बातचीत करने में कोई दिक्कत नहीं है. हम चाहते हैं कि हमारे बीच जॉइंट सिक्योरिटी स्ट्रक्चर हो. इसके लिए मैंने खुद कई साल तक कोशिश की, लेकिन अमेरिका और दूसरे वेस्टर्न पावर हल चाहते ही नहीं है. हमें हमेशा इग्नोर किया गया. दुनिया में ऐसा कौन सा देश है, जिसके अमेरिका के बराबर दुनिया के दूसरे देशों में मिलिट्री बेसेस हैं? इसके बाद वो अमन की बात करते हैं तो सोचना पड़ता है.
9- हमारी जंग यूक्रेन के लोगों से नहीं है, क्योंकि वो तो वहां की हुकूमत के बंधक हैं. दुनिया ये कान खोलकर सुन ले कि रूस को जंग के मैदान में हराना नामुमकिन है. दरअसल, वेस्टर्न पावर चाहते हैं कि यूरोप में वो पुलिस का रोल अदा करें. हम अपने बच्चों पर कोई खतरा नहीं आने देंगे.
10- दुनिया के सबसे अमीर देशों के संगठन G7 ने गरीब देशों की मदद के लिए 60 अरब डॉलर दिए. ये अच्छी बात है. मगर ये भी देखिए कि उन्होंने जंग के लिए 150 अरब डॉलर का फंड रखा. ये दोगुलापन नहीं तो और क्या है?
अचानक कीव पहुंच गए थे बाइडेनएक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अचानक यूक्रेन के दौरे पर पहुंच गए थे. उनकी इस विजिट को दुनिया हैरानी से देख रही थी, क्योंकि उनका ये दौरा अचानक ही सामने आया था, इसके बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी. कीव पहुंचकर बाइडेन ने कहा था कि अमेरिका हमेशा यू्क्रेन के साथ खड़ा है और आगे भी उसके साथ खड़ा रहेगा. उन्होंने कहा था कि यूक्रेन को हर संभवन मदद की जाएगी.
वीडियो: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अचानक यूक्रेन पहुंचे, पूरी दुनिया देखती रह गई!

